‘पंचायत’ में दामादजी के किरदार से लोकप्रिय हुए आसिफ खान ने बिग बॉस के मंच पर अपने संघर्ष की कहानी सुनाई। सलमान खान के सामने भावुक आसिफ ने स्कूल के नाटक, पिता की मौत, थिएटर, मुंबई और संघर्ष के दिनों में किए कामों को याद किया।
बिग बॉस: लोकप्रिय वेब सीरीज ‘पंचायत’ में दामादजी का किरदार निभाकर पहचान बनाने वाले अभिनेता आसिफ खान ने ‘बिग बॉस’ के मंच पर अपने संघर्ष की कहानी साझा की। सलमान खान के सामने अपनी जिंदगी के मुश्किल दौर को याद करते हुए आसिफ भावुक हो गए। उन्होंने बताया कि अभिनय के सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने कई तरह के काम किए, यहां तक कि सैफ अली खान और करीना कपूर की शादी के दौरान होटल की रसोई में बर्तन धोने का काम भी किया।
आसिफ ने मंच पर कहा कि कभी उन्होंने नहीं सोचा था कि जिस अभिनेता के साथ फिल्म के गाने में बैकग्राउंड डांसर के रूप में नजर आए थे, एक दिन उसी सलमान खान के सामने खड़े होकर अपनी जिंदगी की कहानी बताएंगे। बिग बॉस के मंच पर सलमान ने उनके साथ उसी गाने पर डांस भी किया, जिससे आसिफ के पुराने संघर्ष और मौजूदा पहचान के बीच का सफर भावुक पल में बदल गया।
‘अम्मी, आज सलमान खान के साथ खड़ा हूं’
बिग बॉस के मंच पर अपनी कहानी बताते हुए आसिफ खान भावुक हो गए। उन्होंने अपनी मां को याद करते हुए कहा कि कभी उनके लिए जिंदगी में आगे बढ़ना आसान नहीं था, लेकिन आज वह सलमान खान के साथ मंच पर खड़े हैं।
आसिफ के लिए यह पल उनके लंबे संघर्ष का प्रतीक रहा। राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के निंबाहेड़ा से शुरू हुआ उनका सफर जयपुर के थिएटर और फिर मुंबई तक पहुंचा। अभिनय की दुनिया में पहचान बनाने के लिए उन्हें आर्थिक और व्यक्तिगत चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
‘पंचायत’ में दामादजी के किरदार ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई। अब ‘बिग बॉस’ के मंच पर अपनी निजी यात्रा साझा करने के बाद उनके संघर्ष की कहानी एक बार फिर चर्चा में है।
पढ़ाई में नहीं लगता था मन, नाटक ने बदली जिंदगी
आसिफ खान ने बताया कि स्कूल के दिनों में उनका मन पढ़ाई में नहीं लगता था। वह परीक्षा किसी तरह पास कर लेते थे, लेकिन अभिनय और नाटक में उनकी विशेष रुचि थी।
वह पढ़ाई से बचने के लिए स्कूल के वार्षिक समारोह में होने वाले नाटकों में हिस्सा लिया करते थे। शुरुआत में यह केवल पढ़ाई से बचने का एक तरीका था, लेकिन नाटक में मिली तारीफ ने उनके भीतर अभिनय को लेकर आत्मविश्वास पैदा किया।
आसिफ के मुताबिक, उनके दोस्तों के साथ-साथ शिक्षकों ने भी उनके अभिनय की सराहना की। इसके बाद उन्होंने अलग-अलग नाटक प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना शुरू किया। धीरे-धीरे चित्तौड़गढ़ और आसपास के क्षेत्रों में उनकी पहचान एक कलाकार के तौर पर बनने लगी।
यही शुरुआती अनुभव आगे चलकर उनके करियर की नींव बने और उन्होंने अभिनय को अपने पेशे के रूप में अपनाने का फैसला किया।
सातवीं कक्षा में पिता का निधन
आसिफ खान ने बताया कि जब वह सातवीं कक्षा में थे, तब उनके पिता का निधन हो गया। उनके पिता एक सीमेंट कंपनी में काम करते थे, जबकि उनकी मां गृहिणी थीं।
पिता के निधन के बाद परिवार के सामने आर्थिक मुश्किलें खड़ी हो गईं। परिवार के लिए बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च संभालना चुनौती बन गया था।
आसिफ ने बताया कि उनके बड़े भाई पढ़ाई में अच्छे थे, इसलिए परिवार ने उनकी शिक्षा जारी रखने का फैसला किया। वहीं, आसिफ ने परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए काम करना शुरू किया।
निजी स्कूल की फीस का खर्च उठाना मुश्किल होने के कारण उन्होंने सरकारी स्कूल में दाखिला लिया। इसके साथ ही वह काम भी करते रहे। उनका दिन सुबह काम से शुरू होता, दोपहर में स्कूल जाते और इसके बाद फिर काम करना पड़ता था।
यह सिलसिला करीब डेढ़ से दो साल तक चला। इस दौरान उन्होंने अलग-अलग तरह के काम किए। कुछ समय तक उन्होंने अपने मामा के साथ स्टील फर्नीचर का काम भी किया।
निंबाहेड़ा से जयपुर और फिर मुंबई का सफर
राजस्थान के निंबाहेड़ा से निकलकर आसिफ को जयपुर आने का मौका मिला। यहां उन्होंने थिएटर करना शुरू किया। रंगमंच ने उन्हें अभिनय की बारीकियां सीखने के साथ-साथ मंच पर आत्मविश्वास हासिल करने का अवसर दिया।
जयपुर में थिएटर के दौरान उन्होंने अभिनय को गंभीरता से समझा और अलग-अलग भूमिकाओं पर काम किया। इसके बाद उनके भीतर फिल्मों और बड़े मंच पर काम करने की इच्छा और मजबूत हुई।
आसिफ फिर मुंबई पहुंचे। सपनों की इस नगरी में शुरुआती दौर आसान नहीं था। आर्थिक परेशानियों के बीच उन्हें छोटे-मोटे काम करने पड़े। हालांकि, उन्होंने अभिनय का प्रयास जारी रखा।
धीरे-धीरे उन्हें फिल्मों और वेब सीरीज में काम मिलने लगा। छोटे किरदारों से शुरुआत करते हुए उन्होंने अपनी पहचान बनानी शुरू की।
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सैफ-करीना की शादी में होटल के किचन में किया काम
मुंबई में संघर्ष के दिनों से जुड़ा एक किस्सा आसिफ ने बिग बॉस के मंच पर साझा किया। उन्होंने बताया कि सैफ अली खान और करीना कपूर की शादी के दौरान उन्होंने होटल के किचन में बर्तन धोने का काम किया था।
उनकी कहानी इस बात को दिखाती है कि अभिनय की दुनिया में पहचान बनाने से पहले उन्हें किस तरह के काम करने पड़े। आज जब वह बड़े मनोरंजन मंच पर दिखाई दे रहे हैं, तब उनके लिए संघर्ष के उन दिनों को याद करना स्वाभाविक रूप से भावुक करने वाला रहा।
आसिफ की कहानी में आर्थिक मुश्किलों के साथ-साथ अपने लक्ष्य के प्रति लगातार प्रयास करने का पहलू भी सामने आता है।
‘रेडी’ के गाने में बैकग्राउंड डांसर थे आसिफ
आसिफ ने सलमान खान के सामने अपने करीब 16 साल पुराने संघर्ष को भी याद किया। उन्होंने बताया कि जब सलमान खान की फिल्म ‘रेडी’ बन रही थी, तब वह फिल्म के एक गाने में भीड़ के बीच बैकग्राउंड डांसर के तौर पर शामिल हुए थे।
उस समय शायद उन्होंने कल्पना भी नहीं की होगी कि भविष्य में वह उसी सलमान खान के सामने एक अभिनेता के रूप में खड़े होंगे।
बिग बॉस के मंच पर सलमान खान ने आसिफ के साथ उसी गाने पर डांस किया। यह दृश्य आसिफ के लिए खास तौर पर भावुक था, क्योंकि इसमें उनके करियर के शुरुआती दौर और वर्तमान पहचान की झलक एक साथ दिखाई दी।
‘पंचायत’ से मिली बड़ी पहचान
आसिफ खान को सबसे बड़ी पहचान लोकप्रिय वेब सीरीज ‘पंचायत’ से मिली। सीरीज में दामादजी के किरदार ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया और आसिफ को व्यापक पहचान मिली।
‘पंचायत’ के बाद वह डिजिटल मनोरंजन जगत में एक पहचाना हुआ चेहरा बन गए। उनके अभिनय और किरदार को दर्शकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली।
राजस्थान के एक छोटे शहर से शुरू हुआ उनका सफर थिएटर, छोटे-मोटे काम, फिल्मों और वेब सीरीज से होते हुए ‘बिग बॉस’ जैसे बड़े टेलीविजन मंच तक पहुंचा है।
बीमारी के दौरान साझा किया था भावुक संदेश
आसिफ ने करीब एक साल पहले बीमारी के दौरान सोशल मीडिया पर जिंदगी को लेकर एक भावुक संदेश भी साझा किया था। उन्होंने लिखा था कि कई घंटों तक एक ही चीज को देखने के बाद उन्हें महसूस हुआ कि जिंदगी बहुत छोटी है और किसी भी दिन को सामान्य मानकर नहीं चलना चाहिए, क्योंकि परिस्थितियां पलभर में बदल सकती हैं।
उन्होंने लोगों से अपनी जिंदगी में मौजूद चीजों के लिए आभार व्यक्त करने और जीवन की अनिश्चितता को समझने की बात कही थी।
आसिफ की बिग बॉस में मौजूदगी ने एक बार फिर उनके व्यक्तिगत और पेशेवर सफर को चर्चा में ला दिया है। उनके लिए यह मंच केवल एक नए मनोरंजन प्रोजेक्ट की शुरुआत नहीं, बल्कि उस लंबे संघर्ष की याद भी है, जिसने उन्हें राजस्थान के एक छोटे शहर से मुंबई के मनोरंजन उद्योग तक पहुंचाया।










