Prakash Raj on SIR: 23 अक्टूबर को कर्नाटक में निकलेगा 'जनता मार्च', प्रकाश राज ने किया विरोध प्रदर्शन का ऐलान

प्रकाश राज ने SIR के विरोध में 23 अक्टूबर को कर्नाटक में 'जनता मार्च' निकालने का ऐलान किया है। जानें इस विरोध प्रदर्शन की वजह और इससे जुड़ी पूरी जानकारी।

कर्नाटक में SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) के खिलाफ किसान और दलित संगठन भी एकजुट हो गए हैं। अभिनेता प्रकाश राज ने बेंगलुरु में इसका ऐलान करते हुए बताया कि 23 अक्टूबर को पूरे राज्य में जनता मार्च निकाला जाएगा।

Prakash Raj SIR Protest: अभिनेता प्रकाश राज ने कर्नाटक में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि 23 अक्टूबर 2026 को राज्य के सभी जिलों में 'जनता मार्च' निकाला जाएगा। इस विरोध प्रदर्शन में किसान और दलित संगठनों के शामिल होने की बात कही गई है। 

आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधियों ने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की मांग उठाई है। साथ ही, उन्होंने विरोध प्रदर्शन करने वाले युवाओं के खिलाफ की जा रही कार्रवाई पर भी सवाल खड़े किए हैं।

SIR के खिलाफ एकजुट हुए किसान और दलित संगठन

कर्नाटक में SIR को लेकर विरोध की गतिविधियां तेज होती नजर आ रही हैं। अभिनेता प्रकाश राज ने बेंगलुरु में आंदोलन से जुड़ी घोषणा करते हुए कहा कि 23 अक्टूबर को राज्य के प्रत्येक जिले में जनता मार्च आयोजित किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों की योजना दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले आंदोलनों की तर्ज पर विरोध प्रदर्शन करने की भी है।

इस अभियान में किसान और दलित संगठनों के प्रतिनिधियों ने एकजुट होकर हिस्सा लेने का फैसला किया है। उनका कहना है कि चुनाव आयोग की जिम्मेदारी मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए रखना है। ऐसे में SIR से संबंधित फैसलों और प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब दिया जाना चाहिए।

आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यशैली की आलोचना भी की। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के कुछ फैसले मनमाने हैं और संस्था की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करते हैं। हालांकि, ये प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाए गए आरोप हैं।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और युवाओं की गिरफ्तारी का मुद्दा

Prakash Raj on SIR: 23 अक्टूबर को कर्नाटक में निकलेगा 'जनता मार्च', प्रकाश राज ने किया विरोध प्रदर्शन का ऐलान

SIR विरोधी आंदोलन से जुड़े लोगों ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने वाले युवाओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। उनका दावा है कि दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों पर लगी पाबंदियों के कारण लोगों के लिए अपनी मांगें उठाना मुश्किल हो रहा है। प्रदर्शनकारियों ने जंतर-मंतर का उल्लेख करते हुए कहा कि यह लंबे समय से विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक आंदोलनों का प्रमुख केंद्र रहा है। उनके मुताबिक, विरोध प्रदर्शन पर प्रतिबंध और आंदोलनकारियों की गिरफ्तारी लोकतांत्रिक तरीके से असहमति व्यक्त करने के अधिकार को प्रभावित कर सकती है।

संगठनों ने महिला पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ कथित दुर्व्यवहार के मामलों को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि ऐसे मामलों में जवाबदेही तय होनी चाहिए। आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि तिरंगा लेकर प्रदर्शन करने वाले युवाओं के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है, जबकि कथित दुर्व्यवहार के मामलों में समान स्तर की जवाबदेही दिखाई नहीं देती। इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया और स्वतंत्र पुष्टि के आधार पर ही पूरे घटनाक्रम का आकलन किया जाना चाहिए।

प्रकाश राज ने सरकार और राजनीतिक व्यवस्था पर साधा निशाना

प्रकाश राज ने कहा कि युवाओं की आवाज दबाने की कोशिशों से आंदोलन कमजोर होने के बजाय और व्यापक हो सकता है। उन्होंने किसान संगठनों की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले भी किसानों ने अपने आंदोलन के जरिए केंद्र सरकार की नीतियों पर दबाव बनाया था। अब वही किसान SIR के खिलाफ विरोध में शामिल हो रहे हैं।

अभिनेता ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में लोगों को अपनी असहमति जाहिर करने और सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने का अधिकार है। उनके अनुसार, यदि शांतिपूर्ण प्रदर्शन को बल प्रयोग या सुरक्षा व्यवस्था के जरिए रोकने की कोशिश की जाती है, तो इससे जनता में नाराजगी बढ़ सकती है।

प्रकाश राज ने राजनीतिक बदलाव की संभावना पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जनता अपने मताधिकार के माध्यम से सरकारों के कामकाज पर फैसला कर सकती है। उन्होंने उत्तर प्रदेश में राजनीतिक बदलाव की शुरुआत होने और 2029 के आम चुनाव में केंद्र सरकार को चुनौती मिलने की बात कही। ये उनके राजनीतिक विचार और भविष्य को लेकर लगाए गए अनुमान हैं।

युवाओं पर कार्रवाई और गिरफ्तारियों पर उठाए सवाल

प्रकाश राज ने प्रदर्शनकारी युवाओं के खिलाफ कथित बल प्रयोग और गिरफ्तारियों को लेकर भी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने सवाल किया कि तिरंगा लेकर विरोध करने वाले युवाओं के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय उनकी शिकायतों और मांगों को क्यों नहीं सुना जा रहा है। उन्होंने सौरभ और आशुतोष की रिहाई की मांग का भी उल्लेख किया। 

साथ ही, न्यायाधीश को कथित तौर पर धमकी दिए जाने के मामले में संबंधित व्यक्ति की पहचान कर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की। उनके बयान का मुख्य जोर इस बात पर रहा कि किसी भी मामले में कार्रवाई तथ्यों और कानून के आधार पर होनी चाहिए।

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