Presidential Reference मामला: क्या है विवाद और क्यों राष्ट्रपति ने सुप्रीम कोर्ट से पूछे 14 सवाल?

राष्ट्रपति ने सुप्रीम कोर्ट से Presidential Reference के तहत 14 संवैधानिक सवाल पूछे हैं। जानें मामला क्या है, विवाद की वजह और कोर्ट से अपेक्षित राय।

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में Presidential Reference मामले पर फैसला सुनाया। इस मामले में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सुप्रीम कोर्ट से 14 सवाल पूछे थे, जिनमें प्रमुख रूप से यह पूछा गया कि क्या अदालतें राज्यपालों और राष्ट्रपति के लिए विधायी मामलों में समय सीमा तय कर सकती हैं। 

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को प्रेसिडेंशियल रेफरेंस पर अपना फैसला सुनाया। इस मामले में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अदालत से यह स्पष्ट करने के लिए राय मांगी थी कि क्या कोई संवैधानिक अदालत राज्य विधानसभाओं से पारित विधेयकों को मंजूरी देने के लिए राष्ट्रपति और राज्यपालों के लिए समय सीमा निर्धारित कर सकती है।

यह फैसला अनुच्छेद 143 के अंतर्गत आया, जो भारत के संविधान में प्रेसिडेंशियल रेफरेंस की प्रक्रिया को परिभाषित करता है। इसके तहत राष्ट्रपति को अधिकार प्राप्त होता है कि वे किसी कानून, विधेयक या संवैधानिक मसले पर सर्वोच्च न्यायालय से सलाह या राय मांग सकते हैं। यह प्रक्रिया किसी भी संवैधानिक विवाद या महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न पर मार्गदर्शन लेने का औपचारिक तरीका है।

Presidential Reference क्या है?

आसान भाषा में समझें तो Presidential Reference एक विशेष प्रक्रिया है, जिसमें राष्ट्रपति किसी संवैधानिक या कानूनी मामले पर सर्वोच्च न्यायालय से राय मांगते हैं। यह प्रक्रिया तब अपनाई जाती है जब कोई मुद्दा देश या राज्यों के लिए महत्वपूर्ण हो और उस पर स्पष्ट कानूनी मार्गदर्शन की आवश्यकता हो।संविधान के अनुच्छेद 143 के तहत, राष्ट्रपति किसी भी कानून, विधेयक या संवैधानिक विवाद पर सुप्रीम कोर्ट से सलाह मांग सकते हैं। 

यह प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि संवैधानिक मामलों में राष्ट्रपति और राज्यपालों के फैसले संविधान के अनुरूप हों और किसी भी तरह का विवाद न्यायिक मार्ग से सुलझाया जा सके।

तमिलनाडु राज्यपाल विवाद से जुड़ा मामला

अनुच्छेद 143 राष्ट्रपति को यह अधिकार देता है कि वे देश के लिए महत्वपूर्ण मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट से राय ले सकते हैं। अनुच्छेद 143(2) के तहत, राष्ट्रपति कुछ विवादों को सुप्रीम कोर्ट के पास भेज सकते हैं, जो अनुच्छेद 131 के मूल अधिकार क्षेत्र में नहीं आते। इसका उद्देश्य केंद्र और राज्यों के बीच संवैधानिक विवादों को स्पष्ट रूप से सुलझाना है।

Presidential Reference मामला: क्या है विवाद और क्यों राष्ट्रपति ने सुप्रीम कोर्ट से पूछे 14 सवाल?

इस Presidential Reference का आरंभ तमिलनाडु सरकार बनाम राज्यपाल आर.एन. रवि के विवाद से हुआ। अप्रैल 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि राज्यपाल को सदन से पारित विधेयकों को राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजते समय अधिकतम तीन महीने की अवधि में निर्णय लेना होगा। न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति महादेवन की पीठ ने कहा कि यह सीमा विधायी प्रक्रिया को तेज करने और संवैधानिक जिम्मेदारियों को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।

इस फैसले के बाद राष्ट्रपति ने चिंता जताई कि इस सीमा से संवैधानिक विवेक का उल्लंघन हो सकता है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से 14 सवालों पर सलाह मांगी कि क्या राज्यपाल और राष्ट्रपति अनिश्चित काल तक विधेयकों को रोक सकते हैं या नहीं।

राष्ट्रपति के 14 सवाल

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सुप्रीम कोर्ट से जिन 14 सवालों पर राय मांगी, उनमें प्रमुख हैं:

  1. राज्यपाल के पास अनुच्छेद 200 के तहत कौन-कौन से विकल्प हैं?
  2. क्या राज्यपाल को मंत्रिपरिषद की सलाह लेना आवश्यक है?
  3. अनुच्छेद 200 के तहत राज्यपाल के फैसलों की न्यायिक समीक्षा की जा सकती है?
  4. अनुच्छेद 361 राज्यपाल के निर्णयों की न्यायिक समीक्षा को रोकता है क्या?
  5. अगर संविधान में राज्यपाल के फैसले लेने का समय और तरीका निर्धारित नहीं है, तो क्या अदालत समय और तरीका तय कर सकती है?
  6. राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 201 के तहत लिए गए फैसलों की न्यायिक समीक्षा संभव है या नहीं?
  7. अदालत राष्ट्रपति के लिए निर्णय लेने की समय सीमा निर्धारित कर सकती है या नहीं?
  8. विधेयक राष्ट्रपति को भेजने से पहले क्या सुप्रीम कोर्ट की सलाह आवश्यक है?
  9. अनुच्छेद 200 और 201 के तहत लिए गए निर्णयों की समीक्षा विधेयक बनने से पहले हो सकती है या नहीं?
  10. अनुच्छेद 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट राष्ट्रपति या राज्यपाल की संवैधानिक शक्तियों को प्रतिस्थापित कर सकता है या नहीं?
  11. क्या राज्य विधानसभा द्वारा पारित कोई विधेयक बिना राज्यपाल की मंजूरी के कानून माना जा सकता है?
  12. सुप्रीम कोर्ट की पीठ की न्यूनतम संख्या संविधान के अनुच्छेद 145(3) के तहत कितनी हो?
  13. अनुच्छेद 142 केवल प्रक्रिया संबंधी है या सामग्री को भी प्रभावित कर सकता है?
  14. क्या सुप्रीम कोर्ट अनुच्छेद 131 के मूल अधिकार क्षेत्र के बाहर केंद्र और राज्यों के विवादों को सुलझा सकता है?

इस Presidential Reference का महत्व केवल तमिलनाडु तक सीमित नहीं है। यह पूरे भारत में राज्यपाल और राष्ट्रपति की संवैधानिक भूमिका और विधायी प्रक्रिया में न्यायालय की सीमा को स्पष्ट करने वाला मामला है। कोर्ट का फैसला भारत में केंद्र और राज्यों के बीच संवैधानिक संबंधों की दिशा तय करेगा।

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