लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान तीखी बहस हुई। बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी और विपक्ष पर निशाना साधते हुए संसद में राजनीतिक आरोपों और विपक्ष की भूमिका पर सवाल उठाए।
New Delhi: लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान राजनीतिक माहौल काफी गर्म रहा। इस चर्चा में भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे ने विपक्ष और खास तौर पर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला।
निशिकांत दुबे ने अपने भाषण के दौरान कई मुद्दों को उठाया और विपक्ष की राजनीति पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि संसद में उठाया गया यह प्रस्ताव केवल राजनीतिक आरोपों का हिस्सा है और इसमें वास्तविक मुद्दों की कमी दिखाई देती है।
राहुल गांधी पर निशिकांत दुबे का तीखा हमला
संसद में बोलते हुए निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को ‘लीडर ऑफ अपोजिशन’ के बजाय ‘लीडर ऑफ प्रोपगेंडा’ कहा जाना चाहिए। उनका कहना था कि देश और मीडिया दोनों ही राहुल गांधी को गंभीरता से नहीं लेते। दुबे ने आरोप लगाया कि विपक्ष का उद्देश्य संसद में रचनात्मक बहस करना नहीं बल्कि केवल राजनीतिक आरोप लगाना है।
उन्होंने यह भी कहा कि जब भारतीय जनता पार्टी विपक्ष में थी तब भी कई बार संसद में टकराव की स्थिति बनी थी। इसके बावजूद बीजेपी ने उस समय ऐसी राजनीति नहीं की जैसी आज विपक्ष कर रहा है।
ओवैसी का जिक्र करते हुए दिया उदाहरण
अपने भाषण के दौरान निशिकांत दुबे ने एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वह जिस पायजामा-कुर्ते में संसद में आए हैं, वह उन्हें ओवैसी ने ईद के मौके पर दिया था।
दुबे ने कहा कि ओवैसी कभी उन्हें टोपी पहनाने की कोशिश नहीं करते और वह भी ओवैसी को टीका लगाने की कोशिश नहीं करते। उन्होंने कहा कि टोपी पहनने से वह मुसलमान नहीं बन जाएंगे और टीका लगाने से ओवैसी हिंदू नहीं हो जाएंगे।
विचारधारा अलग लेकिन देश पहले
निशिकांत दुबे ने कहा कि वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े हुए हैं और उनकी विचारधारा अलग है। उन्होंने कहा कि वह और ओवैसी अलग-अलग धारा की तरह हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि जब देश की बात आती है तो दोनों साथ खड़े होते हैं। दुबे ने कहा कि राष्ट्रीय हित के मामलों में मतभेदों के बावजूद सभी को एकजुट होना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत की ताकत उसकी विविधता में है और यही कारण है कि अलग-अलग विचारधारा वाले लोग भी देशहित में एक साथ खड़े हो सकते हैं।
ऑपरेशन सिंदूर का किया जिक्र
अपने भाषण में निशिकांत दुबे ने ऑपरेशन सिंदूर का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर वह और ओवैसी दोनों ने देश के पक्ष में अपनी बात रखी थी। दुबे के अनुसार जब वह सऊदी अरब गए थे तो वहां के विदेश मंत्री ने पाकिस्तान के साथ बातचीत करने की सलाह दी थी। उन्होंने कहा कि उस समय उन्होंने साफ कहा था कि भारत अपनी सुरक्षा और सम्मान से समझौता नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि यह वह सरकार नहीं है जो दबाव में आकर निर्णय लेती है। भारत अब अपने हितों की रक्षा करने के लिए स्पष्ट और मजबूत रुख अपनाता है।
पाकिस्तान को लेकर सख्त संदेश
निशिकांत दुबे ने अपने भाषण में पाकिस्तान को लेकर भी कड़ा रुख दिखाया। उन्होंने कहा कि यदि भारत पर हमला होता है तो देश जवाब देना भी जानता है। उन्होंने कहा कि भारत अब वह देश नहीं है जो किसी दबाव में आकर अपने फैसले बदल ले। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में सरकार की नीति स्पष्ट और मजबूत है।
दुबे ने यह भी बताया कि उन्होंने सऊदी अरब में यह संदेश साफ तौर पर दिया था कि यदि पाकिस्तान को समझाना है तो उसे वहां समझाया जाए। भारत अपने हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है।
ओवैसी पर हमले का भी किया जिक्र
संसद में बोलते हुए निशिकांत दुबे ने एआईएमआईएम नेता ओवैसी पर हुए हमले का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब ओवैसी पर हमला हुआ तो विपक्ष के कई नेता उनसे मिलने या हालचाल पूछने तक नहीं गए।
उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह केवल वोट बैंक की राजनीति करता है। दुबे ने कहा कि यदि किसी नेता पर हमला होता है तो राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर उसका समर्थन करना चाहिए।
राहुल गांधी की विदेश यात्राओं पर सवाल
निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी की विदेश यात्राओं पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 2014 से 2026 के बीच राहुल गांधी लगभग 260 बार विदेश यात्रा कर चुके हैं।
दुबे ने पूछा कि इन यात्राओं का खर्च कौन उठाता है। उन्होंने कहा कि गांधी परिवार का कोई व्यवसाय नहीं है, ऐसे में इन यात्राओं को किसके द्वारा प्रायोजित किया गया यह सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने इस मुद्दे को पारदर्शिता और जवाबदेही से जोड़ते हुए विपक्ष से स्पष्ट जवाब देने की मांग की।











