पूर्व CJI बीआर गवई ने मुंबई यूनिवर्सिटी में कहा कि आरक्षण का लाभ केवल आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर वर्ग को मिलना चाहिए। क्रीमी लेयर सिद्धांत समाज में वास्तविक समान अवसर और न्याय सुनिश्चित करता है।
New Delhi: पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) बीआर गवई ने शनिवार को मुंबई यूनिवर्सिटी में एक भाषण के दौरान क्रीमी लेयर सिद्धांत का समर्थन किया। उन्होंने इस अवसर पर समान अवसर को बढ़ावा देने में सकारात्मक कदमों (Positive Steps) की भूमिका पर चर्चा की। गवई ने बताया कि उनके निर्णय और विचारों का उनके ही समुदाय से विरोध हुआ, क्योंकि उन्होंने कहा कि अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू होना चाहिए।
बाबासाहेब आंबेडकर के दृष्टिकोण से समझाया उदाहरण
बीआर गवई ने कहा कि डॉ. बीआर आंबेडकर ने सकारात्मक कार्रवाई को ऐसे देखा जैसे किसी पीछे रह गए व्यक्ति को साइकिल दी जाए। गवई ने उदाहरण दिया, 'मान लीजिए कोई व्यक्ति शून्य से शुरू करता है और कोई 10 किलोमीटर आगे है। पीछे रहने वाले व्यक्ति को साइकिल देने से वह तेजी से आगे बढ़ सकता है और बराबरी कर सकता है। आंबेडकर का दृष्टिकोण यही था कि पिछड़े व्यक्ति को अवसर मिले, लेकिन क्या उन्होंने यह कहा कि उस व्यक्ति को कभी आगे नहीं बढ़ना चाहिए? बिल्कुल नहीं।'
क्रीमी लेयर का तात्पर्य
पूर्व CJI ने क्रीमी लेयर सिद्धांत को समझाने के लिए कहा कि आरक्षण का लाभ केवल उन पिछड़े वर्ग के लोगों को मिलना चाहिए जो वास्तव में आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर हों। जिन पिछड़े समुदाय के सदस्य आर्थिक रूप से समृद्ध हैं, उन्हें आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए। गवई ने कहा, “यह सिद्धांत बाबासाहेब के सामाजिक और आर्थिक न्याय के दृष्टिकोण के अनुरूप है। इसका उद्देश्य समान अवसर देना और पिछड़े वर्ग के वास्तविक लाभार्थियों को फायदा पहुंचाना है।”
समुदाय से मिली आलोचना
बीआर गवई ने बताया कि इंद्रा साहनी बनाम भारत संघ (Indra Sawhney vs Union of India) और अन्य मामलों में उन्होंने क्रीमी लेयर को लागू करने का पक्ष रखा। इस विचार को लेकर उन्हें अपने ही समुदाय की ओर से व्यापक आलोचना का सामना करना पड़ा। लोगों ने आरोप लगाया कि गवई ने खुद सुप्रीम कोर्ट में जज बनने के लिए आरक्षण का लाभ उठाया, और अब क्रीमी लेयर लागू करने का समर्थन करके उन्हीं समुदाय के कुछ लोगों को बाहर करने का प्रस्ताव रखा।
पूर्व CJI ने कहा, 'लोग यह नहीं जानते थे कि हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के संवैधानिक पद के लिए कोई आरक्षण नहीं होता है। मेरे पद तक पहुंचने में मुझे आरक्षण का लाभ नहीं मिला था। फिर भी मेरे इस सुझाव को लेकर विवाद हुआ।'
बीआर गवई ने जोर देकर कहा कि सकारात्मक कदम का उद्देश्य केवल अवसर देना नहीं है, बल्कि समाज में वास्तविक न्याय और बराबरी लाना है। उन्होंने कहा कि आरक्षण का लाभ केवल कमजोर और पिछड़े वर्ग के लिए होना चाहिए। क्रीमी लेयर का सिद्धांत सुनिश्चित करता है कि जिनके पास पहले से संसाधन और सुविधा हैं, वे आरक्षण के तहत लाभ न लें।










