India-UAE Relations: एक हफ्ते में दूसरी बार जयशंकर और UAE के विदेश मंत्री की बातचीत, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर हुई चर्चा

भारत और UAE के विदेश मंत्रियों एस. जयशंकर और शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान के बीच एक हफ्ते में दूसरी बार बातचीत हुई। दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया में

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान से बातचीत की। इस दौरान जयशंकर ने खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव पर गंभीर चिंता जताई।

नई दिल्ली: भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान के साथ एक सप्ताह से भी कम समय में दूसरी बार बातचीत की। इस दौरान दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा, होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात और भारतीय नाविकों की सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा की। भारत ने क्षेत्र में मौजूदा हालात को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया कि वह तनाव कम करने और शांति स्थापित करने के लिए बातचीत तथा कूटनीति के प्रयासों का समर्थन करता रहेगा।

यह बातचीत ऐसे समय में हुई है, जब पश्चिम एशिया में बढ़ती क्षेत्रीय अस्थिरता का असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री परिवहन पर पड़ने की आशंका बनी हुई है। भारत के लिए खाड़ी क्षेत्र का रणनीतिक और आर्थिक महत्व काफी अधिक है। ऐसे में वहां शांति और स्थिरता बनाए रखना भारत की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर हुई चर्चा

विदेश मंत्री एस. जयशंकर और UAE के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद के बीच हुई बातचीत में क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठे। दोनों नेताओं ने ईरान और अमेरिका के बीच संभावित सैन्य तनाव तथा इसके व्यापक क्षेत्रीय प्रभावों पर चर्चा की। इसके साथ ही ईरान की संभावित जवाबी कार्रवाई को लेकर पैदा होने वाली चिंताओं पर भी विचार किया गया।

बैठक में सऊदी अरब में हूती हमलों से जुड़ी स्थिति और क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा की चुनौतियों पर भी चर्चा हुई। पश्चिम एशिया में किसी भी बड़े सैन्य टकराव का असर केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक बाजारों, तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं पर भी पड़ सकता है।

भारत ने इस संदर्भ में तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया। दोनों देशों के बीच लगातार हो रहा संवाद क्षेत्रीय घटनाक्रम पर समन्वय बनाए रखने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

होर्मुज जलडमरूमध्य और भारतीय नाविकों की सुरक्षा अहम मुद्दा

India-UAE Relations: एक हफ्ते में दूसरी बार जयशंकर और UAE के विदेश मंत्री की बातचीत, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर हुई चर्चा

बातचीत का एक प्रमुख विषय होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही और समुद्री मार्गों की सुरक्षा रहा। यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसके आसपास तनाव बढ़ने से कच्चे तेल और अन्य जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित होने का जोखिम रहता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर काफी हद तक निर्भर है। इसलिए इस क्षेत्र में समुद्री परिवहन का सुरक्षित और निर्बाध संचालन भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है। बैठक में भारतीय नाविकों को ले जा रहे जहाजों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे भी उठाए गए।

जयशंकर ने इस बात पर जोर दिया कि व्यापार, ऊर्जा और उर्वरकों की आवाजाही सुरक्षित तथा बिना बाधा जारी रहनी चाहिए। समुद्री मार्गों पर किसी भी प्रकार की अस्थिरता से परिवहन लागत बढ़ सकती है और वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव पड़ सकता है।

UAE में भारतीय समुदाय की सुरक्षा पर आभार

विदेश मंत्री जयशंकर ने UAE के नेतृत्व के प्रति वहां रहने वाले भारतीय समुदाय की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने के प्रयासों के लिए आभार व्यक्त किया। संयुक्त अरब अमीरात में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक रहते और काम करते हैं। वे दोनों देशों के बीच आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

क्षेत्रीय तनाव के बीच भारतीय नागरिकों की सुरक्षा भारत सरकार के लिए एक अहम प्राथमिकता है। UAE के साथ नियमित उच्चस्तरीय संवाद से दोनों देशों को क्षेत्रीय घटनाक्रम और नागरिकों से जुड़े मुद्दों पर संपर्क बनाए रखने में मदद मिलती है।

भारत-UAE व्यापार 100 अरब डॉलर के पार

क्षेत्रीय सुरक्षा के अलावा, दोनों नेताओं के बीच आर्थिक सहयोग पर भी चर्चा हुई। जयशंकर ने कहा कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और पश्चिम एशिया में तनाव के बावजूद भारत और UAE के आर्थिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। उन्होंने व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) का उल्लेख करते हुए बताया कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर चुका है। इस समझौते ने व्यापारिक संबंधों को विस्तार देने और विभिन्न क्षेत्रों में कारोबारी अवसर बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

भारत और UAE के बीच निवेश सहयोग भी लगातार आगे बढ़ रहा है। दोनों देश रक्षा, ऊर्जा और प्रौद्योगिकी जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में साझेदारी को मजबूत करने पर ध्यान दे रहे हैं। इन क्षेत्रों में सहयोग से आर्थिक विकास के साथ-साथ दीर्घकालिक रणनीतिक संबंधों को भी मजबूती मिल सकती है।

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