Rajnath Singh ने गुरुवार को कहा कि भारत ने Operation Sindoor को अपनी शर्तों पर स्वेच्छा से रोका था और जरूरत पड़ने पर पाकिस्तान के खिलाफ लंबी लड़ाई के लिए पूरी तरह तैयार था।
नई दिल्ली: भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर एक बड़ा और महत्वपूर्ण खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि भारत उस समय पाकिस्तान के खिलाफ लंबी सैन्य कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार था, लेकिन ऑपरेशन को अपनी शर्तों पर स्वेच्छा से रोका गया था। यह बयान वैश्विक सुरक्षा और भारत की आतंकवाद विरोधी रणनीति को लेकर एक अहम संदेश माना जा रहा है।
एएनआई नेशनल सिक्योरिटी समिट 2.0 में बोलते हुए राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को “अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद का केंद्र” बताते हुए कहा कि आतंकवाद की जड़ों को पूरी तरह खत्म करना अब वैश्विक आवश्यकता बन चुकी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की नीति “जीरो टॉलरेंस टू टेररिज्म” पर आधारित है और किसी भी परिस्थिति में आतंकवाद को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
ऑपरेशन सिंदूर: आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई
ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में की गई थी, जिसमें 26 निर्दोष लोगों की जान गई थी। यह ऑपरेशन 7 मई 2025 को शुरू हुआ और इसका उद्देश्य सीमा पार सक्रिय आतंकी नेटवर्क को खत्म करना था। रक्षा मंत्री के अनुसार, इस अभियान के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में मौजूद आतंकी ठिकानों को सटीक तरीके से निशाना बनाया। इस कार्रवाई में लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे संगठनों के कई महत्वपूर्ण ठिकाने नष्ट किए गए।
राजनाथ सिंह ने अपने बयान में जोर देकर कहा कि ऑपरेशन सिंदूर को रोकना किसी कमजोरी या दबाव का परिणाम नहीं था, बल्कि यह एक रणनीतिक और स्वायत्त निर्णय था। उन्होंने कहा कि भारत किसी भी प्रकार की परमाणु धमकी या सैन्य दबाव से प्रभावित नहीं हुआ। उनके अनुसार, भारतीय सेना पूरी तरह सक्षम और तैयार थी कि यदि स्थिति बढ़ती, तो संघर्ष को लंबे समय तक जारी रखा जा सकता था। लेकिन सरकार ने स्थिति का आकलन करते हुए ऑपरेशन को नियंत्रित तरीके से समाप्त करने का निर्णय लिया।

पाकिस्तान पर गंभीर आरोप
रक्षा मंत्री ने पाकिस्तान पर एक बार फिर आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भारत को वैश्विक स्तर पर सूचना प्रौद्योगिकी (IT) के लिए जाना जाता है, जबकि पाकिस्तान की पहचान अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के केंद्र के रूप में बन चुकी है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद केवल सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा नहीं है, बल्कि इसके तीन महत्वपूर्ण पहलू हैं—ऑपरेशनल, वैचारिक और राजनीतिक। जब तक इन तीनों स्तरों पर एक साथ कार्रवाई नहीं की जाएगी, तब तक आतंकवाद को पूरी तरह खत्म करना संभव नहीं होगा।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान की ओर से ड्रोन हमलों और सीमा पार गोलाबारी की घटनाएं सामने आईं, जिसके चलते दोनों देशों के बीच चार दिनों तक तनावपूर्ण सैन्य स्थिति बनी रही। स्थिति बिगड़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मध्यस्थता और बातचीत के प्रयासों के बाद 10 मई 2025 को युद्धविराम पर सहमति बनी। इस समझौते के बाद दोनों देशों के बीच तत्काल सैन्य कार्रवाई रोक दी गई।
भारतीय सेना की क्षमता पर भरोसा
राजनाथ सिंह ने भारतीय सेना की क्षमता और तैयारी की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत की सैन्य ताकत पहले से कहीं अधिक मजबूत हुई है और जरूरत पड़ने पर तेजी से संसाधन जुटाने और कार्रवाई करने की क्षमता मौजूद है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत केवल शांति के समय ही नहीं, बल्कि युद्ध जैसी परिस्थितियों में भी प्रभावी ढंग से कार्य करने में सक्षम है।











