रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने रूसी जहाजों पर हमलों और नॉर्वे द्वारा रिसर्च जहाज प्रोफेसर मोलचानोव को हिरासत में लेने पर नाराजगी जताई। उन्होंने कार्रवाई को ‘आतंकवाद’ बताते हुए चेतावनी दी कि इससे रूस-यूक्रेन शांति वार्ता और मुश्किल होगी।
मॉस्को: रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच समुद्री क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने रूसी नागरिक और कारोबारी जहाजों को निशाना बनाए जाने तथा उन्हें जब्त किए जाने की कार्रवाई को ‘आतंकवाद’ बताया। पुतिन ने कहा कि ऐसी घटनाओं से रूस और यूक्रेन के बीच शांति वार्ता का रास्ता और कठिन हो सकता है। उन्होंने नॉर्वे द्वारा रूसी रिसर्च जहाज प्रोफेसर मोलचानोव को हिरासत में लिए जाने पर भी नाराजगी जताई।
नॉर्वे ने यूक्रेन की मांग पर रूसी जहाज को हिरासत में लिया
नॉर्वे ने यूक्रेन की सरकारी कंपनी नाफ्टोगाज की मांग पर रूसी रिसर्च जहाज प्रोफेसर मोलचानोव को हिरासत में लिया था। उस समय जहाज स्वालबार्ड के बारेंट्सबर्ग क्षेत्र में खड़ा था।
प्रोफेसर मोलचानोव रूस का सरकारी रिसर्च जहाज है। इसमें वैज्ञानिकों और शोध से जुड़े कर्मचारियों के अलावा उनके परिवारों तथा पर्यटकों के भी सफर करने की जानकारी दी गई है। यह जहाज स्वालबार्ड में स्थित रूसी बस्तियों के लिए जरूरी सामान पहुंचाने में भी इस्तेमाल होता है।
नॉर्वे की कार्रवाई समुद्री प्रतिबंधों के उल्लंघन के आरोप पर आधारित नहीं थी। इसके पीछे एक पुराने मुआवजा विवाद का मामला बताया गया है, जिसका संबंध क्रीमिया और नाफ्टोगाज की संपत्तियों से है।
क्रीमिया की संपत्तियों से जुड़ा है विवाद
2014 में रूस द्वारा क्रीमिया पर कब्जे के बाद वहां मौजूद नाफ्टोगाज की संपत्तियों पर रूस ने नियंत्रण कर लिया था। इसके बाद यूक्रेन की सरकारी कंपनी ने रूस से मुआवजे की मांग की।
इस विवाद में 2023 में हेग की एक अंतरराष्ट्रीय अदालत ने रूस को नाफ्टोगाज को करीब 4.22 अरब डॉलर का भुगतान करने का आदेश दिया था। रूस ने अब तक यह रकम नहीं चुकाई है।
इसी पृष्ठभूमि में नाफ्टोगाज ने नॉर्वे से रूसी जहाज को हिरासत में लेने की मांग की थी। जहाज की हिरासत को लेकर रूस ने आपत्ति जताई है और इसे व्यापक समुद्री तनाव से जोड़कर देखा जा रहा है।
पुतिन का दावा- 40 दिनों में 100 रूसी जहाजों पर हमले
पुतिन ने कहा कि रूस की नाराजगी केवल नॉर्वे की ओर से एक जहाज को हिरासत में लिए जाने तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक, यूक्रेन अब समुद्र में रूसी नागरिक जहाजों को भी सीधे निशाना बना रहा है।
रूसी राष्ट्रपति ने दावा किया कि पिछले करीब 40 दिनों में लगभग 100 रूसी व्यापारिक जहाजों पर हमले किए गए। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं में रूसी और विदेशी नाविकों की भी मौत हुई है।
हालांकि, ये आंकड़े और दावे पुतिन की ओर से दिए गए हैं। स्वतंत्र रूप से इन सभी घटनाओं और आंकड़ों की पुष्टि इस रिपोर्ट में उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं हुई है।
पुतिन ने चेतावनी दी कि रूस समुद्र में रूसी जहाजों को निशाना बनाए जाने का जवाब देने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि रूस दुनिया के किसी भी हिस्से में जवाबी कार्रवाई करने की क्षमता रखता है।
‘जहाजों पर हमले से शांति का रास्ता मुश्किल होगा’
रूसी राष्ट्रपति ने समुद्री जहाजों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं को रूस-यूक्रेन युद्ध के व्यापक संदर्भ में रखा। उनका कहना है कि इस तरह की कार्रवाई से दोनों देशों के बीच संभावित शांति समझौते की प्रक्रिया और जटिल हो सकती है।
रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध खत्म करने के लिए कई स्तरों पर कूटनीतिक प्रयास चल चुके हैं, लेकिन क्षेत्रीय नियंत्रण, सुरक्षा और अन्य मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच मतभेद बने हुए हैं।
समुद्री मार्गों पर बढ़ता तनाव इस संघर्ष के दायरे को और व्यापक कर सकता है। इससे व्यापारिक जहाजों, नाविकों और रणनीतिक समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ रही है।
अमेरिका से बातचीत का रास्ता खुला रखने के संकेत
यूक्रेन के साथ शांति वार्ता को लेकर मुश्किलों के बावजूद पुतिन ने अमेरिका के साथ बातचीत जारी रखने की इच्छा जाहिर की है। उन्होंने कहा कि रूस और अमेरिका के बीच संपर्क बना हुआ है और मॉस्को दोनों देशों के संबंधों को फिर सामान्य करना चाहता है।
हालांकि, पुतिन ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंध सुधारने के लिए केवल रूस की इच्छा पर्याप्त नहीं है। उनके अनुसार, अमेरिका को भी इस दिशा में कदम उठाने के लिए तैयार होना होगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के रुख के बारे में पुतिन ने कहा कि उनकी समझ के अनुसार ट्रम्प सकारात्मक बातचीत के पक्ष में हैं।
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रूस-अमेरिका खुफिया संपर्क भी जारी
पुतिन ने बताया कि रूस और अमेरिका की खुफिया एजेंसियों के बीच संपर्क जारी है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति के दूत भी मॉस्को के संपर्क में हैं।
इसी बीच पिछले सप्ताह CIA प्रमुख जॉन रैटक्लिफ ने मॉस्को में रूस के खुफिया अधिकारियों से मुलाकात की थी। दोनों देशों की ओर से इस बैठक में हुई बातचीत का विस्तृत विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है।
रैटक्लिफ की मॉस्को यात्रा को भी दोनों देशों के बीच जारी संपर्क के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, इससे रूस-यूक्रेन युद्ध के समाधान की दिशा में तत्काल किसी बड़े समझौते का संकेत नहीं मिलता।
पुतिन ने नई सैन्य लामबंदी की खबरों को खारिज किया
रूस में नई अनिवार्य सैन्य भर्ती या व्यापक लामबंदी की अटकलों को भी पुतिन ने खारिज किया। व्लादिवोस्तोक में ईस्टर्न इकोनॉमिक फोरम के दौरान उन्होंने कहा कि फिलहाल रूस को नई लामबंदी की जरूरत नहीं है।
पुतिन ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में ऐसी कोई स्थिति नहीं है, जिसके कारण देश को नए स्तर पर सैनिकों की लामबंदी करनी पड़े।
उन्होंने नई लामबंदी से जुड़ी खबरों को दुष्प्रचार अभियान बताया। पुतिन के मुताबिक, यह अभियान रूस के निचले सदन स्टेट ड्यूमा के चुनाव से पहले चलाया जा रहा है और इसका उद्देश्य चुनावी परिणामों को प्रभावित करना हो सकता है।
‘लोग स्वेच्छा से सेना में शामिल हो रहे हैं’
पुतिन ने कहा कि रूस में लोग अपनी इच्छा से सेना में शामिल हो रहे हैं और सैन्य सेवा के लिए अनुबंध पर हस्ताक्षर कर रहे हैं। उनके मुताबिक, मौजूदा भर्ती व्यवस्था के तहत रूस को तत्काल किसी नई अनिवार्य लामबंदी की आवश्यकता नहीं है।
रूस ने इससे पहले भी कई बार संकेत दिया है कि वह सितंबर 2022 जैसी व्यापक लामबंदी दोबारा नहीं करना चाहता।
2022 में 3 लाख रिजर्व सैनिक बुलाए गए थे
रूस में आखिरी बार सितंबर 2022 में आंशिक सैन्य लामबंदी की गई थी। क्रेमलिन के अनुसार, उस समय करीब 3 लाख रिजर्व सैनिकों को सेना में बुलाया गया था।
इस फैसले के बाद रूस के भीतर व्यापक विरोध देखने को मिला था। सैन्य सेवा की उम्र वाले बड़ी संख्या में पुरुष देश छोड़कर दूसरे देशों में चले गए थे।
इसके बाद से रूसी सरकार और क्रेमलिन कई बार कह चुके हैं कि देश में दोबारा उसी तरह की लामबंदी की कोई योजना नहीं है।
समुद्री तनाव के बीच युद्ध का कूटनीतिक समाधान चुनौतीपूर्ण
रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध के दौरान समुद्री क्षेत्र लगातार रणनीतिक महत्व हासिल करता जा रहा है। व्यापारिक जहाजों और समुद्री बुनियादी ढांचे से जुड़ी घटनाओं ने संघर्ष के आर्थिक और सुरक्षा प्रभाव को बढ़ाया है।
पुतिन के ताजा बयान से संकेत मिलता है कि मॉस्को रूसी जहाजों को निशाना बनाए जाने को गंभीर सुरक्षा मुद्दे के रूप में देख रहा है। दूसरी ओर, रूस और अमेरिका के बीच संपर्क जारी रहने से कूटनीतिक स्तर पर संवाद की गुंजाइश बनी हुई है।
फिलहाल रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध समाप्त कराने के लिए कोई व्यापक शांति समझौता सामने नहीं आया है। समुद्र में बढ़ता तनाव, क्षेत्रीय विवाद और सुरक्षा से जुड़े मतभेद किसी भी संभावित वार्ता के लिए बड़ी चुनौतियां बने हुए हैं।










