ग्वालियर में वकील मृत्युंजय सिंह चौहान की आत्महत्या मामले में कमरे से मिली ‘भगत सिंह की जेल डायरी’ ने जांच को भावनात्मक मोड़ दिया। प्रेम तनाव, शिकायत पर सुनवाई न होना और अवसाद कारण बताए जा रहे हैं। पुलिस जांच जारी है।
Madhya Pradesh: पुलिस जांच में सामने आया कि वकील मृत्युंजय के बेड पर, सिरहाने के पास ‘भगत सिंह की जेल डायरी’ रखी मिली। किताब खुली हुई थी और उसी हिस्से पर थी, जहां भगत सिंह ने आज़ादी और मुक्ति के अर्थ पर लिखा है। इन पन्नों में फांसी से पहले के साहस, मजबूत इरादे और आत्मबल का जिक्र है।
पुलिस को आशंका है कि मृत्युंजय ने अंतिम समय में यह किताब पढ़ी और उसी भावनात्मक स्थिति में यह कदम उठाया। हालांकि, पुलिस स्पष्ट कर रही है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है।
भगत सिंह की जेल डायरी
यह डायरी भगत सिंह ने 1929 से 1931 के बीच लाहौर सेंट्रल जेल में रहते हुए लिखी थी। इसमें उन्होंने आज़ादी, इंसाफ, आत्मसम्मान और शोषण के खिलाफ विचारों को संकलित किया। महान दार्शनिकों और लेखकों के विचारों के साथ-साथ भगत सिंह के निजी नोट्स भी इसमें शामिल हैं।
डायरी में यह बताया गया है कि आज़ादी क्या है, मुक्ति का मतलब क्या है और अन्याय के खिलाफ खड़े होने के लिए किस तरह की हिम्मत चाहिए। भगत सिंह की शहादत के बाद यह डायरी उनके पिता सरदार किशन सिंह को सौंपी गई थी और बाद में परिवार में सुरक्षित रही। आज यह किताब कई युवाओं के लिए प्रेरणा मानी जाती है।
प्रेम संबंध में टूटे सपने
पुलिस और परिजनों के अनुसार, मृत्युंजय पिछले कुछ दिनों से मानसिक रूप से परेशान थे। उनकी मां शिवकुमारी ने बताया कि बेटे का पिछले पांच साल से मुरैना में पदस्थ एक महिला सब-इंस्पेक्टर से प्रेम संबंध था। दोनों 30 दिसंबर को कोर्ट मैरिज करने वाले थे।
12 दिसंबर को मृत्युंजय अपनी प्रेमिका से मिलने उसके शासकीय क्वार्टर पहुंचे। वहां किसी बात को लेकर विवाद हुआ और झगड़े की स्थिति बन गई। इसके बाद से मृत्युंजय गहरे अवसाद में चले गए। उन्होंने थाने में शिकायत भी की, लेकिन सुनवाई न होने से वे और आहत हो गए।
मां से आखिरी बातचीत
मां के अनुसार, विवाद के बाद मृत्युंजय ने उन्हें फोन कर रोते हुए पूरी बात बताई। मां ने समझाने की कोशिश की, लेकिन वह बेहद टूट चुके थे। उन्होंने शिकायत पत्र भी लिखा था, जो पुलिस को कमरे से मिला है।
परिजनों का कहना है कि यदि समय पर उनकी बात सुनी जाती और मदद मिलती, तो शायद यह घटना टाली जा सकती थी। फिलहाल पुलिस यह भी जांच कर रही है कि शिकायत पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
सेंट्रल जेल पहुंचा शव
पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। इसके बाद परिवार शव लेकर ग्वालियर सेंट्रल जेल पहुंचा, जहां मृतक के बड़े भाई प्रणव सिंह चौहान ने अंतिम दर्शन किए। यह एक दुर्लभ घटना रही, जब कोई परिवार शव लेकर सेंट्रल जेल पहुंचा।
बाद में परिजन शव को वाराणसी ले गए, जहां गंगा घाट पर पूरे विधि-विधान से अंतिम संस्कार किया गया।
पिता वडोदरा से पहुंचे
मृत्युंजय की मौत की खबर मिलते ही उनके पिता कुलदीप सिंह चौहान वडोदरा (गुजरात) से ग्वालियर पहुंचे। उन्होंने बेटे का अंतिम दर्शन किया। बताया गया कि परिवार लंबे समय से अलग रह रहा था और आपसी संबंध भी तनावपूर्ण थे।
पुलिस का कहना है कि सभी तथ्यों को जोड़कर जांच की जा रही है और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।












