जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा ने संभाली पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की जिम्मेदारी

जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ ली। पंजाब सरकार के विरोध के बावजूद नियुक्ति प्रक्रिया पूरी हुई।

जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा ने सोमवार, 7 सितंबर को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ ली। पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने चंडीगढ़ स्थित लोक भवन में उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। यह नियुक्ति पंजाब सरकार के विरोध के बीच हुई।

चंडीगढ़: जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा जून 2026 से पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे थे। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने अगस्त में उन्हें नियमित मुख्य न्यायाधीश बनाए जाने की सिफारिश की थी। केंद्र सरकार ने शनिवार, 5 सितंबर को उनकी नियुक्ति को अधिसूचित किया। यह अधिसूचना सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश के करीब एक महीने बाद जारी हुई। इसके बाद सोमवार को उनका शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया गया।

जस्टिस मिश्रा इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट में न्यायाधीश रह चुके हैं। फरवरी 2014 में उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया था और फरवरी 2016 में वह स्थायी न्यायाधीश बने। जुलाई 2025 में उनका तबादला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में किया गया था, जहां उन्होंने 21 जुलाई को कार्यभार संभाला।

शपथ समारोह में कई प्रमुख लोग मौजूद

चंडीगढ़ के लोक भवन में हुए शपथ ग्रहण समारोह में हरियाणा के राज्यपाल अशिम कुमार घोष, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष हरविंदर कल्याण, शिरोमणि अकाली दल की विधायक गनीव कौर मजीठिया और पंजाब के मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा मौजूद रहे।

हालांकि, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान समारोह में शामिल नहीं हुए। उनकी अनुपस्थिति इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि उनकी सरकार ने जस्टिस मिश्रा की नियुक्ति पर गंभीर आपत्ति जताई थी और एक दिन पहले ही शपथ ग्रहण रोकने की मांग की थी।

पंजाब कैबिनेट ने नियुक्ति पर जताई थी आपत्ति

जस्टिस मिश्रा के शपथ ग्रहण से एक दिन पहले रविवार को मुख्यमंत्री भगवंत मान की अध्यक्षता में पंजाब कैबिनेट की आपात बैठक हुई। बैठक में केंद्र सरकार द्वारा नियुक्ति की अधिसूचना जारी किए जाने के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया गया।

पंजाब सरकार का आरोप था कि केंद्र ने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति के मामले में राज्य सरकार के विचारों का इंतजार नहीं किया। सरकार ने इसे संवैधानिक प्रक्रिया और निर्धारित नियमों की अनदेखी बताया।

कैबिनेट ने मांग की थी कि जस्टिस मिश्रा की नियुक्ति और उनके शपथ ग्रहण को तब तक रोका जाए, जब तक पंजाब सरकार की चिंताओं पर विचार नहीं किया जाता और उसके विचार प्राप्त नहीं किए जाते।

भगवंत मान ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र लिखा

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस मुद्दे पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया को अलग-अलग पत्र भी लिखे थे।

पंजाब सरकार का कहना था कि हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति जैसे संवेदनशील संवैधानिक मामले में राज्य सरकार की राय लिए जाने की निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए था।

राज्य सरकार ने आरोप लगाया कि नियुक्ति को जल्दबाजी में अधिसूचित किया गया और पंजाब के पक्ष को पर्याप्त रूप से विचार करने का अवसर नहीं दिया गया। सरकार ने इसे पंजाब के संवैधानिक अधिकारों और स्थापित प्रक्रियाओं की अनदेखी बताया।

केंद्र की ओर से आरोपों को खारिज किया गया

पंजाब सरकार की आपत्तियों को भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सत्य पाल जैन ने खारिज किया। उन्होंने विवाद को दुर्भाग्यपूर्ण और पूरी तरह अनावश्यक बताया।

जैन के अनुसार, पंजाब सरकार के पास नियुक्ति के प्रस्ताव पर अपने विचार देने के लिए पर्याप्त समय था। उन्होंने कहा कि अगर राज्य सरकार को कोई आपत्ति थी तो वह उचित समय के भीतर अपनी राय भेज सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।

केंद्र की ओर से यह भी कहा गया कि नियुक्ति निर्धारित प्रक्रिया के तहत हुई है। इस तरह विवाद का मुख्य बिंदु यह बन गया है कि राज्य सरकार के विचार किस स्तर पर और किस समय लिए गए तथा क्या नियुक्ति को उन विचारों के प्राप्त होने तक रोका जाना आवश्यक था।

नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर केंद्र और पंजाब में मतभेद

जस्टिस मिश्रा की नियुक्ति को लेकर विवाद केवल एक न्यायिक नियुक्ति तक सीमित नहीं है। इसके केंद्र में हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति में राज्य सरकार की भूमिका और केंद्र तथा न्यायपालिका के बीच निर्धारित प्रक्रिया से जुड़े सवाल हैं।

पंजाब सरकार का कहना है कि संबंधित राज्य के विचारों को नजरअंदाज करके नियुक्ति आगे बढ़ाना स्थापित संवैधानिक प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है। दूसरी ओर, केंद्र की ओर से कहा गया है कि पंजाब सरकार को अपनी राय देने का पर्याप्त अवसर मिला था और नियुक्ति प्रक्रिया नियमों के अनुसार आगे बढ़ी।

इस मतभेद के बावजूद केंद्र ने नियुक्ति को अधिसूचित किया और सोमवार को शपथ ग्रहण भी संपन्न हो गया।

अब नियमित मुख्य न्यायाधीश के रूप में संभालेंगे जिम्मेदारी

जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा के शपथ लेने के साथ ही पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट को नियमित मुख्य न्यायाधीश मिल गया है। वह जून से कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

उनके कार्यकाल के दौरान हाईकोर्ट के सामने न्यायिक प्रशासन, लंबित मामलों के निपटारे और दोनों राज्यों से जुड़े महत्वपूर्ण संवैधानिक एवं कानूनी मामलों की सुनवाई जैसी जिम्मेदारियां रहेंगी।

उनकी नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब पंजाब सरकार और केंद्र के बीच नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर मतभेद सार्वजनिक रूप से सामने आए हैं। शपथ ग्रहण समारोह के बावजूद पंजाब सरकार की आपत्तियां पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं और यह विवाद आगे भी राजनीतिक तथा संवैधानिक बहस का विषय बना रह सकता है।

पंजाब सरकार के विरोध के बीच नई जिम्मेदारी

जस्टिस मिश्रा का शपथ ग्रहण समारोह निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पूरा हो गया। पंजाब सरकार की ओर से नियुक्ति रोकने की मांग के बावजूद केंद्र ने प्रक्रिया को आगे बढ़ाया और राज्यपाल ने उन्हें मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ दिलाई।

इस घटनाक्रम ने पंजाब सरकार और केंद्र के बीच संवैधानिक अधिकारों तथा न्यायिक नियुक्तियों की प्रक्रिया को लेकर जारी मतभेद को और स्पष्ट कर दिया है। फिलहाल जस्टिस मिश्रा ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के नियमित मुख्य न्यायाधीश के रूप में अपनी नई जिम्मेदारी संभाल ली है।

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