पिठोरी अमावस्या पर माताएं संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना से व्रत रखती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन 64 योगिनियों और सप्त मातृकाओं की पूजा का विशेष महत्व है।
पिठोरी अमावस्या: हिंदू धर्म में पिठोरी अमावस्या को माताओं के लिए विशेष माना जाता है। इस दिन संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना से व्रत रखा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार 64 योगिनियों और सप्त मातृकाओं की पूजा करने से मातृशक्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दिन पूजा के लिए विशेष विधि अपनाई जाती है।
स्नान के बाद व्रत का संकल्प लें
पिठोरी अमावस्या पर व्रत रखने वाली माताएं सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ कपड़े पहनें। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई कर भगवान गणेश, माता पार्वती और 64 योगिनियों का ध्यान किया जाता है।

पूजा से पहले संतान के अच्छे स्वास्थ्य, लंबी आयु, सुखी जीवन और मंगल की कामना करते हुए व्रत का संकल्प लिया जाता है। पूरे दिन श्रद्धा और संयम के साथ व्रत रखने की परंपरा है। अपनी स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखते हुए व्रत का स्वरूप तय किया जा सकता है। इसमें निर्जला या फलाहार व्रत रखा जा सकता है।
आटे या गोबर से बनाएं देवी-देवताओं के प्रतीक
पिठोरी अमावस्या की पूजा में देवी पिठोरी के साथ सप्त मातृकाओं और 64 योगिनियों का विशेष महत्व बताया गया है। पूजा के लिए गेहूं के आटे या गोबर से इनके छोटे-छोटे प्रतीक बनाए जा सकते हैं। इन्हें साफ चौकी पर विधि के अनुसार स्थापित किया जाता है।
सप्त मातृकाओं में ब्राह्मी, माहेश्वरी, कौमारी, वैष्णवी, वाराही, इंद्राणी और चामुंडा को शामिल किया जाता है। प्रतीकों की स्थापना के बाद पूजा की तैयारी पूरी की जाती है।
प्रदोष काल में करें पूजा
शाम के समय प्रदोष काल में देवी पिठोरी, सप्त मातृकाओं और 64 योगिनियों की पूजा करने की परंपरा है। चौकी पर सभी प्रतीकों को स्थापित करने के बाद सबसे पहले भगवान गणेश का स्मरण किया जाता है।
इसके बाद सभी मातृशक्तियों का ध्यान करते हुए श्रद्धापूर्वक पूजा शुरू की जाती है। पूजा के दौरान संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना की जाती है।
रोली, अक्षत, फूल और प्रसाद करें अर्पित
पूजा में रोली, अक्षत, फूल, धूप और दीप अर्पित किए जाते हैं। इसके अलावा फल, मिष्ठान्न और श्रद्धा के अनुसार अन्य प्रसाद भी देवी को चढ़ाया जा सकता है। पिठोरी अमावस्या की पूजा में सुहाग से जुड़ी सामग्री देवी को अर्पित करने की भी परंपरा बताई गई है।
पूजा के दौरान माताएं अपनी संतान की रक्षा, अच्छी सेहत और सुखी जीवन के लिए प्रार्थना करती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, 64 योगिनियों और सप्त मातृकाओं की पूजा मातृशक्ति के आशीर्वाद से जुड़ी मानी जाती है।
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