पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति प्रोटोकॉल विवाद पर शिवसेना UBT ने सामना के संपादकीय में बीजेपी पर हमला किया। पार्टी ने दावा किया कि अगर इस मुद्दे पर राजनीति जारी रही तो आगामी चुनावों में ममता बनर्जी को फायदा मिल सकता है।
Maharashtra: पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दौरे के दौरान स्वागत प्रोटोकॉल को लेकर उठे विवाद ने देश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। इस मुद्दे को लेकर अब महाराष्ट्र की राजनीति भी सक्रिय हो गई है। शिवसेना (UBT) ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर निशाना साधते हुए कहा है कि इस विवाद को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।
संपादकीय में दावा किया गया कि अगर बीजेपी पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों में राष्ट्रपति के अपमान का मुद्दा उठाकर राजनीति करने की कोशिश करेगी तो इसका फायदा अंततः मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को ही मिल सकता है। लेख में कहा गया कि इस तरह की राजनीति से तृणमूल कांग्रेस (TMC) की स्थिति और मजबूत हो सकती है।
राष्ट्रपति के दौरे से शुरू हुआ विवाद
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पश्चिम बंगाल के दौरे पर पहुंचीं। आरोप लगाया गया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कोलकाता एयरपोर्ट पर राष्ट्रपति के स्वागत के लिए मौजूद नहीं थीं।
इस घटना के बाद बीजेपी नेताओं ने इसे राष्ट्रपति का अपमान बताया और इस मुद्दे को लेकर ममता बनर्जी की आलोचना शुरू कर दी। बीजेपी का कहना था कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति के स्वागत के लिए मुख्यमंत्री का उपस्थित न होना प्रोटोकॉल का उल्लंघन है।
हालांकि इस आरोप के बाद पश्चिम बंगाल सरकार और तृणमूल कांग्रेस की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई।
सामना के संपादकीय में बीजेपी पर हमला
शिवसेना UBT के मुखपत्र ‘सामना’ में प्रकाशित संपादकीय में इस पूरे विवाद को राजनीतिक मुद्दा बनाने पर सवाल उठाए गए हैं। लेख में कहा गया कि राष्ट्रपति के दौरे के दौरान प्रोटोकॉल से जुड़े मुद्दों को लेकर विवाद खड़ा किया गया और इसे चुनावी राजनीति से जोड़ा जा रहा है।

संपादकीय में कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी इस घटना को राष्ट्रपति के अपमान के रूप में प्रचारित कर रहे हैं। लेकिन अगर इसे चुनावी मुद्दा बनाया गया तो इसका फायदा ममता बनर्जी को ही मिलेगा।
ममता बनर्जी का स्पष्टीकरण
इस विवाद के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी अपनी सफाई दी थी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति की यात्रा का कार्यक्रम राज्य सरकार को विश्वास में लिए बिना तय किया गया था।
ममता बनर्जी के अनुसार उस समय वह एक आंदोलन और धरने से जुड़े कार्यक्रम में व्यस्त थीं। इसी कारण वह कोलकाता एयरपोर्ट पर राष्ट्रपति के स्वागत के लिए नहीं पहुंच सकीं।
उन्होंने बताया कि उनकी ओर से कोलकाता के मेयर को राष्ट्रपति के स्वागत के लिए भेजा गया था। ममता बनर्जी ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से जो संभव था वह किया गया। अगर राष्ट्रपति कई बार राज्य का दौरा करती हैं तो क्या हर बार मुख्यमंत्री का एयरपोर्ट पहुंचना जरूरी होगा। उनके अनुसार इस मुद्दे को बेवजह बड़ा बनाया जा रहा है।
आदिवासी मुद्दों का भी जिक्र
सामना के संपादकीय में इस विवाद को आदिवासी मुद्दों से भी जोड़ने की कोशिश की गई है। लेख में कहा गया कि बीजेपी ने राष्ट्रपति के अपमान के मुद्दे को आदिवासी महिला के सम्मान से जोड़कर राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की।
इसके जवाब में ममता बनर्जी ने मणिपुर में आदिवासी महिलाओं के साथ हुई घटनाओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों पर राष्ट्रीय स्तर पर ज्यादा चर्चा क्यों नहीं होती। लेख में यह भी सवाल उठाया गया कि आदिवासी क्षेत्रों में जल, जंगल और जमीन से जुड़े अधिकारों के मुद्दों पर पर्याप्त ध्यान क्यों नहीं दिया जाता।
पहले भी उठे हैं प्रोटोकॉल से जुड़े विवाद
संपादकीय में यह भी कहा गया कि प्रोटोकॉल को लेकर विवाद कोई नई बात नहीं है। इससे पहले भी कई अवसरों पर इस तरह की बहस सामने आ चुकी है।
लेख में उदाहरण देते हुए कहा गया कि हरियाणा में एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति को लेकर भी सवाल उठे थे। इसके अलावा 28 मई 2023 को नए संसद भवन के उद्घाटन समारोह में राष्ट्रपति को आमंत्रित नहीं किए जाने को लेकर भी राजनीतिक विवाद हुआ था। इसी तरह अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन समारोह में भी राष्ट्रपति को आमंत्रण न मिलने को लेकर कई नेताओं ने सवाल उठाए थे।












