पटना-इंदौर एक्सप्रेस में वन्यजीव तस्करी का पर्दाफाश, 311 जीवित कछुओं के साथ अटेंडेंट पकड़ा

पटना–इंदौर एक्सप्रेस से 311 जीवित कछुए बरामद। आरोपी अटेंडेंट गिरफ्तार। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत मामला दर्ज।

पटना-इंदौर एक्सप्रेस के एच-1 कोच में तैनात अटेंडेंट से 311 जीवित कछुए बरामद किए गए। कछुए संरक्षित प्रजाति के हैं। आरोपी के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।

Madhya Pradesh: रेलवे से प्रतिबंधित वन्यजीवों की तस्करी का एक गंभीर मामला सामने आया है। 3 फरवरी 2026 को पटना–इंदौर एक्सप्रेस (गाड़ी संख्या 19322) की नियमित जांच के दौरान रेलवे सुरक्षा बल को बड़ी सफलता मिली। ट्रेन के एच-1 कोच में कार्यरत अटेंडेंट अजय सिंह राजपूत पर संदेह होने पर उसकी तलाशी ली गई।

आरपीएफ पोस्ट प्रभारी जसराम गूज के निर्देश पर सहायक उप निरीक्षक हेमंत कुमार राजपूत और आर. जॉनी कुमार ने अटेंडेंट के पास मौजूद दो बैगों की जांच की। बैग खोलते ही अधिकारी भी हैरान रह गए, क्योंकि उनमें बड़ी संख्या में छोटे-छोटे जीवित कछुए पाए गए।

दो बैगों से मिले 311 जीवित कछुए

पटना-इंदौर एक्सप्रेस में वन्यजीव तस्करी का पर्दाफाश, 311 जीवित कछुओं के साथ अटेंडेंट पकड़ा

जांच के समय दोनों बैगों से 311 जीवित कछुए बरामद किए गए। प्राथमिक तौर पर यह मामला निषिद्ध वन्यजीवों के गैरकानूनी परिवहन से जुड़ा हुआ लग रहा है। इसके चलते अटेंडेंट को तुरंत ट्रेन से उतारकर आरपीएफ पोस्ट संत हिरदाराम नगर ले जाया गया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए रेलवे सुरक्षा बल ने तुरंत वन विभाग भोपाल को सूचना दी। सूचना मिलते ही वन विभाग के एसडीओ विनोद सिंह अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और कछुओं की जांच की।

वन विभाग ने संभाला मामला

वन विभाग की जांच में बरामद कछुओं की प्रजाति इंडियन टेंट टर्टल पाई गई। यह प्रजाति वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षित है और इसके शिकार या तस्करी पर सख्त प्रतिबंध है। इसके बाद आरोपी अटेंडेंट को 311 कछुओं सहित वन विभाग के सुपुर्द कर दिया गया। वन विभाग ने आरोपी के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 273/23 के तहत मामला दर्ज कर लिया है।

बरामद किए गए सभी कछुओं को सुरक्षित रूप से वन विभाग की निगरानी में रखा गया है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की गहराई से जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कछुओं की तस्करी कहां से की जा रही थी और इन्हें कहां पहुंचाया जाना था।

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