भागलपुर। सबौर में बिजली विभाग की लापरवाही का मामला सामने आया है। यहां पत्रकार नगर कॉलोनी के लोगों को करीब 16 घंटे तक बिजली संकट झेलना पड़ा। उमस और गर्मी के बीच लंबे समय तक बिजली गुल रहने से स्थानीय लोगों की परेशानी बढ़ गई। लोगों का आरोप है कि शिकायत के बाद भी विभाग की ओर से तत्काल बिजली बहाल करने की कोशिश नहीं की गई। उल्टे कर्मचारियों की ओर से ऐसी बातें कही गईं, जिससे उपभोक्ताओं में नाराजगी और बढ़ गई।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, इलाके में बिजली आपूर्ति बाधित होने के बाद उन्होंने विभाग को इसकी जानकारी दी। शिकायत के बावजूद काफी देर तक समस्या का समाधान नहीं हुआ। लोगों का कहना है कि बिजलीकर्मी मौके पर पहुंचे, लेकिन लाइन ठीक करने के लिए आवश्यक संसाधनों की कमी का हवाला दिया गया। इसी दौरान कथित तौर पर लोगों से कहा गया कि 'सीढ़ी लाइए, तभी बनेगा'। इस बात को लेकर स्थानीय लोगों में काफी आक्रोश है।
करीब 16 घंटे तक बिजली नहीं रहने से घरों में पंखे, कूलर और अन्य विद्युत उपकरण बंद रहे। उमस भरे मौसम में लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। रात के समय भी बिजली नहीं रहने के कारण परिवारों को गर्मी और मच्छरों के बीच रात गुजारनी पड़ी।
बिजली कटौती का असर केवल रोशनी और पंखे तक सीमित नहीं रहा। घरों में पानी की मोटर नहीं चल सकी। जिन परिवारों के पास बिजली से चलने वाले जरूरी उपकरण हैं, उन्हें भी परेशानी हुई। मोबाइल फोन चार्ज करने और ऑनलाइन काम करने वाले लोगों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया कि जब बिजली विभाग उपभोक्ताओं से नियमित रूप से बिल और अन्य शुल्क वसूलता है, तो खराबी आने पर उसे ठीक करने के लिए आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था विभाग की अपनी जिम्मेदारी क्यों नहीं है। लोगों का कहना है कि यदि किसी तकनीकी खराबी के कारण बिजली आपूर्ति बाधित हुई थी, तो विभाग को समय पर मरम्मत टीम और जरूरी उपकरण उपलब्ध कराने चाहिए थे।
सबौर भागलपुर सदर अनुमंडल का हिस्सा है और जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर भी सबौर को भागलपुर सदर के प्रखंडों में शामिल किया गया है।
बिजली आपूर्ति की व्यवस्था दक्षिण बिहार विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड के तहत आती है। कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट पर बिजली संबंधी शिकायत के लिए 1912 और 18002022813 टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर दिए गए हैं।
भागलपुर में बिजली संकट को लेकर पहले भी लोगों का आक्रोश सामने आता रहा है। हाल के दिनों में जिले के अलग-अलग हिस्सों में तकनीकी खराबी और पोल क्षतिग्रस्त होने के कारण घंटों बिजली बाधित रहने की खबरें सामने आई हैं। एक मामले में करीब 40 गांवों में बिजली आपूर्ति लगभग 16 घंटे तक बाधित रही थी। विभाग ने बारिश के कारण रात में मरम्मत कार्य नहीं हो पाने की बात कही थी।
वहीं, मई में भागलपुर के कुछ इलाकों में बिजली-पानी संकट से परेशान लोगों ने सड़क पर उतरकर विरोध भी किया था। उस दौरान स्थानीय लोगों ने लगातार बिजली कटौती के कारण पेयजल संकट गहराने की शिकायत की थी। प्रशासन और अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद बिजली आपूर्ति बहाल कराने का आश्वासन दिया गया था।
सबौर के ताजा मामले में स्थानीय लोगों की सबसे बड़ी शिकायत यही है कि बिजली खराब होने के बाद समस्या के समाधान में जरूरत से ज्यादा समय लगा। लोगों का कहना है कि अगर विभाग के पास मरम्मत के लिए सीढ़ी या अन्य जरूरी उपकरण नहीं थे, तो इसकी व्यवस्था विभाग को खुद करनी चाहिए थी। उपभोक्ताओं को अपने स्तर पर विभागीय काम के लिए संसाधन जुटाने के लिए कहना उचित नहीं है।
लंबे समय तक बिजली गुल रहने के कारण कॉलोनी के लोगों में विभाग के प्रति नाराजगी भी बढ़ी। लोगों ने मांग की है कि बिजली आपूर्ति में आने वाली तकनीकी खराबियों को जल्द दूर करने के लिए स्थानीय स्तर पर पर्याप्त कर्मचारी और उपकरण उपलब्ध कराए जाएं, ताकि भविष्य में किसी मोहल्ले को इतनी लंबी बिजली कटौती का सामना न करना पड़े।
फिलहाल सबौर के इस मामले ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। 16 घंटे तक बिजली बाधित रहने और शिकायत के बावजूद समय पर समाधान नहीं होने से स्थानीय लोग परेशान रहे। सबसे ज्यादा नाराजगी विभागीय कर्मचारियों के उस कथित जवाब को लेकर है, जिसमें सीढ़ी की व्यवस्था करने की बात कही गई।