तुर्की ने पाकिस्तान-सऊदी रणनीतिक रक्षा समझौते पर कहा कि कोई नया गुट नहीं बनाना चाहिए। उनका उद्देश्य केवल क्षेत्रीय देशों को सहयोग और सुरक्षा के लिए एक समावेशी मंच पर लाना है।
World News: सितंबर 2025 में पाकिस्तान और सऊदी अरब ने एक स्ट्रैटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट (SMDA) पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते के तहत दोनों देशों ने तय किया कि किसी एक देश पर हमला दोनों देशों पर हमला माना जाएगा। इसके बाद पाकिस्तान ने इस गठबंधन को इस्लामिक देशों का NATO बनाने की योजना बनाई। हाल ही में तुर्की के शामिल होने की चर्चाओं ने इस योजना को नया मोड़ दे दिया है।
तुर्की ने इस ब्लॉक में शामिल होने पर साफ शब्दों में कहा कि वह कोई नया गुट नहीं बनाना चाहता। तुर्की के विदेश मंत्री हकान फिदान ने गुरुवार को अल-जजीरा को दिए इंटरव्यू में कहा कि इस तरह के समूह में किसी का वर्चस्व नहीं होना चाहिए और किसी भी समझौते को ज्यादा समावेशी होना चाहिए।
तुर्की की शर्तें और भारत-यूरोप का उदाहरण
फिदान ने कहा कि क्षेत्रीय देश अपनी सुरक्षा का जिम्मा बाहरी शक्तियों के हाथों में नहीं छोड़ सकते। उन्होंने यूरोपीय संघ का उदाहरण देते हुए कहा कि यह संगठन जीरो से शुरू हुआ और आज इतने सालों में एकजुट होकर मजबूत बन गया है। तुर्की इस ब्लॉक को इसी तरह एक मंच बनाना चाहता है, न कि किसी देश के वर्चस्व में ढालना।
फिदान ने आगे कहा कि समूह में शुरुआत केवल दो या तीन देशों से हो सकती है, लेकिन समय के साथ अगर यह बड़ा ढांचा बनता है, तो यह क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए अच्छा साबित होगा। उनका यह बयान पाकिस्तान के उस दृष्टिकोण से अलग है, जिसमें पाकिस्तान इस ब्लॉक को जल्दी NATO जैसे मजबूत संगठन में बदलने पर जोर दे रहा है।
पाकिस्तान का दृष्टिकोण
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पाकिस्तान का कहना है कि किसी तीसरे देश को इस ब्लॉक में शामिल करने का निर्णय केवल पाकिस्तान और सऊदी अरब की आपसी सहमति से ही लिया जाएगा। इसके बावजूद तुर्की के शामिल होने की चर्चा ने इस गठबंधन की रणनीति को नया रूप दे दिया है। तुर्की चाहता है कि यह ब्लॉक केवल दो या तीन देशों तक सीमित न रहे, बल्कि समय के साथ यह सभी इस्लामिक देशों के लिए समावेशी मंच बन सके।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, तुर्की के शामिल होने पर बातचीत अंतिम चरण में है। अगर तुर्की इस समझौते में शामिल होता है, तो यह ब्लॉक त्रिपक्षीय रूप ले सकता है और पाकिस्तान-सऊदी अरब के रक्षा गठबंधन को और मजबूत बना सकता है।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर जोर
तुर्की के विदेश मंत्री ने यह भी साफ किया कि किसी बाहरी देश के दबाव में आकर यह ब्लॉक नहीं बनाना चाहिए। उनका कहना है कि क्षेत्रीय देशों को अपनी सुरक्षा का जिम्मा खुद उठाना चाहिए। फिदान के अनुसार, यह ब्लॉक केवल रक्षा सहयोग के लिए बन रहा है और इसका मकसद क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा को मजबूत करना है।
तुर्की ने यह संदेश भी दिया कि वह किसी भी तरह का नया गुट या वैश्विक शक्ति ब्लॉक नहीं बनाना चाहता। उनका ध्यान केवल क्षेत्रीय देशों को एक मंच पर लाना और सुरक्षा के लिए आपसी सहयोग बढ़ाना है।
पाकिस्तान-सऊदी रणनीतिक गठबंधन
पाकिस्तान और सऊदी अरब का SMDA केवल आक्रामक रक्षा समझौता नहीं है। इसके तहत दोनों देशों ने एक-दूसरे की सुरक्षा में सहयोग और साझा रणनीति तय की है। पाकिस्तान इस ब्लॉक को NATO जैसा बनाना चाहता है, जो सभी इस्लामिक देशों के लिए समान रूप से सुरक्षा का मंच साबित हो।
हालांकि, तुर्की ने साफ किया कि इसे NATO के रूप में केंद्रीय नेतृत्व वाले संगठन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। तुर्की का मकसद है कि यह समूह समावेशी और सहयोगात्मक बने, जहां किसी देश का वर्चस्व न हो।









