पाकिस्तान के बलूचिस्तान में बढ़ती हिंसा ने अमेरिका के साथ उसके महत्वपूर्ण खनिज सहयोग पर सवाल खड़े कर दिए हैं। US Strategic Metals के साथ हुए समझौते के बीच सुरक्षा चुनौतियां बढ़ी हैं, जबकि रेको दिक क्षेत्र में भी गतिविधियां प्रभावित होने का दावा है।
इस्लामाबाद: पाकिस्तान के बलूचिस्तान में जारी विद्रोह और सुरक्षा संकट ने देश के महत्वाकांक्षी क्रिटिकल मिनरल्स प्रोजेक्ट को मुश्किल में डाल दिया है। पाकिस्तान ने पिछले साल अमेरिका के साथ महत्वपूर्ण खनिजों और रेयर अर्थ एलिमेंट्स के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की कोशिश की थी। इसके तहत मिसौरी स्थित US Strategic Metals (USSM) और पाकिस्तान की सैन्य-संबद्ध Frontier Works Organisation (FWO) के बीच 500 मिलियन डॉलर के समझौते की घोषणा हुई थी। अब बलूचिस्तान में बढ़ती हिंसा और खनिज क्षेत्रों तक पहुंच से जुड़ी सुरक्षा चुनौतियां इस साझेदारी की व्यावहारिक संभावनाओं पर सवाल खड़े कर रही हैं। पाकिस्तान के लिए यह मामला केवल खनन या निर्यात का नहीं है। इस परियोजना को अमेरिका के साथ आर्थिक और रणनीतिक संबंध मजबूत करने तथा चीन-केंद्रित वैश्विक क्रिटिकल मिनरल सप्लाई चेन का वैकल्पिक स्रोत विकसित करने की कोशिश के रूप में देखा गया था।
500 मिलियन डॉलर की US-पाकिस्तान मिनरल डील
8 सितंबर 2025 को पाकिस्तान की Frontier Works Organisation और US Strategic Metals के बीच महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्र में सहयोग के लिए समझौता हुआ था। पाकिस्तान सरकार के अनुसार, इसका उद्देश्य देश के खनिज संसाधनों की खोज, वैल्यू एडिशन, प्रोसेसिंग क्षमता और इससे जुड़ा बुनियादी ढांचा विकसित करना था।
इस समझौते के तहत अमेरिका के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाले एंटीमनी, कॉपर और रेयर अर्थ एलिमेंट्स सहित कई खनिजों पर काम करने की योजना थी। इसके अलावा पाकिस्तान में एक पॉलीमेटैलिक रिफाइनरी जैसी प्रोसेसिंग क्षमता विकसित करने की महत्वाकांक्षा भी सामने आई थी।
पहले चरण में पाकिस्तान से अमेरिका को कुछ खनिज सामग्री भेजी गई थी। US Strategic Metals ने अक्टूबर 2025 में पहली खेप मिलने की घोषणा की थी, जिसमें एंटीमनी, कॉपर कॉन्सन्ट्रेट और रेयर अर्थ तत्व शामिल थे।
ट्रम्प के सामने पेश किए गए थे खनिज सैंपल
इस मिनरल डिप्लोमेसी का सबसे चर्चित दृश्य सितंबर 2025 में सामने आया था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ व्हाइट हाउस में हुई बैठक के दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने एक लकड़ी के बॉक्स में रखे रंग-बिरंगे खनिज सैंपल दिखाए थे।
व्हाइट हाउस की आधिकारिक तस्वीरों में ट्रम्प को खनिजों से भरे बॉक्स को देखते हुए दिखाया गया था। यह बैठक 25 सितंबर 2025 को हुई थी।
मीडिया रिपोर्टों में इस प्रस्तुति को पाकिस्तान की ओर से अमेरिकी प्रशासन को अपने खनिज संसाधनों की क्षमता दिखाने की कोशिश के तौर पर देखा गया। अमेरिकी बाजार के लिए महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति में विविधता लाने की कोशिश के बीच पाकिस्तान ने अपने संसाधनों को निवेश के अवसर के रूप में पेश किया था।
अब बलूचिस्तान की सुरक्षा बनी बड़ी चुनौती
बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है और खनिज संसाधनों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। लेकिन इसी क्षेत्र में लंबे समय से बलूच अलगाववादी संगठनों और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के बीच संघर्ष जारी है।
बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) सहित विद्रोही संगठनों की गतिविधियों ने खनन, परिवहन और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के सामने सुरक्षा संबंधी जोखिम बढ़ाए हैं।
ऐसे माहौल में खदानों से खनिज निकालना ही पर्याप्त नहीं है। खनिजों को सड़क मार्ग से सुरक्षित तरीके से प्रसंस्करण केंद्रों और बंदरगाहों तक पहुंचाना भी जरूरी है। यदि सड़कें बाधित होती हैं या परियोजना क्षेत्रों तक कर्मचारियों और मशीनरी की आवाजाही प्रभावित होती है, तो पूरी सप्लाई चेन पर असर पड़ सकता है।
रेको दिक क्षेत्र क्यों महत्वपूर्ण है?
बलूचिस्तान का चागाई जिला पाकिस्तान की खनिज रणनीति में खास महत्व रखता है। इसी व्यापक क्षेत्र में रेको दिक स्थित है, जिसे दुनिया के महत्वपूर्ण अविकसित कॉपर-गोल्ड संसाधनों में गिना जाता है।
रेको दिक परियोजना मुख्य रूप से तांबे और सोने से जुड़ी है, लेकिन चागाई बेल्ट को व्यापक रूप से पाकिस्तान के अन्य महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों के संदर्भ में भी देखा जाता है।
इसी वजह से क्षेत्र में सड़क, परिवहन और सुरक्षा व्यवस्था किसी भी बड़े अंतरराष्ट्रीय खनन निवेश के लिए निर्णायक मुद्दे हैं। विशेषज्ञ विश्लेषणों में भी बलूचिस्तान की सुरक्षा स्थिति को पाकिस्तान के खनिज निवेश कार्यक्रम की प्रमुख बाधाओं में शामिल किया गया है।
अमेरिकी कंपनी की योजना को क्यों झटका लग सकता है?
US Strategic Metals के साथ पाकिस्तान की साझेदारी अभी बड़े पैमाने पर औद्योगिक उत्पादन तक नहीं पहुंची है। सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) के विश्लेषण के मुताबिक, पाकिस्तान के साथ समझौते के बावजूद देश में व्यावसायिक स्तर पर रेयर अर्थ, टंग्स्टन या एंटीमनी उत्पादन की क्षमता को लेकर अभी महत्वपूर्ण सवाल बने हुए हैं।
इसका मतलब है कि पाकिस्तान को पहले संसाधनों की विश्वसनीय पहचान, खनन, परिवहन, प्रसंस्करण और रिफाइनिंग का पूरा ढांचा तैयार करना होगा। सुरक्षा समस्या इन सभी चरणों की लागत और समय दोनों बढ़ा सकती है।
यदि बलूचिस्तान में परियोजना क्षेत्रों तक पहुंच बाधित रहती है, तो अमेरिकी और अन्य विदेशी कंपनियों के लिए निवेश जोखिम बढ़ सकता है।
कनाडाई कंपनी Barrick भी रेको दिक में सक्रिय
बलूचिस्तान के खनिज क्षेत्र में अमेरिकी रुचि के अलावा कनाडाई कंपनी Barrick Mining भी रेको दिक परियोजना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
रेको दिक को पाकिस्तान की सबसे बड़ी संभावित खनन परियोजनाओं में से एक माना जाता है। हालांकि, किसी भी बड़े प्रोजेक्ट के लिए सुरक्षा, बुनियादी ढांचा और स्थानीय स्तर पर स्वीकार्यता महत्वपूर्ण शर्तें हैं।
बलूचिस्तान में लगातार जारी हिंसा इसलिए केवल एक अमेरिकी कंपनी के लिए समस्या नहीं है। इसका असर पाकिस्तान में विदेशी खनन निवेश की व्यापक धारणा पर भी पड़ सकता है।
रेयर अर्थ एलिमेंट्स की वैश्विक अहमियत
रेयर earth elements 17 रासायनिक तत्वों का समूह हैं। इनका इस्तेमाल आधुनिक अर्थव्यवस्था और उच्च तकनीक वाले उद्योगों में किया जाता है।
इन तत्वों का उपयोग इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहनों, पवन टर्बाइन, उन्नत मैग्नेट, रक्षा उपकरण, एयरोस्पेस और कई हाई-टेक उत्पादों में होता है। इसी वजह से अमेरिका और अन्य पश्चिमी देश चीन पर निर्भरता कम करने के लिए वैकल्पिक सप्लाई चेन विकसित करने की कोशिश कर रहे हैं।
पाकिस्तान के लिए यही वैश्विक मांग एक अवसर बन सकती है। लेकिन अवसर को वास्तविक आर्थिक लाभ में बदलने के लिए खनन के साथ-साथ प्रोसेसिंग और रिफाइनिंग क्षमता विकसित करना जरूरी होगा।
चीन बनाम अमेरिका की रणनीतिक प्रतिस्पर्धा
बलूचिस्तान की खनिज संपदा को लेकर अमेरिका की बढ़ती दिलचस्पी को चीन के साथ वैश्विक रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
चीन पाकिस्तान का लंबे समय से प्रमुख आर्थिक साझेदार है और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा यानी CPEC बलूचिस्तान के ग्वादर पोर्ट को चीन के पश्चिमी क्षेत्र से जोड़ने की रणनीति का हिस्सा है।
दूसरी ओर, अमेरिका क्रिटिकल मिनरल्स की सप्लाई चेन में चीन पर अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान के साथ USSM का समझौता इसी व्यापक रणनीति के एक हिस्से के रूप में देखा जा सकता है।
ग्वादर और स्थानीय लोगों की चिंता
बलूचिस्तान में खनिज परियोजनाओं के साथ-साथ ग्वादर पोर्ट भी लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक विवादों का केंद्र रहा है। स्थानीय समुदायों के एक हिस्से ने संसाधनों और आर्थिक गतिविधियों में स्थानीय लोगों की भागीदारी, रोजगार तथा मछली पकड़ने से जुड़े अधिकारों को लेकर चिंता जताई है।
इससे पाकिस्तान के सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ उसे विदेशी निवेश आकर्षित करना है, वहीं दूसरी ओर उसे स्थानीय आबादी की आर्थिक और राजनीतिक चिंताओं को भी संबोधित करना होगा।
आगे की राह होगी चुनौतीपूर्ण
पाकिस्तान ने रेयर earth और अन्य क्रिटिकल मिनरल्स को अपनी अर्थव्यवस्था तथा अमेरिका के साथ रणनीतिक संबंधों के लिए एक नए अवसर के रूप में पेश किया है। US Strategic Metals के साथ 500 मिलियन डॉलर का समझौता इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम था।
लेकिन सुरक्षा अस्थिरता, सीमित प्रोसेसिंग क्षमता, बुनियादी ढांचे की कमी और स्थानीय असंतोष इस योजना के सामने बड़ी चुनौतियां हैं।
ट्रम्प के सामने खनिज सैंपल पेश करने से पाकिस्तान ने अपनी खनिज संपदा को वैश्विक मंच पर जरूर प्रदर्शित किया था। अब असली चुनौती इन संसाधनों को सुरक्षित, विश्वसनीय और बड़े पैमाने की सप्लाई चेन में बदलने की है। यदि बलूचिस्तान की सुरक्षा स्थिति में सुधार नहीं होता, तो अमेरिकी और अन्य विदेशी निवेशकों के लिए पाकिस्तान के महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्र में बड़े पैमाने पर आगे बढ़ना कठिन बना रह सकता है।









