पूर्णागिरि मार्ग पर बाढ़ से फंसे हजारों श्रद्धालु, तीन घंटे के रेस्क्यू में सभी सुरक्षित निकाले गए

टनकपुर के बाटनागाड़ क्षेत्र में बाढ़ से फंसे करीब 4 हजार पूर्णागिरि श्रद्धालुओं को पुलिस और प्रशासन ने तीन घंटे के रेस्क्यू अभियान में सुरक्षित निकाला।

टनकपुर के बाटनागाड़ क्षेत्र में अचानक बाढ़ आने से पूर्णागिरि धाम जा रहे करीब चार हजार श्रद्धालु फंस गए। पुलिस, प्रशासन और मेला अधिकारियों ने संयुक्त अभियान चलाकर सभी श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

टनकपुर: उत्तराखंड के टनकपुर क्षेत्र में पूर्णागिरि माता के दर्शन के लिए जा रहे हजारों श्रद्धालु उस समय मुश्किल में पड़ गए जब बाटनागाड़ क्षेत्र में अचानक जलस्तर बढ़ने से रास्ता बाधित हो गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। करीब तीन घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सभी श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया।

अचानक बढ़े जलस्तर से रुकी श्रद्धालुओं की यात्रा

पूर्णागिरि धाम उत्तर भारत के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है, जहां हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। रविवार को भी हजारों श्रद्धालु माता पूर्णागिरि के दर्शन के लिए यात्रा कर रहे थे। इसी दौरान टनकपुर के बाटनागाड़ क्षेत्र में अचानक पानी का बहाव बढ़ गया और बाढ़ जैसी स्थिति बन गई।

पूर्णागिरि मार्ग पर बाढ़ से फंसे हजारों श्रद्धालु, तीन घंटे के रेस्क्यू में सभी सुरक्षित निकाले गए

तेज बहाव के कारण यात्रा मार्ग प्रभावित हो गया और आगे बढ़ रहे श्रद्धालुओं का एक बड़ा समूह रास्ते में ही फंस गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, लगभग तीन से चार हजार श्रद्धालु इस स्थिति से प्रभावित हुए। जलस्तर बढ़ने के कारण लोगों में चिंता का माहौल बन गया और कई श्रद्धालु सुरक्षित स्थानों पर रुककर सहायता का इंतजार करने लगे।

सूचना मिलते ही सक्रिय हुआ प्रशासन

घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस विभाग और मेला प्रशासन तुरंत हरकत में आ गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राहत एवं बचाव दलों को मौके पर भेजा गया। ठुलीगाड़ चौकी प्रभारी हरीश और बूम चौकी प्रभारी संदीप पिलख्वाल अपनी टीमों के साथ घटनास्थल पर पहुंचे।

मेला मजिस्ट्रेट ने भी मौके पर पहुंचकर राहत कार्यों की निगरानी की। अधिकारियों ने सबसे पहले प्रभावित क्षेत्र का आकलन किया और फिर श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकालने की योजना बनाई। चूंकि मौके पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे, इसलिए बचाव अभियान को चरणबद्ध तरीके से संचालित किया गया।

तीन घंटे तक चला राहत एवं बचाव अभियान

पुलिस और प्रशासन की टीमों ने करीब तीन घंटे तक लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। इस दौरान श्रद्धालुओं को छोटे-छोटे समूहों में सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया। तेज बहाव वाले हिस्सों में अतिरिक्त सतर्कता बरती गई ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना न हो।

बचाव दल ने महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को प्राथमिकता देते हुए उन्हें पहले सुरक्षित निकाला। इसके बाद अन्य श्रद्धालुओं को भी सुरक्षित मार्ग से पार कराया गया। अधिकारियों के अनुसार, अभियान के दौरान सभी श्रद्धालुओं को बिना किसी बड़े हादसे के सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

सुरक्षित निकाले जाने के बाद आगे बढ़ी यात्रा

रेस्क्यू अभियान पूरा होने के बाद श्रद्धालुओं ने राहत की सांस ली। सुरक्षित निकाले गए लोगों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई गई और हालात सामान्य होने के बाद उन्हें आगे की यात्रा के लिए रवाना किया गया। प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि यात्रा मार्ग पर दोबारा कोई जोखिम न रहे।

मौसम को लेकर प्रशासन ने जारी की अपील

घटना के बाद प्रशासन ने श्रद्धालुओं से मौसम की जानकारी लेकर ही यात्रा करने की अपील की है। अधिकारियों ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम तेजी से बदल सकता है, जिससे अचानक जलस्तर बढ़ने या अन्य प्राकृतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

प्रशासन ने यह भी बताया कि यात्रा मार्गों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पुलिस तथा राहत दलों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। फिलहाल क्षेत्र में स्थिति सामान्य बताई जा रही है और यात्रा सुचारु रूप से जारी है।

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