पार्क बिल वापसी पर BJP का हमला, आर. अशोक बोले- ‘दिल्ली से नियंत्रित हो रहे CM शिवकुमार’

कर्नाटक BJP नेता अशोक ने पार्क लैंड बिल वापस लेने पर CM शिवकुमार पर निशाना साधा। उन्होने आरोप लगाया कि सरकार दिल्ली से कांग्रेस हाईकमान के निर्देश पर चल रही,

कर्नाटक BJP नेता आर. अशोक ने पार्क की जमीन के इस्तेमाल से जुड़े 5 प्रतिशत प्रावधान को वापस लेने पर मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि BJP और जनता के विरोध के बाद सरकार पीछे हटी और दिल्ली के कांग्रेस नेतृत्व के दबाव में फैसला लिया।

बेंगलुरु: कर्नाटक में पार्क की जमीन के इस्तेमाल से जुड़े प्रावधान को वापस लेने के राज्य सरकार के फैसले पर सियासी विवाद तेज हो गया है। विधानसभा में विपक्ष के नेता और BJP नेता आर. अशोक ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि राज्य सरकार स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर रही है और कांग्रेस के दिल्ली स्थित हाईकमान के निर्देशों के अनुसार फैसले लिए जा रहे हैं।

अशोक ने AICC महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला के उस बयान पर भी तंज कसा, जिसमें उन्होंने कहा था कि कांग्रेस सरकार हर कन्नड़ नागरिक की बात सुनती है। BJP नेता ने दावा किया कि पार्क की जमीन से जुड़े प्रावधान की वापसी ने मुख्यमंत्री की निर्णय लेने की क्षमता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पार्क की जमीन से जुड़े बिल पर विवाद क्या है?

विवाद उस प्रावधान को लेकर है, जिसके तहत पार्क के लिए निर्धारित जमीन के 5 प्रतिशत हिस्से का इस्तेमाल अन्य विकास संबंधी उद्देश्यों के लिए किए जाने की अनुमति दी जानी थी।

इस प्रस्ताव को लेकर BJP और नागरिक समूहों की ओर से आपत्तियां सामने आई थीं। आलोचकों ने बेंगलुरु के हरित क्षेत्रों और सार्वजनिक पार्कों पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर चिंता जताई थी।

राज्य सरकार ने बाद में इस प्रावधान को वापस लेने का फैसला किया। इसी निर्णय को लेकर BJP ने कांग्रेस सरकार पर राजनीतिक दबाव में झुकने का आरोप लगाया है।

आर. अशोक का कहना है कि सरकार ने शुरुआत में नागरिकों की चिंताओं को नजरअंदाज किया, लेकिन BJP के विरोध और जनता के दबाव के बाद उसे अपना फैसला वापस लेना पड़ा।

अशोक ने शिवकुमार को बताया ‘रिमोट-कंट्रोल्ड CM’

राज्य सरकार के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए आर. अशोक ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार को ‘रिमोट-कंट्रोल्ड’ मुख्यमंत्री बताया।

उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि सुरजेवाला के बयान ने कर्नाटक के लोगों के सामने पहले से मौजूद धारणा की पुष्टि कर दी है। अशोक ने आरोप लगाया कि शिवकुमार कर्नाटक की सरकार स्वतंत्र रूप से नहीं चला रहे हैं और दिल्ली में बैठे कांग्रेस नेतृत्व से निर्देश ले रहे हैं।

BJP नेता ने अपने आरोप को आगे बढ़ाते हुए कहा कि सरकार का यह फैसला नेतृत्व का उदाहरण नहीं, बल्कि दबाव में किया गया समझौता है।

उन्होंने दावा किया कि कर्नाटक सरकार पर कांग्रेस हाईकमान का प्रभाव इतना अधिक है कि राज्य से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले भी दिल्ली के निर्देशों के आधार पर लिए जा रहे हैं।

‘दिल्ली ने दबाव बनाया और CM पीछे हट गए’

अशोक ने पार्क लैंड बिल वापस लिए जाने को लेकर कांग्रेस पर सीधा राजनीतिक हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने पहले 5 प्रतिशत पार्क जमीन को अन्य विकास कार्यों के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति देने की कोशिश की, लेकिन BJP के विरोध और नागरिकों के दबाव के बाद कदम पीछे खींचना पड़ा।

BJP नेता ने आरोप लगाया कि दिल्ली से दबाव आने के बाद मुख्यमंत्री ने बिल वापस लेने का फैसला किया।

उनके मुताबिक, सरकार अगर वास्तव में जनता की बात सुन रही थी, तो उसे पहले ही नागरिकों की चिंताओं को गंभीरता से लेना चाहिए था। उन्होंने कहा कि लगातार विरोध के बाद फैसला बदलना यह दिखाता है कि सरकार ने शुरुआत में जनभावनाओं को नजरअंदाज किया था।

हालांकि, ये आरोप BJP नेता की राजनीतिक प्रतिक्रिया हैं और कांग्रेस की ओर से इन आरोपों को लेकर इस खबर में कोई स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

सुरजेवाला के बयान पर भी निशाना

कर्नाटक सरकार के फैसले का बचाव करते हुए AICC महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा था कि कांग्रेस सरकार हर कन्नड़ नागरिक की बात सुनती है।

आर. अशोक ने इसी बयान को अपने हमले का आधार बनाया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार वास्तव में जनता की बात सुनती है, तो पार्क की जमीन के प्रावधान को लेकर पहले विरोध क्यों बढ़ा।

उन्होंने कहा कि BJP ने इस प्रावधान का विरोध किया और नागरिकों की ओर से भी आपत्तियां उठाई गईं। इसके बाद सरकार को प्रस्ताव वापस लेना पड़ा।

अशोक ने कहा कि इस घटनाक्रम को केवल राजनीतिक आरोप बताने से घटनाओं का क्रम नहीं बदल जाएगा।

BJP ने जनता के विरोध को बताया फैसले की वजह

आर. अशोक ने दावा किया कि पार्क की जमीन से जुड़े प्रावधान के खिलाफ BJP ने लगातार आवाज उठाई। इसके साथ ही बेंगलुरु के नागरिकों और अन्य समूहों की ओर से भी हरित क्षेत्रों को लेकर चिंता जताई गई।

उनका कहना है कि सरकार पर बढ़ते दबाव के कारण आखिरकार उसे प्रावधान वापस लेना पड़ा।

BJP नेता ने कांग्रेस के इस दावे पर भी सवाल उठाया कि सरकार ने लोगों की बात सुनकर फैसला लिया। उनके मुताबिक, सरकार ने तभी प्रतिक्रिया दी जब विरोध व्यापक हो गया और राजनीतिक दबाव बढ़ा।

उन्होंने इसे कांग्रेस सरकार की नीति और निर्णय लेने की प्रक्रिया पर सवाल उठाने वाला मामला बताया।

‘सुरजेवाला की मौजूदगी CM के फैसले को समझाने की कोशिश’

अशोक ने सुरजेवाला की कर्नाटक में मौजूदगी और उनके बयानों को लेकर भी कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सुरजेवाला मुख्यमंत्री के पीछे हटने के फैसले को सही ठहराने की कोशिश कर रहे हैं।

BJP नेता के मुताबिक, यह राज्य सरकार के स्वतंत्र रूप से जनता की राय पर प्रतिक्रिया देने का उदाहरण नहीं है, बल्कि कांग्रेस नेतृत्व द्वारा मुख्यमंत्री के फैसले को राजनीतिक रूप से संभालने की कोशिश है।

हालांकि, कांग्रेस की ओर से सुरजेवाला की भूमिका को लेकर अशोक के इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

राहुल गांधी का भी लिया नाम

आर. अशोक ने अपने आरोपों को और तीखा करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री शिवकुमार कर्नाटक के हित में स्वतंत्र फैसले लेने के बजाय दिल्ली में बैठे कांग्रेस नेताओं के निर्देशों के अनुसार काम कर रहे हैं।

उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी का नाम लेते हुए भी दावा किया कि शिवकुमार पर पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व का प्रभाव है।

अशोक ने इसी आधार पर शिवकुमार को ‘डमी CM’ कहकर निशाना साधा और आरोप लगाया कि राज्य सरकार का संचालन दिल्ली से नियंत्रित किया जा रहा है।

कर्नाटक में बढ़ सकता है राजनीतिक टकराव

पार्क की जमीन के इस्तेमाल से जुड़े प्रावधान की वापसी अब कर्नाटक में राजनीतिक टकराव का नया मुद्दा बन गई है। BJP इसे सरकार के दबाव में झुकने के रूप में पेश कर रही है, जबकि कांग्रेस की ओर से सरकार के फैसले को जनता की चिंताओं के प्रति संवेदनशीलता के रूप में देखा जा रहा है।

इस विवाद का एक महत्वपूर्ण पहलू बेंगलुरु के सार्वजनिक हरित क्षेत्रों की सुरक्षा भी है। पार्क और अन्य खुले स्थान शहर की पर्यावरणीय स्थिति तथा नागरिकों के लिए सार्वजनिक सुविधाओं से जुड़े महत्वपूर्ण संसाधन हैं। इसलिए जमीन के उपयोग में बदलाव से जुड़े किसी भी प्रस्ताव पर राजनीतिक दलों के साथ नागरिक संगठनों की भी नजर रहती है।

फिलहाल BJP ने सरकार पर दिल्ली के कांग्रेस नेतृत्व के नियंत्रण का आरोप लगाते हुए अपना हमला तेज कर दिया है। आर. अशोक के बयान से स्पष्ट है कि पार्क लैंड बिल की वापसी आने वाले दिनों में कर्नाटक की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बन सकती है।

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