प्रियंका चतुर्वेदी का अलग रुख: महिला आरक्षण विधेयक पर बयान से सियासी हलचल तेज

Priyanka Chaturvedi के महिला आरक्षण विधेयक पर दिए बयान से सियासी हलचल तेज हो गई है। Women Reservation Bill को लेकर उनकी टिप्पणी पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं बढ़

Priyanka Chaturvedi, जो Shiv Sena (UBT) की नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद हैं, ने लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक के पारित न हो पाने पर अपनी ही पार्टी के रुख से अलग प्रतिक्रिया दी है।

नई दिल्ली: शिवसेना (यूबीटी) की वरिष्ठ नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पर अपनी पार्टी के रुख से अलग बयान देकर राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। लोकसभा में यह विधेयक पारित नहीं हो सका, जिस पर उन्होंने खुलकर निराशा जताई और इसे देश की महिलाओं के लिए “दुखद दिन” बताया।

उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब उनका राज्यसभा कार्यकाल हाल ही में समाप्त हुआ है, जिससे उनके राजनीतिक इरादों को लेकर भी अटकलें तेज हो गई हैं।

महिला आरक्षण विधेयक पर क्या बोलीं प्रियंका चतुर्वेदी?

प्रियंका चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि यह उन भारतीय महिलाओं के लिए निराशाजनक दिन है, जो संसद और विधानसभाओं में अपनी भागीदारी बढ़ते हुए देखना चाहती थीं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि महिला आरक्षण पर उनका रुख पहले से ही स्पष्ट रहा है और वह भविष्य में भी इसे लेकर अपनी राय खुलकर रखती रहेंगी।

शिवसेना (यूबीटी) के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने इस विधेयक का विरोध किया था। पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी केंद्र सरकार से महिला आरक्षण कानून को तुरंत लागू करने के साथ-साथ परिसीमन प्रक्रिया को स्थगित करने की मांग की थी। ऐसे में प्रियंका चतुर्वेदी का यह बयान पार्टी के आधिकारिक रुख से अलग माना जा रहा है, जिससे यह संकेत मिलता है कि पार्टी के भीतर भी इस मुद्दे पर मतभेद हो सकते हैं।

सोशल मीडिया पर ‘राज्यसभा’ को लेकर चर्चा

उनके बयान के बाद सोशल मीडिया पर यूजर्स ने उनकी मंशा को लेकर सवाल उठाए। कुछ लोगों ने तंज कसते हुए कहा कि वह राज्यसभा में दोबारा जाने की “बैटिंग” कर रही हैं। इस पर प्रियंका चतुर्वेदी ने हल्के-फुल्के अंदाज में जवाब देते हुए कहा कि क्या सवाल करने वाला उनका “बैटिंग कोच” है। आगे बातचीत में उन्होंने खुद को “ऑलराउंडर” बताते हुए टिप्पणी की, जिससे यह चर्चा और तेज हो गई।

‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक, 2026’ को पारित करने के लिए लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता थी। मतदान के दौरान 528 सांसदों ने हिस्सा लिया, जिसमें 298 ने समर्थन किया और 230 ने विरोध में वोट दिया। हालांकि यह संख्या आवश्यक 352 वोटों से कम रही, जिसके कारण विधेयक पारित नहीं हो सका। इस विधेयक का उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण सुनिश्चित करना था।

सरकार और विपक्ष आमने-सामने

केंद्र सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि विपक्ष ने महिलाओं को अधिकार और प्रतिनिधित्व देने का ऐतिहासिक अवसर गंवा दिया।वहीं विपक्षी दलों का कहना था कि यह विधेयक संविधान की मूल संरचना को प्रभावित करता है और इसमें कई व्यावहारिक समस्याएं हैं, जिन्हें नजरअंदाज किया गया।

महिला आरक्षण विधेयक के पारित न होने के बाद, इससे जुड़े अन्य महत्वपूर्ण विधेयक—जैसे ‘परिसीमन विधेयक, 2026’ और ‘संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026’—को भी आगे नहीं बढ़ाया जा सका।

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