प्रधानमंत्री मोदी ने एलपीजी की कमी पर उच्च-स्तरीय बैठक की। घरेलू कुकिंग गैस को प्राथमिकता दी गई, कमर्शियल सेक्टर में आपूर्ति कम की गई, रिफाइनरियों और इंपोर्ट विकल्पों के जरिए संकट से निपटने की रणनीति बनाई गई।
New Delhi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ एलपीजी की कमी पर उच्च-स्तरीय बैठक की। बैठक का मकसद घरेलू आपूर्ति को सुरक्षित रखना और संकट से निपटने के लिए रणनीति तैयार करना था। यह कमी मिडिल ईस्ट में ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजराइल की सैन्य कार्रवाई और ईरान के जवाबी हमलों के बाद हुई है।
होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने के कारण तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है, जो भारत की एनर्जी सिक्योरिटी के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। देश अपनी कुल एलपीजी जरूरतों का 62 प्रतिशत हिस्सा इम्पोर्ट करता है, इसलिए यह संकट गंभीर माना जा रहा है।
घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता
पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्रालय ने एलपीजी डिस्ट्रीब्यूशन का बंटवारा तय किया है। भारत में हर साल लगभग 31.3 लाख टन एलपीजी की खपत होती है, जिसमें घरेलू उपभोक्ताओं का हिस्सा कुल खपत का 87 प्रतिशत है जबकि कमर्शियल सेक्टर को केवल 13 प्रतिशत गैस मिलती है।
सरकार ने घरेलू कुकिंग गैस को प्राथमिकता दी है ताकि आम जनता को संकट से बचाया जा सके। इस वजह से मुंबई, बेंगलुरु और अन्य बड़े शहरों में होटल, रेस्टोरेंट और इंडस्ट्रीज में कामकाज प्रभावित हुआ है। इंडिया होटल्स एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए सरकार से उपाय करने की अपील की है।
मंत्रालय ने उठाए इमरजेंसी कदम

संकट को देखते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय ने कई इमरजेंसी उपाय लागू किए हैं। रिफाइनरियों को निर्देश दिया गया है कि पेट्रोकेमिकल स्ट्रीम को कम करके एलपीजी आउटपुट बढ़ाया जाए ताकि घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता दी जा सके। जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए एलपीजी रिफिल बुकिंग साइकिल को पहले के 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है।
इसके अलावा इंपोर्टेड एलपीजी को जरूरी नॉन-डोमेस्टिक सेक्टर, खासकर हॉस्पिटल और एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस की तरफ भेजा जा रहा है ताकि वहां की गतिविधियां प्रभावित न हों। इस संकट को प्रबंधित करने के लिए ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) ने तीन एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स (EDs) वाली कमेटी बनाई है, जो होटल, रेस्टोरेंट और अन्य इंडस्ट्रीज से मिले रिप्रेजेंटेशन को मेरिट, जरूरत और प्रोडक्ट की उपलब्धता के आधार पर रिव्यू करेगी और गैस की आपूर्ति का निर्णय लेगी।
संकट की गंभीरता
सरकार ने स्पष्ट किया है कि घरेलू सेक्टर की सुरक्षा सर्वोपरि है। अगर आपूर्ति बाधित हुई तो आम घरों के लिए खाना बनाने और रोजमर्रा की जरूरतें प्रभावित हो सकती हैं। वहीं, कमर्शियल सेक्टर को आपूर्ति कम करने के फैसले से उद्योग प्रभावित होंगे, लेकिन यह कदम जनता की रोजमर्रा की जिंदगी को प्राथमिकता देने के लिए आवश्यक माना गया है। मंत्रालय लगातार स्थिति पर नजर रख रहा है और जरूरत पड़ने पर और कदम उठाए जाएंगे।
पीएम मोदी और मंत्रियों की रणनीति
प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक में स्थिति की समीक्षा की और मंत्रियों से निर्देश दिए कि एलपीजी की आपूर्ति को निर्बाध बनाए रखने के लिए हर संभव कदम उठाया जाए। विदेश मंत्री जयशंकर ने अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चैन और इंपोर्ट विकल्पों पर अपडेट दिया। मंत्रियों ने मिलकर यह तय किया कि रिफाइनरियों की क्षमता का अधिकतम उपयोग किया जाएगा और इंपोर्ट को बढ़ाया जाएगा ताकि संकट से निपटा जा सके।











