Middle East तनाव पर सियासत तेज, कांग्रेस ने सरकार की विदेश नीति पर उठाए सवाल

Middle East तनाव पर सियासत तेज, कांग्रेस ने सरकार की विदेश नीति पर उठाए सवाल

पश्चिम एशिया संकट पर संसद में दिए गए Subrahmanyam Jaishankar के बयान को कांग्रेस ने बेतुका बताया। पार्टी ने Narendra Modi सरकार की विदेश नीति, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक रणनीति को लेकर गंभीर सवाल उठाए।

New Delhi: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान, इजरायल तथा अमेरिका के बीच जारी सैन्य संघर्ष को लेकर भारत की राजनीति में भी बहस तेज हो गई है। संसद में इस मुद्दे पर विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने सरकार की स्थिति स्पष्ट करते हुए बयान दिया, लेकिन कांग्रेस ने उनके वक्तव्य को पूरी तरह खारिज कर दिया है। कांग्रेस ने कहा कि विदेश मंत्री का बयान वास्तविक हालात को समझने में नाकाम रहा है और इसमें भारत के हितों की रक्षा को लेकर कोई स्पष्ट रणनीति नजर नहीं आती।

कांग्रेस का आरोप है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में भारत की विदेश नीति को अधिक संतुलित और रणनीतिक होना चाहिए। पार्टी ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति कई मामलों में दुस्साहसपूर्ण दिखाई देती है, जिससे देश के दीर्घकालिक हित प्रभावित हो सकते हैं।

संसद में विदेश मंत्री का बयान

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संसद में सरकार की स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि भारत क्षेत्र में तनाव कम करने और शांति बहाल करने के पक्ष में है। उन्होंने कहा कि भारत सभी पक्षों से बातचीत और कूटनीति के जरिए विवादों को हल करने की अपील करता है।

विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार के लिए क्षेत्र में रहने वाले भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता है। पश्चिम एशिया के कई देशों में बड़ी संख्या में भारतीय काम करते हैं और सरकार लगातार उनकी स्थिति पर नजर रखे हुए है।

उन्होंने यह भी कहा कि ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक हितों को सुरक्षित रखना भी सरकार के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि मिडिल ईस्ट भारत के लिए तेल और गैस का प्रमुख स्रोत है।

कांग्रेस ने बयान को बताया ‘बेतुका’

विदेश मंत्री के इस बयान के बाद कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी ने उनके वक्तव्य को बेतुका बताते हुए कहा कि इसमें मौजूदा संकट की गंभीरता को समझने की कमी दिखाई देती है।

कांग्रेस के विदेश मामलों के विभाग ने एक बयान जारी कर कहा कि विदेश मंत्री के वक्तव्य में न तो पश्चिम एशिया की जटिल स्थिति का सही विश्लेषण दिखाई देता है और न ही भारत की भूमिका को लेकर कोई स्पष्ट दृष्टिकोण सामने आया है।

यह बयान कांग्रेस के विदेश मामलों के विभाग की ओर से जारी किया गया, जिसकी अध्यक्षता पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद कर रहे हैं। पार्टी का कहना है कि भारत जैसे बड़े देश को अंतरराष्ट्रीय संकट के समय अधिक स्पष्ट और प्रभावी रुख अपनाना चाहिए।

ईरानी पोत के मुद्दे पर भी उठाए सवाल

कांग्रेस ने अपने बयान में यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में भारत के लिए सामरिक रूप से महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्र में हाल ही में एक ईरानी पोत के डूबने की घटना हुई, लेकिन विदेश मंत्री की ओर से इस पर कोई स्पष्ट विरोध दर्ज नहीं कराया गया।

पार्टी का कहना है कि यह घटना क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कानून के लिहाज से गंभीर थी। ऐसे में भारत की सरकार को इस पर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए था। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार की प्रतिक्रिया अपेक्षाकृत कमजोर रही और इससे यह संदेश गया कि भारत इस तरह की घटनाओं पर मजबूत प्रतिक्रिया देने से बच रहा है।

टारगेट किलिंग पर भी नहीं हुई निंदा

कांग्रेस ने विदेश मंत्री के बयान में एक और कमी बताते हुए कहा कि इसमें एक संप्रभु राष्ट्र के प्रमुख की टारगेट किलिंग की निंदा भी नहीं की गई। अंतरराष्ट्रीय राजनीति में इस तरह की घटनाएं बेहद गंभीर होती हैं और इन पर स्पष्ट रुख लेना जरूरी होता है। कांग्रेस ने कहा कि भारत हमेशा अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता के सम्मान की बात करता रहा है, इसलिए ऐसे मामलों में स्पष्ट निंदा करना जरूरी था।

ऊर्जा सुरक्षा को लेकर उठाए सवाल

कांग्रेस ने यह भी कहा कि विदेश मंत्री के बयान में भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर कोई ठोस योजना सामने नहीं आई। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। ऐसे में यह जरूरी है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए वैकल्पिक रणनीति तैयार करे।

कांग्रेस के अनुसार विदेश मंत्री के बयान में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि भारत अपनी ऊर्जा सप्लाई में विविधता कैसे लाएगा और भविष्य में ऊर्जा संप्रभुता को कैसे मजबूत करेगा।

वैश्विक बदलावों को लेकर स्पष्ट रणनीति की मांग

कांग्रेस के विदेश मामलों के विभाग ने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और कई क्षेत्रों में अस्थिरता बढ़ रही है। ऐसे समय में भारत को एक स्पष्ट और सुविचारित विदेश नीति की जरूरत है।

पार्टी ने कहा कि विदेश मंत्री के बयान में इन वैश्विक बदलावों को लेकर कोई गहरी समझ दिखाई नहीं देती। इसके साथ ही भारत के दीर्घकालिक हितों की रक्षा के लिए भी कोई स्पष्ट रोडमैप सामने नहीं आया है।

पीएम मोदी की विदेश नीति पर भी टिप्पणी

कांग्रेस ने अपने बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति पर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी ने कहा कि मौजूदा सरकार की विदेश नीति कई मामलों में दुस्साहसपूर्ण दिखाई देती है।

कांग्रेस का आरोप है कि सरकार के कुछ फैसलों के कारण भारत की पारंपरिक कूटनीतिक ताकत कमजोर हो रही है। पार्टी ने यह भी कहा कि भारतीय विदेश सेवा को कमजोर करना देश के लिए चिंता का विषय है। कांग्रेस का मानना है कि आजादी के बाद से भारत ने कूटनीति के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं और इन उपलब्धियों को बनाए रखना जरूरी है।

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