वैश्विक बाजार में Brent Crude और West Texas Intermediate (WTI) की कीमतों में 6% से ज्यादा गिरावट आई। तेल 100 डॉलर से नीचे फिसल गया, जिससे मिडिल ईस्ट तनाव के बीच बाजार को कुछ राहत मिली।
Crude Oil Price Update: वैश्विक कमोडिटी बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को लेकर बड़ी हलचल देखने को मिली है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच जहां एक दिन पहले तेल की कीमतें तीन साल से ज्यादा के उच्च स्तर पर पहुंच गई थीं, वहीं मंगलवार को इसमें तेज गिरावट दर्ज की गई।
ब्रेंट क्रूड और अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी WTI दोनों में 6 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद बाजार में कुछ राहत आई है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर बनी चिंता कुछ कम हुई है।
ब्रेंट और WTI क्रूड में तेज गिरावट
मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड के वायदा भाव में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड करीब 6.51 डॉलर यानी लगभग 6.6 प्रतिशत गिरकर 92.45 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।
इसी तरह अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी WTI क्रूड भी लगभग 6.12 डॉलर यानी करीब 6.5 प्रतिशत गिरकर 88.65 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया।
तेल की कीमतों में यह गिरावट ऐसे समय आई जब एक दिन पहले ही बाजार में जबरदस्त उछाल देखने को मिला था। इस तेजी ने निवेशकों और उद्योग जगत को चिंतित कर दिया था क्योंकि ऊंची कीमतों का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
सोमवार को तीन साल के उच्च स्तर पर पहुंचा था तेल
सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला था। उस दिन ब्रेंट क्रूड का भाव 119.50 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। वहीं WTI क्रूड की कीमत भी लगभग 119.48 डॉलर प्रति बैरल तक चली गई थी।
यह स्तर वर्ष 2022 के मध्य के बाद का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है। बाजार में यह तेजी मुख्य रूप से मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका के कारण आई थी।
सऊदी अरब समेत कुछ बड़े तेल उत्पादक देशों द्वारा उत्पादन में कटौती की खबरों ने भी कीमतों को ऊपर धकेलने में अहम भूमिका निभाई थी। इसके अलावा अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने भी बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी थी।
ट्रंप के बयान से बाजार को मिली राहत
तेल की कीमतों में गिरावट की एक बड़ी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान भी माना जा रहा है। ट्रंप ने संकेत दिया कि ईरान के खिलाफ चल रहा संघर्ष जल्द समाप्त हो सकता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका इस युद्ध में अपने शुरुआती अनुमान से काफी आगे बढ़ चुका है और अब स्थिति जल्द सामान्य होने की उम्मीद है।

इस बयान के बाद बाजार में यह उम्मीद बनी कि अगर संघर्ष जल्द खत्म होता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति पर लंबे समय तक असर नहीं पड़ेगा। इसी उम्मीद के कारण निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी और कीमतों में गिरावट देखने को मिली।
रूस और अमेरिका के बीच बातचीत का असर
तेल बाजार में राहत का एक और कारण रूस और अमेरिका के बीच हुई बातचीत को भी माना जा रहा है। खबरों के मुताबिक रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन और डोनाल्ड ट्रंप के बीच हाल ही में बातचीत हुई। बताया गया कि इस बातचीत में ईरान युद्ध को समाप्त करने के लिए कुछ संभावित प्रस्तावों पर चर्चा की गई।
क्रेमलिन के एक सहयोगी के अनुसार इस बातचीत से यह उम्मीद जगी है कि संघर्ष को जल्द खत्म करने की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं। इसी संभावना ने बाजार में आपूर्ति को लेकर बनी चिंता को कुछ हद तक कम किया।
ईरान की चेतावनी से बनी अनिश्चितता
हालांकि स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है क्योंकि ईरान की ओर से भी कड़े बयान सामने आए हैं। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर यानी IRGC ने कहा है कि युद्ध कब खत्म होगा इसका फैसला वही करेंगे। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर अमेरिका और इजरायल के हमले जारी रहे तो क्षेत्र से तेल निर्यात पूरी तरह बंद किया जा सकता है।
रूस पर प्रतिबंधों में ढील की चर्चा
रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप प्रशासन तेल की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए कई विकल्पों पर विचार कर रहा है। इनमें अमेरिका के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार यानी Strategic Petroleum Reserve से कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ाने का विकल्प भी शामिल है। अगर ऐसा होता है तो वैश्विक बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति आ सकती है जिससे कीमतों को नीचे लाने में मदद मिल सकती है।
तेल उत्पादक देशों की उत्पादन कटौती
इस बीच खाड़ी क्षेत्र के कई प्रमुख तेल उत्पादक देशों ने भी उत्पादन में कटौती शुरू कर दी है। यह कदम बाजार में कीमतों को स्थिर रखने और आपूर्ति को नियंत्रित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार इराक ने अपने दक्षिणी तेल क्षेत्रों में उत्पादन लगभग 70 प्रतिशत तक घटा दिया है। इसके बाद वहां उत्पादन करीब 1.3 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक सीमित हो गया है।
इसके अलावा कुवैत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन ने भी उत्पादन में कमी करने के साथ ‘फोर्स मेज्योर’ घोषित कर दिया है। फोर्स मेज्योर का मतलब होता है कि असाधारण परिस्थितियों के कारण कंपनी अपने अनुबंधित दायित्वों को पूरा करने में असमर्थ हो सकती है।
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर केवल उत्पादन पर ही नहीं बल्कि शिपिंग और सप्लाई चेन पर भी पड़ा है। मिडिल ईस्ट के कई समुद्री मार्ग वैश्विक तेल व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। अगर इन मार्गों में किसी तरह की बाधा आती है तो दुनिया भर में तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।












