सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी और TMC सांसदों की SIR प्रक्रिया याचिका पर सुनवाई की। अपीलेट ट्रिब्यूनल गठन का आदेश दिया गया, ज्यूडिशियल ऑफिसर्स को पूरा समर्थन मिलेगा और हर रिजेक्ट मामले का कारण दर्ज होगा।
New Delhi: सुप्रीम कोर्ट में पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया के खिलाफ ममता बनर्जी और अन्य TMC सांसदों की याचिका पर मंगलवार को सुनवाई हुई। इस दौरान चुनाव आयोग और राज्य सरकार की तरफ से भी पैरवी की गई। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि चुनाव आयोग हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से सलाह लेकर एक नोटिफिकेशन जारी करे, जिसमें एक पूर्व चीफ जस्टिस और अन्य जजों को शामिल करते हुए अपीलेट ट्रिब्यूनल बनाया जाए।
यह ट्रिब्यूनल उन अपीलों पर सुनवाई करेगा जिन्हें ज्यूडिशियल ऑफिसर रिजेक्ट कर रहे हैं और साथ ही हर रिजेक्ट किए गए मामले का कारण भी बताएंगे। ट्रिब्यूनल का खर्च चुनाव आयोग वहन करेगा।
राज्य सरकार की ओर से वकील मेनका गुरुस्वामी ने कोर्ट को बताया कि ज्यूडिशियल ऑफिसर्स ने अब तक लगभग 7 लाख केस प्रोसेस किए हैं, जबकि कुल 63 लाख केस हैं और करीब 57 लाख अभी बाकी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस स्थिति पर नाराजगी जताई और कहा कि एडवांस पिटीशन से गलत संदेश जाता है कि सिस्टम पर भरोसा नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि पिटीशनर कैसे ज्यूडिशियल ऑफिसर्स से सवाल करने की हिम्मत करते हैं।
CJI सूर्यकांत ने जताई नाराजगी
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान कहा कि यह स्थिति चिंताजनक है क्योंकि अब उन्हें दोनों पक्षों पर संदेह होने लगा है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि एप्लीकेशन पर अवमानना का नोटिस जारी किया जाएगा और इसे उसी भाषा में तैयार किया जाएगा जो आवश्यक है। CJI ने यह भी कहा कि उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस ने बताया कि 10 लाख से अधिक ऑब्जेक्शन पहले ही निपटा दिए गए हैं।
कोर्ट ने यह जानकारी साझा की कि पश्चिम बंगाल से 500 से ज्यादा, ओडिशा और झारखंड से लगभग 200 ज्यूडिशियल ऑफिसर तैनात किए गए हैं, जो दिन-रात काम कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि ज्यूडिशियल ऑफिसर्स की जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए उन्हें पूरी लॉजिस्टिक मदद प्रदान की जाए।
राज्य सरकार को मिले निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि सभी ज्यूडिशियल अधिकारियों को आवश्यक सुविधाएं और समर्थन दिया जाए। इसके अलावा कोर्ट ने यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि चुनाव आयोग कोई भी ऐसा नियम लागू नहीं करेगा जिससे अधिकारियों को परेशानी हो। जहां भी जरूरत पड़े, नई लॉगिन आईडी तुरंत बनाई जाएंगी ताकि काम में कोई बाधा न आए। कोर्ट ने यह भी कहा कि अधिकारियों की छुट्टियां कैंसिल कर दी गई हैं और उन्हें आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं।
ज्यूडिशियल ऑफिसर्स का काम
सुप्रीम कोर्ट ने माना कि ज्यूडिशियल ऑफिसर्स ने अब तक भारी संख्या में केस निपटाए हैं और उनकी मेहनत सराहनीय है। हालांकि कोर्ट ने चेतावनी दी कि सिस्टम पर भरोसा जताने के बजाय यदि कोई गलत संदेश जाएगा, तो यह न्याय प्रक्रिया के लिए हानिकारक होगा। मेनका गुरुस्वामी ने बताया कि उनके द्वारा ज्यूडिशियल ऑफिसर्स से सवाल करना केवल तथ्यात्मक जानकारी लेने के उद्देश्य से किया गया था, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने इसे गंभीरता से लिया और इसके लिए कड़ी चेतावनी दी।
कोर्ट ने चुनाव आयोग और राज्य सरकार को यह स्पष्ट निर्देश दिया कि सभी अधिकारियों को निर्बाध और सुविधाजनक रूप से काम करने का अवसर मिले। इसके अलावा कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों की मेहनत और समय की प्रतिबद्धता को ध्यान में रखते हुए प्रशासनिक सहायता प्रदान करना अनिवार्य है, ताकि न्यायिक प्रक्रिया में कोई बाधा न आए।
SC ने ट्रिब्यूनल निर्माण पर दी दिशा
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अपीलेट ट्रिब्यूनल के गठन से उन अपीलों की सुनवाई होगी जिन्हें ज्यूडिशियल ऑफिसर रिजेक्ट कर रहे हैं। ट्रिब्यूनल का खर्च चुनाव आयोग उठाएगा और हर रिजेक्ट हुए मामले के कारण का रिकॉर्ड रखा जाएगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि इससे न्याय प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और जनता का विश्वास सिस्टम में मजबूत होगा।












