प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वडोदरा में करीब 6 हजार युवाओं से 25 मिनट संवाद किया। उन्होंने झूठे दावों से सावधान रहने की अपील की। कार्यक्रम में धुरंधर का गाना बजा, जबकि मोदी ने फ्रेट कॉरिडोर, AI और स्किल डेवलपमेंट पर भी बात की।
वडोदरा: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को गुजरात के वडोदरा में आयोजित एक कार्यक्रम में Gen-Z युवाओं से संवाद किया। करीब 25 मिनट के इस संवाद में उन्होंने युवाओं को झूठे दावों और भ्रामक सूचनाओं से सावधान रहने की अपील की। कार्यक्रम में करीब 6 हजार युवाओं के शामिल होने की बात कही गई। कार्यक्रम की शुरुआत भी युवाओं के बीच लोकप्रिय अंदाज में हुई। प्रधानमंत्री के लिए विशेष रूप से Y आकार का रैंप तैयार किया गया था। भाषण से पहले मोदी रैंप पर चलते हुए युवाओं के बीच पहुंचे। मंच पर पहुंचने के दौरान क्वीन का प्रसिद्ध गीत वी विल रॉक यू बजाया गया। इसके बाद फिल्म धुरंधर का गाना आरी आरी भी सुनाई दिया।
झूठ की गूंज से गुमराह होने से बचें: मोदी
Gen-Z के साथ बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने युवाओं से तथ्यों और सच्चाई पर भरोसा करने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोग झूठ की गूंज के जरिए उन्हें गुमराह करने की कोशिश कर सकते हैं, लेकिन युवाओं को सच्चाई के साथ खड़े रहना चाहिए।
मोदी की इस टिप्पणी को कांग्रेस नेता राहुल गांधी और कांग्रेस के छात्रों की गूंज अभियान पर कटाक्ष के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, प्रधानमंत्री ने इस संदर्भ में किसी व्यक्ति का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया।
राजनीतिक रूप से यह संवाद इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि युवा मतदाता भारतीय चुनावी राजनीति में एक बड़ा हिस्सा हैं। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान 18 से 29 वर्ष आयु वर्ग के मतदाताओं की हिस्सेदारी कुल मतदाताओं में 22.78 प्रतिशत थी। यानी देश में लगभग हर चार मतदाताओं में से एक इस आयु वर्ग से था।
रैंप पर पहुंचे मोदी, युवाओं ने बनाए वीडियो
कार्यक्रम के लिए तैयार किए गए Y आकार के रैंप के जरिए प्रधानमंत्री सीधे युवाओं के बीच पहुंचे। मोदी के वहां पहुंचने पर युवाओं ने उनका अभिवादन किया और कई युवाओं को अपने मोबाइल फोन से प्रधानमंत्री के वीडियो बनाते हुए देखा गया।
कार्यक्रम में प्रधानमंत्री को भगवान गणपति की मूर्ति देकर स्वागत भी किया गया। एक छात्र ने उन्हें एक तस्वीर भेंट की। आयोजन की प्रस्तुति और प्रधानमंत्री की मंच पर एंट्री को पारंपरिक राजनीतिक भाषण से अलग युवा-केंद्रित अंदाज में रखा गया।
संगीत और रैंप के इस्तेमाल ने कार्यक्रम को मनोरंजन और युवा संस्कृति से जुड़ा स्वरूप दिया। इसका उद्देश्य नई पीढ़ी के साथ सीधे और अनौपचारिक तरीके से संवाद स्थापित करना भी माना जा रहा है।
फ्रेट कॉरिडोर पर मोदी ने सुनाया विकास का उदाहरण
युवाओं से बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने देश में बुनियादी ढांचे के विकास का उदाहरण देते हुए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट यानी JNPT मुंबई से डबल कंटेनर मालगाड़ी के जरिए एक बार में 250 से अधिक ट्रकों के बराबर माल मुंबई से वडोदरा पहुंचाया जा सकता है। इसी संदर्भ में उन्होंने उन लोगों पर व्यंग्य किया, जो यह सवाल उठा सकते हैं कि ऐसी व्यवस्था से ट्रक चालकों पर क्या असर पड़ेगा।
मोदी ने कहा कि देश के एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक माल को तेजी से पहुंचाने के लिए बेहतर कनेक्टिविटी जरूरी है। उनके मुताबिक, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क में सुधार देश की आर्थिक गतिविधियों और परिवहन व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है।
2004 में विचार, 2014 तक फाइलों में रहा प्रोजेक्ट: PM
प्रधानमंत्री ने डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि इस परियोजना पर 2004 में विचार शुरू हुआ था और 2006 में इसके लिए एक विशेष कंपनी बनाई गई थी। उन्होंने दावा किया कि 2014 तक यह परियोजना मुख्य रूप से फाइलों और प्रशासनिक प्रक्रिया में आगे बढ़ती रही।
मोदी के अनुसार, 2014 के बाद उनकी सरकार ने इस परियोजना को गति दी और लगभग 2,000 किलोमीटर डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का काम पूरा किया।
उन्होंने इसे बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में सरकार की प्राथमिकताओं और लंबे समय से लंबित परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के उदाहरण के रूप में पेश किया।
मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों के लिए अलग ट्रैक
प्रधानमंत्री ने रेलवे के पुराने संचालन मॉडल और मौजूदा व्यवस्था के बीच अंतर भी बताया। उन्होंने कहा कि पहले यात्री और मालगाड़ियां एक ही ट्रैक का इस्तेमाल करती थीं। इससे दोनों प्रकार की ट्रेनों की गति प्रभावित होती थी।
मोदी के मुताबिक, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर अब रोज करीब 430 मालगाड़ियां चल रही हैं। उन्होंने दावा किया कि ट्रक के जरिए सामान पहुंचाने में लगभग 30 घंटे लग सकते हैं, जबकि फ्रेट कॉरिडोर के जरिए यही माल करीब 10 घंटे में पहुंच सकता है।
प्रधानमंत्री ने इस उदाहरण के जरिए युवाओं को यह समझाने की कोशिश की कि आधुनिक परिवहन ढांचा देश की अर्थव्यवस्था में किस तरह समय और संसाधनों की बचत कर सकता है।
AI सुपरपावर बनने के लिए पूरे इकोसिस्टम पर जोर
प्रधानमंत्री ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के क्षेत्र में भारत की महत्वाकांक्षा का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यदि भारत को AI का सुपरपावर बनना है तो केवल तकनीक विकसित करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि इसके लिए पूरा इकोसिस्टम तैयार करना होगा।
उन्होंने यूरेनियम और रेयर अर्थ मटेरियल की उपलब्धता बढ़ाने के साथ युवाओं के स्किल ट्रेनिंग और स्किल अपग्रेडेशन को भी महत्वपूर्ण बताया।
मोदी ने कहा कि बदलती अर्थव्यवस्था में केवल डिग्री हासिल करना पर्याप्त नहीं है और युवाओं का ध्यान कौशल विकास पर भी होना चाहिए। AI, नई तकनीक और औद्योगिक बदलावों के दौर में रोजगार के लिए आवश्यक क्षमताओं को विकसित करने पर सरकार के जोर का उन्होंने उल्लेख किया।
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जुलाई से Gen-Z तक पहुंचने की कोशिश
प्रधानमंत्री का वडोदरा संवाद युवाओं तक सीधे पहुंचने की उनकी हालिया रणनीति की अगली कड़ी के रूप में सामने आया। उपलब्ध टाइमलाइन के अनुसार, 23 जुलाई को मोदी ने फ्रंट कैमरे से युवाओं को संबोधित करते हुए पहला सेल्फी वीडियो पोस्ट किया था। लगभग तीन मिनट के इस वीडियो में उन्होंने पेपर लीक को गंभीर समस्या बताया था।
24 जुलाई को उन्होंने दूसरा सेल्फी वीडियो पोस्ट कर युवाओं की प्रतिक्रिया और सुझावों के लिए धन्यवाद दिया। 31 जुलाई को उन्होंने वर्टिकल वीडियो के जरिए अनौपचारिक अंदाज में युवाओं से संवाद किया।
20 अगस्त को मोदी ने मंत्रियों से विश्वविद्यालयों में छात्रों के साथ एक दिन बिताने और सरकारी स्कूलों का दौरा करने को कहा था। इसके बाद 26 अगस्त को डेटा बीइंग्स के विश्लेषण का हवाला देते हुए बताया गया कि 20 जुलाई के बाद मोदी की प्रति इंस्टाग्राम पोस्ट औसत एंगेजमेंट 1.19 करोड़ से बढ़कर 4.63 करोड़ हो गई।
SRCC कार्यक्रम में भी दिखा Gen-Z अंदाज
5 सितंबर को श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के शताब्दी समारोह में भी प्रधानमंत्री ने युवाओं के बीच लोकप्रिय शब्दों का इस्तेमाल किया था। इनमें OG और Flex जैसे शब्द शामिल थे।
वडोदरा का कार्यक्रम इसी व्यापक प्रयास का हिस्सा नजर आया, जिसमें प्रधानमंत्री का संवाद पारंपरिक राजनीतिक भाषण की बजाय युवाओं की भाषा, डिजिटल संस्कृति और लोकप्रिय मनोरंजन के तत्वों के साथ प्रस्तुत किया गया।
युवा मतदाताओं पर बढ़ता राजनीतिक फोकस
भारत में युवा मतदाताओं की बड़ी संख्या राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण है। लोकसभा चुनाव 2024 में 18 से 29 वर्ष के मतदाताओं की 22.78 प्रतिशत हिस्सेदारी यह बताती है कि युवा वर्ग चुनावी राजनीति में प्रभावशाली समूह है।
ऐसे में राजनीतिक नेतृत्व का Gen-Z के साथ सीधा संवाद केवल सामाजिक या तकनीकी विषयों तक सीमित नहीं रहता। यह रोजगार, शिक्षा, कौशल, डिजिटल मीडिया, सूचना और राजनीतिक विमर्श जैसे मुद्दों से भी जुड़ता है।
वडोदरा में प्रधानमंत्री मोदी का संवाद इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण रहा। एक तरफ उन्होंने युवाओं को भ्रामक दावों और झूठी सूचनाओं से सावधान रहने का संदेश दिया, वहीं दूसरी तरफ रेलवे, फ्रेट कॉरिडोर, AI और स्किल डेवलपमेंट जैसे विकास से जुड़े विषयों को सामने रखा।
कार्यक्रम की रैंप एंट्री, लोकप्रिय संगीत और युवाओं के साथ सीधे संवाद ने इसे पारंपरिक राजनीतिक आयोजन से अलग रूप दिया। वहीं, राहुल गांधी और कांग्रेस के अभियान को लेकर माना जा रहा राजनीतिक तंज इस कार्यक्रम के राजनीतिक संदेश को भी रेखांकित करता है।








