Priyanka Chaturvedi on Trump: रूसी डीजल डील पर प्रियंका चतुर्वेदी का तंज, भारत पर 100% टैरिफ को लेकर उठाए सवाल

Priyanka Chaturvedi on Trump: रूसी डीजल डील को लेकर प्रियंका चतुर्वेदी ने ट्रंप पर तंज कसा। भारत पर 100% टैरिफ लगाने के मुद्दे पर उन्होंने सवाल उठाए। जानें

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रूस से डीजल खरीदने को लेकर हुए कथित समझौते पर विवाद खड़ा हो गया है। इस फैसले के बाद अमेरिका पर दोहरे मानदंड अपनाने के आरोप लगाए जा रहे हैं।

नई दिल्ली: शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रूस से ईंधन खरीदने से जुड़ी कथित घोषणा पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने अमेरिका की ऊर्जा और व्यापार नीति में विरोधाभास का मुद्दा उठाते हुए कहा कि एक ओर भारत जैसे देशों पर रूसी तेल खरीदने को लेकर भारी टैरिफ लगाने की बात की जाती है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका खुद रूस से डीजल की आपूर्ति को लेकर समझौते की घोषणा कर रहा है। 

प्रियंका चतुर्वेदी ने इस स्थिति पर तंज कसते हुए कहा कि “पॉलिसी अपना काम नहीं कर रही है।” उनके बयान के बाद भारत पर अमेरिकी टैरिफ और रूस के साथ अमेरिका के ऊर्जा संबंधों को लेकर बहस तेज हो गई है।

प्रियंका चतुर्वेदी ने ट्रंप पर क्या कहा?

प्रियंका चतुर्वेदी ने ट्रंप की रूस से डीजल खरीद से संबंधित पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिकी प्रशासन की नीति पर सवाल उठाया। उन्होंने अपने बयान में अमेरिका को रूसी डीजल मिलने और भारत पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाए जाने के मुद्दे को उठाया। उनकी टिप्पणी का मुख्य संदेश यह था कि अगर रूस से ऊर्जा खरीदना किसी देश के खिलाफ व्यापारिक कार्रवाई का आधार बनता है, तो अमेरिका के अपने फैसलों को भी उसी कसौटी पर परखा जाना चाहिए। उन्होंने ट्रंप के रुख को विरोधाभासी बताते हुए पूछा कि अलग-अलग देशों के लिए अलग मानदंड क्यों अपनाए जा रहे हैं।

यह मुद्दा इसलिए भी अहम है, क्योंकि रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों ने रूस की अर्थव्यवस्था पर दबाव बनाने के लिए कई तरह के प्रतिबंध लगाए हैं। इसके बावजूद वैश्विक ऊर्जा बाजार में रूस की भूमिका बनी हुई है और कई देश अपनी ऊर्जा जरूरतों, कीमतों तथा आपूर्ति की उपलब्धता के आधार पर फैसले लेते हैं।

रूस से डीजल खरीद को लेकर क्या है विवाद?

खबर में दिए गए विवरण के मुताबिक, ट्रंप ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत के बाद रूसी डीजल की आपूर्ति को लेकर घोषणा की। इसमें अमेरिकी और वैश्विक बाजारों के लिए बड़ी मात्रा में डीजल उपलब्ध कराने की बात कही गई। साथ ही, अमेरिकी वित्त मंत्रालय की ओर से रूसी डीजल से जुड़े कुछ लेनदेन पर प्रतिबंधों में अस्थायी राहत दिए जाने का भी उल्लेख है।

हालांकि, आपूर्ति की मात्रा, समझौते की शर्तों और प्रतिबंधों में छूट के दायरे की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि महत्वपूर्ण है। इन विवरणों के स्पष्ट होने के बाद ही यह तय किया जा सकेगा कि घोषणा का वैश्विक ईंधन बाजार पर कितना असर पड़ेगा।

रूस ऊर्जा संसाधनों का प्रमुख उत्पादक है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में डीजल की उपलब्धता और कीमतों में बदलाव का असर परिवहन, उद्योग, कृषि और महंगाई पर पड़ सकता है। ऐसे में अमेरिका जैसे बड़े उपभोक्ता बाजार से जुड़ा कोई भी फैसला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन सकता है।

भारत पर 100 फीसदी टैरिफ का मुद्दा क्यों उठा?

प्रियंका चतुर्वेदी ने अपनी प्रतिक्रिया में भारत पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने की नीति का भी जिक्र किया। खबर में दिए गए विवरण के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की संभावना से जुड़ी पहल की थी। भारत लंबे समय से अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अलग-अलग देशों से कच्चा तेल खरीदता रहा है। रूस से तेल की खरीद भी कीमत, उपलब्धता और घरेलू मांग जैसे कारकों से जुड़ी रही है। भारत का पक्ष रहा है कि ऊर्जा खरीद से जुड़े फैसले राष्ट्रीय हित और उपभोक्ताओं की जरूरतों को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं।

यदि अमेरिका एक तरफ रूस से ईंधन लेने की व्यवस्था करता है और दूसरी तरफ अन्य देशों पर रूसी ऊर्जा खरीदने के कारण अतिरिक्त शुल्क लगाने की नीति अपनाता है, तो इससे समान नियमों और व्यापारिक निष्पक्षता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि, किसी भी टैरिफ की वास्तविक स्थिति उसके आधिकारिक आदेश, लागू होने की तारीख और संबंधित देशों पर लागू शर्तों से तय होती है।

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