RBI का रुपये को संभालने के लिए बड़ा कदम, डॉलर के मुकाबले गिरावट रोकने हेतु बदले फॉरेक्स नियम

RBI Forex Rules: डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरावट थामने के लिए रिजर्व बैंक ने फॉरेक्स नियमों में बदलाव किया है। जानें नए नियमों का क्या असर होगा, रुपये की चाल और

कमजोर होते रुपये को संभालने और करेंसी बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सख्त कदम उठाए हैं। केंद्रीय बैंक ने रुपये से जुड़े विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों के नियमों में बदलाव किया है।

बिजनेस न्यूज़: भारतीय रुपये पर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले बढ़ते दबाव के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मुद्रा बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। केंद्रीय बैंक ने विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों से जुड़े नियमों को सख्त करने के साथ सरकारी तेल कंपनियों की डॉलर संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए विशेष व्यवस्था करने का फैसला किया है। इन उपायों का उद्देश्य रुपये की अस्थिरता को कम करना और विदेशी मुद्रा बाजार में सट्टेबाजी से पैदा होने वाले अतिरिक्त दबाव को सीमित करना है।

रुपये में कमजोरी का असर भारत के आयात बिल, कच्चे तेल की लागत और महंगाई पर पड़ सकता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, जिसके लिए डॉलर में भुगतान करना पड़ता है। ऐसे में रुपये की विनिमय दर में गिरावट से तेल कंपनियों सहित कई आयातकों की लागत बढ़ सकती है। RBI के हालिया फैसलों को इसी दबाव को नियंत्रित करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

विदेशी मुद्रा बाजार में RBI ने क्यों सख्त किए नियम?

रुपये को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच RBI ने रुपये से जुड़े विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों की दोबारा बुकिंग पर प्रतिबंध लगाने सहित कई बदलाव किए हैं। नए निर्देशों के मुताबिक, रद्द किए गए रुपये से संबंधित फॉरेक्स डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट को अधिकृत डीलर के माध्यम से दोबारा बुक करने की अनुमति नहीं होगी। हालांकि, निर्धारित नियमों के तहत कॉन्ट्रैक्ट की अवधि बढ़ाने यानी रोलओवर की सुविधा जारी रहेगी।

इस कदम का उद्देश्य विदेशी मुद्रा बाजार में एक ही जोखिम से जुड़े सौदों को बार-बार बुक करने की गुंजाइश कम करना है। इससे बाजार में अनावश्यक गतिविधियों और रुपये की विनिमय दर पर पड़ने वाले अतिरिक्त दबाव को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

RBI ने वास्तविक कारोबारी जरूरत या अंतर्निहित विदेशी मुद्रा जोखिम के बिना किए जाने वाले कुछ डेरिवेटिव सौदों की सीमा भी घटाई है। पहले यह सीमा 100 मिलियन डॉलर के बराबर थी, जिसे घटाकर 5 मिलियन डॉलर कर दिया गया है। यह बदलाव एक्सचेंज पर कारोबार होने वाले रुपये से जुड़े करेंसी डेरिवेटिव सौदों पर भी लागू होगा।

2 मिलियन डॉलर से बड़े सौदों पर नया रिजर्व नियम

केंद्रीय बैंक ने कुछ पात्र विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों के लिए फॉरेन एक्सचेंज रिस्क रिजर्व (FERR) की व्यवस्था भी लागू की है। इसके तहत 2 मिलियन डॉलर से अधिक के निर्धारित रुपये-संबंधी सौदों पर अधिकृत डीलरों को संबंधित सौदे की रुपये में गणना की गई कुल राशि का 20 प्रतिशत नकद रिजर्व के रूप में RBI के पास रखना होगा।

यह प्रावधान उन पात्र सौदों पर लागू होगा, जिनमें ग्राहक रुपये देकर विदेशी मुद्रा खरीदता है और चालू खाते से जुड़े वास्तविक विदेशी मुद्रा जोखिम को हेज करता है। इसका उद्देश्य ऐसे सौदों से जुड़े जोखिम को बेहतर ढंग से नियंत्रित करना है।

इसके अतिरिक्त, बैंकों और अधिकृत डीलरों को ग्राहकों से लिखित पुष्टि लेनी होगी कि समान कारोबारी जोखिम की हेजिंग किसी अन्य अधिकृत डीलर के माध्यम से नहीं की गई है। इससे एक ही जोखिम के लिए कई जगह हेजिंग किए जाने की संभावना कम करने में मदद मिल सकती है।

सरकारी तेल कंपनियों के लिए खुलेगी विशेष डॉलर व्यवस्था

RBI के फैसलों में सरकारी तेल विपणन कंपनियों की विदेशी मुद्रा जरूरतों को पूरा करने की व्यवस्था भी शामिल है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 12 अक्टूबर से इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम की दैनिक डॉलर जरूरतों को सीधे पूरा करने की विशेष व्यवस्था की जाएगी।

इन कंपनियों को विदेशों से कच्चा तेल खरीदने के लिए बड़ी मात्रा में डॉलर की जरूरत होती है। सामान्य परिस्थितियों में डॉलर खरीदने के लिए उनकी मांग विदेशी मुद्रा बाजार पर दबाव बढ़ा सकती है। यदि उनकी जरूरतों का एक हिस्सा सीधे RBI की व्यवस्था के माध्यम से पूरा होता है, तो खुले बाजार में डॉलर की मांग घट सकती है।

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