झारखंड के पलामू जिले में पीएम-आरकेवीवाई-रफ्तार योजना के तहत किसानों और कृषक समूहों को कृषि यंत्रों की खरीद पर 80 प्रतिशत तक अनुदान मिलेगा। इच्छुक आवेदक 25 अक्टूबर 2026 तक जिला भूमि संरक्षण विभाग में आवेदन जमा कर सकते हैं।
पलामू: कृषि यंत्र खरीदने की योजना बना रहे पलामू जिले के किसानों के लिए अनुदान पाने का अवसर है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में पीएम-आरकेवीवाई-रफ्तार योजना की एसएमएएम उपयोजना के तहत कृषि उपकरण बैंक की स्थापना और विभिन्न कृषि मशीनों की खरीद पर सहायता दी जाएगी। उपकरण बैंक के लिए अधिकतम आठ लाख रुपये तक अनुदान का प्रावधान है। इच्छुक किसान और कृषक समूह 25 अक्टूबर 2026 तक आवेदन कर सकते हैं।
पलामू में कृषि यंत्रों पर अनुदान के लिए आवेदन शुरू
पलामू जिले के किसानों और कृषक समूहों को आधुनिक कृषि उपकरण खरीदने के लिए सरकारी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। वित्तीय वर्ष 2026-27 में केंद्र प्रायोजित पीएम-आरकेवीवाई-रफ्तार योजना के तहत सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन (एसएमएएम) उपयोजना लागू की जा रही है। इसके माध्यम से पात्र लाभार्थियों को निर्धारित अनुदान दर पर कृषि यंत्र उपलब्ध कराने की व्यवस्था है।
इच्छुक किसानों और कृषक समूहों को योजना का लाभ लेने के लिए जिला भूमि संरक्षण विभाग में आवेदन जमा करना होगा। आवेदन करने की अंतिम तारीख 25 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है। किसानों को समय सीमा के भीतर आवेदन प्रक्रिया पूरी करने की सलाह दी गई है, ताकि वे योजना के तहत मिलने वाली सहायता के लिए विचार किए जा सकें।
योजना में खेती के विभिन्न चरणों में इस्तेमाल होने वाले उपकरण शामिल हैं। इनमें पावर टिलर, सेल्फ प्रोपेल्ड पावर वीडर, राइस ट्रांसप्लांटर, क्रॉप रीपर, ट्रैक्टर से चलने वाले कृषि उपकरण, एमबी प्लाऊ, केज व्हील, कल्टीवेटर, मल्टी क्रॉप थ्रेसर, पैडी थ्रेसर, रोटावेटर और जीरो टिल सीड ड्रिल जैसे यंत्र शामिल हैं। इसके अलावा मिनी राइस मिल, मिनी दाल मिल, स्प्रेयर और सिंचाई पंपों की खरीद पर भी निर्धारित नियमों के अनुसार अनुदान मिल सकता है।
कृषि उपकरण बैंक बनाने पर आठ लाख रुपये तक सहायता
योजना के तहत गांव के स्तर पर कृषि उपकरण बैंक स्थापित करने के लिए विशेष प्रावधान किया गया है। इसकी अधिकतम परियोजना लागत 10 लाख रुपये निर्धारित है। इस पर 80 प्रतिशत या अधिकतम आठ लाख रुपये तक अनुदान दिया जा सकता है। यह सहायता किसानों को सामूहिक रूप से कृषि मशीनें उपलब्ध कराने में मदद कर सकती है, जिससे जरूरत के समय उपकरणों का उपयोग करना आसान होगा।
अन्य कृषि यंत्रों पर मिलने वाली सहायता उनकी श्रेणी और निर्धारित मानकों के अनुसार तय होगी। इससे किसानों को खेती में आधुनिक तकनीक अपनाने, श्रम पर निर्भरता कम करने और कृषि कार्यों को समय पर पूरा करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, प्रत्येक उपकरण पर मिलने वाली अनुदान राशि अलग हो सकती है, इसलिए आवेदन से पहले संबंधित विभाग से जानकारी लेना जरूरी है।
स्वयं सहायता समूहों और कृषक संगठनों को प्राथमिकता
योजना के क्रियान्वयन में स्वयं सहायता समूहों को प्राथमिकता देने का प्रावधान है। यदि झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (जेएसएलपीएस) की ओर से स्वयं सहायता समूहों की सूची उपलब्ध नहीं कराई जाती है, तो विलेज ऑर्गेनाइजेशन, लैम्प्स-पैक्स, क्लस्टर फेडरेशन, सहकारी समितियों, कृषक उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और जलछाजन समितियों के माध्यम से भी योजना लागू की जा सकती है।
जिन किसानों या समूहों ने पहले किसी विभागीय योजना अथवा केंद्र या राज्य सरकार की दूसरी योजना के तहत कृषि उपकरण बैंक स्थापित किया है या कृषि यंत्र प्राप्त किए हैं, वे पहले से मिले उपकरणों को छोड़कर अन्य पात्र यंत्रों के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा एक वित्तीय वर्ष में प्रत्येक किसान का केवल एक आवेदन स्वीकार किया जाएगा।
जिला भूमि संरक्षण पदाधिकारी मुकेश कुमार के अनुसार, योजना से जुड़ने के इच्छुक कृषक समूहों को विभाग में आवेदन जमा करना होगा। योजना का लाभ सभी वर्गों के पात्र लाभार्थी निर्धारित नियमों के अनुसार ले सकते हैं। किसानों को आवेदन करने से पहले पात्रता, जरूरी दस्तावेज और संबंधित कृषि यंत्रों पर मिलने वाली सहायता की जानकारी विभाग से प्राप्त कर लेनी चाहिए।








