आर. प्रज्ञानानंद ने सेंट लुइस में शानदार प्रदर्शन करते हुए ग्रैंड चेस टूर का खिताब जीतकर इतिहास रच दिया है। वह इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट को जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। फाइनल मुकाबले में चेन्नई के इस युवा ग्रैंडमास्टर ने फैबियानो कारुआना को 15-13 से हराया।
R Praggnanandhaa Grand Chess Tour: भारत के युवा शतरंज ग्रैंडमास्टर आर प्रज्ञानानंद ने अंतरराष्ट्रीय शतरंज की दुनिया में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है। सेंट लुइस में खेले गए रोमांचक फाइनल में प्रज्ञानानंद ने अमेरिका के दिग्गज खिलाड़ी फैबियानो कारुआना को 15-13 के कुल स्कोर से हराकर Grand Chess Tour का खिताब अपने नाम कर लिया। इस जीत के साथ वह इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता को जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं।
चेन्नई के रहने वाले प्रज्ञानानंद के लिए यह जीत इसलिए भी खास रही क्योंकि फाइनल के शुरुआती चरण में वह कारुआना से छह अंकों से पीछे चल रहे थे। इसके बावजूद भारतीय ग्रैंडमास्टर ने धैर्य बनाए रखा और अंतिम दिन शानदार प्रदर्शन करते हुए मुकाबले का रुख पूरी तरह बदल दिया।
छह अंकों की पिछड़ने के बाद की शानदार वापसी
फाइनल के अंतिम दिन की शुरुआत कारुआना के मजबूत स्थिति में होने के साथ हुई। अमेरिकी खिलाड़ी के पास प्रज्ञानानंद पर छह अंकों की बढ़त थी। ऐसे में भारतीय खिलाड़ी के सामने वापसी के लिए बेहद आक्रामक और सटीक खेल दिखाने की चुनौती थी। प्रज्ञानानंद ने दबाव के बावजूद दोनों रैपिड मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन किया और लगातार जीत दर्ज कर अपनी स्थिति मजबूत कर ली। इन जीतों के बाद वह मुकाबले में वापस आ गए और कारुआना पर दबाव बढ़ गया।
रैपिड चरण के बाद ब्लिट्ज मुकाबलों में भी प्रज्ञानानंद ने अपनी बढ़त को बरकरार रखा। दोनों खिलाड़ियों के बीच ब्लिट्ज मुकाबला बराबरी पर समाप्त हुआ। कुल स्कोर 15-13 रहने के साथ भारतीय खिलाड़ी ने खिताब पर कब्जा कर लिया।
फाइनल की शुरुआत में कारुआना का दबदबा
प्रज्ञानानंद की ऐतिहासिक जीत की कहानी इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि मुकाबले की शुरुआत उनके पक्ष में नहीं रही थी। पहले क्लासिकल गेम में कारुआना ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 6-0 की बड़ी जीत हासिल की थी। इसके बाद दूसरे क्लासिकल गेम में दोनों खिलाड़ियों के बीच मुकाबला बराबरी पर समाप्त हुआ। इस परिणाम के बाद रैपिड और ब्लिट्ज चरण शुरू होने से पहले कारुआना के पास छह अंकों की महत्वपूर्ण बढ़त थी।
प्रज्ञानानंद के लिए यह स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण थी, लेकिन उन्होंने अंतिम दिन अपने खेल में जबरदस्त सुधार किया। रैपिड मुकाबलों में मिली लगातार जीत ने उन्हें वापसी का मौका दिया और उन्होंने इसे पूरी तरह भुनाया।
पहले ब्लिट्ज गेम में मिला था बड़ा मौका

पहले ब्लिट्ज मुकाबले में प्रज्ञानानंद जीत के करीब दिखाई दे रहे थे, लेकिन समय की कमी के कारण उनसे एक गलती हो गई। इससे कारुआना को वापसी का अवसर मिला। हालांकि, अमेरिकी खिलाड़ी भी उस मौके का पूरा फायदा नहीं उठा सके और मुकाबला ड्रॉ पर समाप्त हुआ। इसके बावजूद प्रज्ञानानंद ने दबाव नहीं बनने दिया। अगले मुकाबलों में उन्होंने अपनी स्थिति मजबूत रखी और अंततः कुल स्कोर में कारुआना को पीछे छोड़ते हुए ट्रॉफी अपने नाम कर ली।
Grand Chess Tour जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट का खिताब जीतना प्रज्ञानानंद के करियर की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक है। वह लंबे समय से विश्व शतरंज के शीर्ष खिलाड़ियों को चुनौती देते रहे हैं और इस जीत ने एक बार फिर उनकी क्षमता को साबित किया है। इस सफलता के साथ प्रज्ञानानंद ने भारतीय शतरंज के इतिहास में भी अपना नाम दर्ज करा लिया। वह Grand Chess Tour जीतने वाले पहले भारतीय बन गए हैं। टूर्नामेंट में उनकी जीत को करीब 2 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि से भी जोड़ा जा रहा है।
इससे पहले भी उन्होंने सेंट लुइस रैपिड एंड ब्लिट्ज प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन किया था। लगातार अच्छे परिणामों ने इस युवा खिलाड़ी की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थिति को और मजबूत किया है।
Wesley So ने जीता तीसरा स्थान
सेंट लुइस में तीसरे स्थान के लिए हुए मुकाबले में वेस्ली सो ने जर्मनी के विंसेंट कीमर को 18-12 के कुल स्कोर से हराया। रैपिड चरण में दोनों खिलाड़ियों ने एक-एक मुकाबला जीता, जिसके बाद मुकाबला रोमांचक स्थिति में पहुंच गया। हालांकि, ब्लिट्ज चरण में वेस्ली सो ने पूरी तरह नियंत्रण हासिल कर लिया। उन्होंने लगातार चार ब्लिट्ज मुकाबले जीतकर तीसरे स्थान पर अपनी जगह पक्की कर ली।









