Kim Yo-jong ने अमेरिका और South Korea के संयुक्त सैन्य अभ्यास पर कड़ी चेतावनी दी। Kim Jong Un की बहन ने कहा कि अगर अभ्यास जारी रहा तो क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए भयानक परिणाम हो सकते हैं।
World News: उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच लंबे समय से जारी तनाव एक बार फिर बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है। उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन की बहन किम यो जोंग ने अमेरिका और दक्षिण कोरिया के संयुक्त सैन्य अभ्यास को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उत्तर कोरिया की सुरक्षा और संप्रभुता को चुनौती दी गई तो इसका जवाब बेहद कठोर और खतरनाक हो सकता है।
किम यो जोंग का यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका और दक्षिण कोरिया ने अपने वार्षिक संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘फ्रीडम शील्ड’ की शुरुआत की है। इस सैन्य अभ्यास में हजारों सैनिक शामिल हैं और इसका उद्देश्य दोनों देशों की संयुक्त रक्षा क्षमता को मजबूत करना बताया जा रहा है। हालांकि उत्तर कोरिया इसे अपने खिलाफ सैन्य तैयारी मानता है और लगातार इसका विरोध करता रहा है।
किम यो जोंग की अमेरिका को सीधी चेतावनी
उत्तर कोरिया की राजनीति में किम यो जोंग को बेहद प्रभावशाली और शक्तिशाली नेता माना जाता है। वह अक्सर अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर प्योंगयांग की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने रखती हैं। इस बार भी उन्होंने अमेरिका और दक्षिण कोरिया के सैन्य अभ्यास पर कड़ी नाराजगी जताई है।
किम यो जोंग ने कहा कि वैश्विक सुरक्षा की स्थिति पहले ही बेहद संवेदनशील बनी हुई है। ऐसे समय में अमेरिका और दक्षिण कोरिया का यह सैन्य अभ्यास क्षेत्रीय स्थिरता को कमजोर कर सकता है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उत्तर कोरिया की संप्रभुता को किसी भी तरह से नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई तो उसके परिणाम बेहद भयानक हो सकते हैं।
उनका कहना है कि उत्तर कोरिया अपनी सुरक्षा के मामले में किसी भी तरह की ढील नहीं देगा और किसी भी संभावित खतरे का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
‘फ्रीडम शील्ड’ सैन्य अभ्यास क्या है
अमेरिका और दक्षिण कोरिया हर साल संयुक्त सैन्य अभ्यास आयोजित करते हैं। इनमें से एक प्रमुख अभ्यास ‘फ्रीडम शील्ड’ है, जो दोनों देशों की सेनाओं के बीच समन्वय और रणनीतिक तैयारी को मजबूत करने के उद्देश्य से किया जाता है।
यह अभ्यास मुख्य रूप से एक कमांड पोस्ट एक्सरसाइज है, जिसमें आधुनिक युद्ध परिस्थितियों और संभावित सुरक्षा चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए सैन्य रणनीतियों का परीक्षण किया जाता है। इसमें कंप्यूटर आधारित सिमुलेशन और विभिन्न सैन्य परिदृश्यों का अभ्यास शामिल होता है।
इसके साथ ही ‘वॉरियर शील्ड’ नाम का फील्ड ट्रेनिंग प्रोग्राम भी आयोजित किया जाता है जिसमें सैनिकों को वास्तविक परिस्थितियों में प्रशिक्षण दिया जाता है। अमेरिका और दक्षिण कोरिया का कहना है कि ये अभ्यास पूरी तरह रक्षात्मक प्रकृति के हैं और इनका उद्देश्य किसी देश पर हमला करना नहीं है।
उत्तर कोरिया क्यों करता है इन अभ्यासों का विरोध
उत्तर कोरिया लंबे समय से अमेरिका और दक्षिण कोरिया के संयुक्त सैन्य अभ्यासों का विरोध करता रहा है। प्योंगयांग का मानना है कि ये अभ्यास वास्तव में उत्तर कोरिया के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की तैयारी हैं।

उत्तर कोरिया का कहना है कि जब उसके पड़ोसी देश इतने बड़े पैमाने पर सैन्य अभ्यास करते हैं तो यह उसकी सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है। इसी वजह से वह अक्सर ऐसे अभ्यासों के जवाब में अपने सैन्य कार्यक्रमों को तेज कर देता है। कई बार उत्तर कोरिया ने ऐसे मौकों पर मिसाइल परीक्षण भी किए हैं। इससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ जाता है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता भी बढ़ती है।
परमाणु कार्यक्रम को और मजबूत करने की बात
किम यो जोंग ने अपने बयान में उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बाहरी खतरों से निपटने के लिए उत्तर कोरिया अपनी सैन्य क्षमता को लगातार मजबूत करता रहेगा।
उनका कहना है कि देश की युद्ध निरोधक क्षमता यानी deterrence को मजबूत बनाना जरूरी है ताकि कोई भी देश उत्तर कोरिया पर हमला करने की सोच भी न सके। उत्तर कोरिया पहले ही कई बार परमाणु हथियार और लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों का परीक्षण कर चुका है। इन परीक्षणों के कारण अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान समेत कई देशों की चिंता बढ़ गई है।
वैश्विक सुरक्षा को लेकर भी जताई चिंता
किम यो जोंग ने अपने बयान में वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में पहले से युद्ध और संघर्ष चल रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा ढांचा तेजी से कमजोर हो रहा है।
उन्होंने बिना सीधे नाम लिए पश्चिम एशिया की स्थिति का भी जिक्र किया। हाल के समय में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक राजनीति को और जटिल बना दिया है। किम यो जोंग का कहना है कि ऐसे समय में बड़े पैमाने पर सैन्य अभ्यास करना क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अच्छा संकेत नहीं है।
अमेरिका और दक्षिण कोरिया का पक्ष
अमेरिका और दक्षिण कोरिया ने बार-बार यह स्पष्ट किया है कि उनके संयुक्त सैन्य अभ्यास पूरी तरह रक्षात्मक हैं। दोनों देशों का कहना है कि इन अभ्यासों का उद्देश्य केवल संभावित सुरक्षा खतरों से निपटने की तैयारी करना है।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार इन अभ्यासों का मकसद अपने सहयोगी देश दक्षिण कोरिया की सुरक्षा को मजबूत करना है। अमेरिका का कहना है कि उत्तर कोरिया के लगातार मिसाइल परीक्षणों और सैन्य गतिविधियों के कारण यह तैयारी जरूरी हो गई है।
उत्तर कोरिया और ईरान के संबंध
हाल के वर्षों में उत्तर कोरिया और ईरान के बीच भी कूटनीतिक और राजनीतिक संबंधों की चर्चा होती रही है। दोनों देशों ने कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर एक-दूसरे का समर्थन किया है। उत्तर कोरिया के विदेश मंत्रालय ने हाल ही में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों की भी आलोचना की थी। उसने इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया था।
इसके अलावा कुछ रिपोर्ट्स में यह भी आरोप लगाया गया है कि उत्तर कोरिया और ईरान ने रूस को सैन्य उपकरण उपलब्ध कराए हैं, हालांकि इन आरोपों को लेकर अलग-अलग देशों की अलग राय है।











