देश में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। सोमवार सुबह तेल कंपनियों ने पेट्रोल के दाम में 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 2.71 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी।
नई दिल्ली: भारत में पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। पिछले 10 दिनों में चौथी बार ईंधन कीमतों में वृद्धि होने के बाद विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। Aam Aadmi Party के वरिष्ठ नेताओं ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी को आम जनता पर आर्थिक बोझ बताते हुए सरकार की आलोचना की है।
सोमवार को सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिर बढ़ोतरी की घोषणा की। नई दरों के अनुसार पेट्रोल की कीमत में 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 2.71 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया गया। इससे पहले भी मई महीने में तीन बार ईंधन दरें बढ़ाई जा चुकी हैं।
AAP सांसद संजय सिंह ने केंद्र पर साधा निशाना
ईंधन कीमतों में ताजा बढ़ोतरी के बाद Sanjay Singh ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने लिखा कि चुनाव खत्म होने के बाद आम जनता की जरूरतें सरकार की प्राथमिकता नहीं रह गई हैं। संजय सिंह ने अपने पोस्ट में कहा कि सरकार जनता को केवल वोट के रूप में देखती है और चुनावों के बाद आम लोगों की आर्थिक परेशानियों को नजरअंदाज किया जा रहा है। उनके बयान को सोशल मीडिया पर व्यापक प्रतिक्रिया मिली और कई यूजर्स ने बढ़ती महंगाई पर चिंता जताई।
दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री Manish Sisodia ने भी पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों का सीधा असर आम लोगों के घरेलू बजट पर पड़ रहा है। सिसोदिया ने अपने बयान में कहा कि वेतन नहीं बढ़ रहे, रोजगार को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है और व्यापारिक गतिविधियां पहले से दबाव में हैं। ऐसे में रोजाना ईंधन महंगा होने से दूध, सब्जियां, परिवहन और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतें भी बढ़ती जा रही हैं।

क्यों बढ़ रही हैं पेट्रोल-डीजल की कीमतें?
विशेषज्ञों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव ईंधन दरों को प्रभावित कर रहे हैं। पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता और वैश्विक सप्लाई को लेकर चिंताओं ने तेल बाजार में दबाव बढ़ाया है। हालांकि हाल के दिनों में कुछ अंतरराष्ट्रीय संकेत सकारात्मक रहे हैं, लेकिन घरेलू स्तर पर टैक्स संरचना और मुद्रा विनिमय दरों का असर भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ता है।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है, इसलिए वैश्विक तेल बाजार में किसी भी बदलाव का असर सीधे घरेलू कीमतों पर दिखाई देता है। ईंधन कीमतों में वृद्धि केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहती। परिवहन लागत बढ़ने से खाद्य पदार्थों, कृषि उत्पादों और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी असर पड़ता है। यही वजह है कि पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों को महंगाई का प्रमुख कारण माना जाता है।










