परिणीति चोपड़ा का ओटीटी डेब्यू: स्क्रिप्ट चुनने में लंबी प्लानिंग नहीं, अंतरात्मा की आवाज पर करती हूं भरोसा

परिणीति चोपड़ा ने ‘शक: ट्रस्ट नो वन’ से ओटीटी डेब्यू किया। उन्होंने स्क्रिप्ट चयन, आत्मविश्वास, राघव चड्ढा और बायोपिक में काम करने की इच्छा पर बात की।

परिणीति चोपड़ा ने नेटफ्लिक्स की वेब सीरीज ‘शक: ट्रस्ट नो वन’ से ओटीटी डेब्यू किया है। अभिनेत्री ने कहा कि वह स्क्रिप्ट चुनते समय लंबी प्लानिंग के बजाय अंतरात्मा की आवाज पर भरोसा करती हैं और भविष्य में बायोपिक में काम करना चाहती हैं।

बॉलीवुड: अभिनेत्री परिणीति चोपड़ा ने नेटफ्लिक्स की वेब सीरीज ‘शक: ट्रस्ट नो वन’ के साथ ओटीटी की दुनिया में कदम रखा है। बड़े पर्दे पर अलग-अलग तरह के किरदार निभाने के बाद डिजिटल माध्यम को चुनने के अपने फैसले पर परिणीति ने खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि वह करियर को लेकर बहुत लंबी प्लानिंग करने के बजाय अपनी अंतरात्मा की आवाज पर भरोसा करती हैं। एक खास बातचीत में परिणीति ने अपने वेब डेब्यू, स्क्रिप्ट चुनने के तरीके, आत्मविश्वास और आत्म-संदेह के बीच अंतर, पति राघव चड्ढा से पेशेवर फैसलों को लेकर सलाह और भविष्य में बायोपिक करने की इच्छा जैसे कई मुद्दों पर अपनी राय साझा की।

बड़े पर्दे के बाद डिजिटल दुनिया में कदम

परिणीति चोपड़ा के लिए ओटीटी पर शुरुआत केवल माध्यम बदलने का फैसला नहीं है। उन्होंने बताया कि बड़े पर्दे पर अलग-अलग किरदार निभाने के बाद वह ऐसी कहानियों का हिस्सा बनना चाहती थीं, जो दर्शकों को लगातार बांधे रखें।

उनके मुताबिक, वह ऐसी कहानी तलाश रही थीं जिसे दर्शक शुरू करने के बाद बीच में रोकना न चाहें। ‘शक: ट्रस्ट नो वन’ की स्क्रिप्ट पढ़ते समय उन्हें बिल्कुल यही अनुभव हुआ। परिणीति ने बताया कि स्क्रिप्ट पढ़ते हुए वह लगातार कहानी के अगले हिस्से की ओर बढ़ती गईं और उसे रोकने का मन नहीं हुआ। इसी अनुभव ने उन्हें इस परियोजना से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।

आत्मविश्वास और आत्म-संदेह में अंतर

परिणीति ने अपने फैसलों और काम को लेकर खुद को दोबारा जांचने तथा लगातार खुद पर संदेह करने के बीच अंतर भी बताया।

उनके अनुसार, किसी काम या फैसले को दोबारा जांचना सकारात्मक प्रक्रिया हो सकती है। इससे व्यक्ति अपनी गलतियों को समझ सकता है और बेहतर निर्णय ले सकता है। लेकिन लगातार खुद पर शक करना व्यक्ति को पीछे खींच सकता है।

अभिनेत्री का मानना है कि जिंदगी में खुद पर भरोसा होना बेहद जरूरी है। अगर किसी फैसले या स्थिति को लेकर भीतर से लगातार यह महसूस हो रहा है कि वह आपके लिए सही नहीं है, तो उस आंतरिक संकेत को समझना भी जरूरी है।

उनके लिए आत्मविश्वास का मतलब अपनी क्षमता पर भरोसा करना है, जबकि आत्म-संदेह वह स्थिति है जिसमें व्यक्ति अपनी क्षमता और फैसलों पर लगातार सवाल उठाता रहता है।

करियर को लेकर लंबी प्लानिंग नहीं करतीं परिणीति

परिणीति ने अपने लंबे फिल्मी करियर में स्क्रिप्ट चुनने के तरीके को लेकर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि वह करियर को लेकर कभी बहुत ज्यादा योजनाएं बनाने वाली नहीं रही हैं।

वह काफी हद तक अपनी अंतरात्मा की आवाज के आधार पर फैसले लेती हैं। जब किसी स्क्रिप्ट को पढ़ते हुए भीतर से यह महसूस होता है कि उन्हें यह काम करना चाहिए, तो वह उस भावना को महत्व देती हैं।

अभिनेत्री ने बताया कि उन्होंने अपने अनुभवों से यह महसूस किया है कि जब उन्होंने अपनी अंदरूनी भावना के विपरीत जाकर कोई फैसला लिया, तो वह हमेशा सही साबित नहीं हुआ।

उनके लिए करियर का मतलब हर कदम की पहले से लंबी योजना बनाना नहीं है। वह किसी प्रोजेक्ट से जुड़ने से पहले कहानी और अपनी आंतरिक प्रतिक्रिया को अधिक महत्व देती हैं।

पति राघव चड्ढा से स्क्रिप्ट को लेकर नहीं लेतीं सलाह

परिणीति ने पति राघव चड्ढा के साथ अपने व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन को अलग रखने की नीति पर भी बात की।

उन्होंने कहा कि दोनों की अपनी-अपनी पेशेवर जिम्मेदारियां और पहचान हैं। उनके अनुसार, जिस तरह उनके काम में राघव का हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए, उसी तरह राघव के काम में भी उनका हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए।

परिणीति ने स्पष्ट किया कि वह अपनी फिल्मों और स्क्रिप्ट से जुड़े फैसले खुद लेती हैं। उनका मानना है कि हर व्यक्ति को अपनी पेशेवर पहचान बनाए रखने के साथ अपने करियर से जुड़े फैसले खुद लेने चाहिए।

उनके लिए व्यक्तिगत रिश्ते और पेशेवर निर्णयों के बीच एक स्पष्ट संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण है।

बायोपिक में काम करने की इच्छा

परिणीति चोपड़ा ने बायोपिक शैली को लेकर भी अपनी दिलचस्पी जाहिर की। उन्होंने कहा कि उन्हें बायोपिक हमेशा से आकर्षित करती रही हैं।

उनके मुताबिक, बायोपिक में सिर्फ अभिनय करना ही चुनौती नहीं होता, बल्कि इसमें काफी शोध भी करना पड़ता है। कलाकार को उस वास्तविक व्यक्ति की दुनिया, सोच, जीवन यात्रा और अनुभवों को समझना होता है, जिसका किरदार वह पर्दे पर निभा रहा होता है।

परिणीति ने कहा कि भविष्य में वह किसी खिलाड़ी या संगीत जगत से जुड़ी शख्सियत की कहानी पर काम करना पसंद करेंगी। इसके अलावा ऐसी प्रेरणादायक महिलाओं की कहानियां भी उन्हें आकर्षित करती हैं, जिन्होंने देश में कोई बड़ा बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई हो।

‘शक: ट्रस्ट नो वन’ से क्यों की ओटीटी शुरुआत?

परिणीति के मुताबिक, उन्हें जिस तरह का शो करना था, उसकी लगभग सभी खूबियां ‘शक: ट्रस्ट नो वन’ की स्क्रिप्ट में मौजूद थीं।

उन्होंने बताया कि स्क्रिप्ट पढ़ते समय वह कहानी में लगातार आगे बढ़ती चली गईं। उन्हें यह जानने की उत्सुकता बनी रही कि आगे क्या होगा और इसी वजह से स्क्रिप्ट को रोकने का मन नहीं हुआ।

यही वह अनुभव था, जिसने उन्हें विश्वास दिलाया कि अगर कहानी को उसी प्रभाव के साथ पर्दे पर उतारा गया, जैसा उसे पढ़ते समय महसूस हुआ, तो यह दर्शकों के लिए एक ऐसा शो बन सकता है जिसे वे लगातार देखते रहें।

परिणीति ने इसे अपनी तलाश के अनुरूप एक बिंज-वर्दी शो बताया, यानी ऐसा कार्यक्रम जिसे दर्शक एक के बाद एक एपिसोड देखने के लिए प्रेरित हों।

निर्देशक और पूरी टीम ने भी किया प्रभावित

अभिनेत्री ने सीरीज के निर्देशक, निर्माताओं और पूरी स्टार कास्ट की भी तारीफ की। उनके अनुसार, प्रोजेक्ट से जुड़ी पूरी टीम शानदार थी और यही वजह रही कि उन्हें इस सीरीज के साथ काम करने का अनुभव अच्छा लगा।

परिणीति ने बताया कि शूटिंग का अनुभव इतना सकारात्मक रहा कि अब वह वेब सीरीज के प्रारूप में आगे भी काम करना चाहती हैं।

उनके लिए ओटीटी पर पहली परियोजना केवल एक नया माध्यम आजमाने का अवसर नहीं रही, बल्कि इसने उन्हें लंबे प्रारूप वाली कहानियों और डिजिटल दर्शकों के साथ काम करने का नया अनुभव भी दिया।

आगे वेब सीरीज में काम करने की इच्छा

‘शक: ट्रस्ट नो वन’ के अनुभव के बाद परिणीति का डिजिटल माध्यम को लेकर नजरिया और सकारात्मक हुआ है। उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में वह वेब सीरीज के प्रारूप में और काम करना चाहेंगी। उनकी प्राथमिकता ऐसी कहानियां चुनने की है, जो दर्शकों को शुरुआत से अंत तक बांधे रखें और जिनमें कलाकार के लिए चुनौतीपूर्ण भूमिका निभाने का अवसर हो।

परिणीति के लिए स्क्रिप्ट का चुनाव किसी तय फार्मूले पर आधारित नहीं है। वह कहानी पढ़ते समय अपनी पहली और सबसे मजबूत प्रतिक्रिया को महत्व देती हैं। उनका मानना है कि खुद पर विश्वास रखते हुए सही कहानी चुनना करियर के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण है।

ओटीटी डेब्यू के साथ परिणीति चोपड़ा ने अपने करियर में एक नया अध्याय शुरू किया है। ‘शक: ट्रस्ट नो वन’ उनके लिए डिजिटल दुनिया में पहली बड़ी शुरुआत है और शूटिंग के अनुभव ने उन्हें इस माध्यम में आगे काम करने के लिए भी प्रेरित किया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भविष्य में वह किन वास्तविक जीवन की कहानियों, बायोपिक और वेब परियोजनाओं का हिस्सा बनती हैं।

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