राहुल गांधी बोले- महिलाओं के खिलाफ 3 तरह की हिंसा, आर्थिक आजादी पर भी दिया जोर

राहुल गांधी ने पुणे में महिलाओं की आजादी, शिक्षा, रोजगार और पितृसत्ता पर बात की। छात्राओं से डर छोड़कर अपनी आवाज उठाने और अधिकारों के लिए लड़ने की अपील की

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पुणे में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में महिलाओं की स्वतंत्रता, शिक्षा, रोजगार और पितृसत्ता पर विस्तार से बात की। उन्होंने महिलाओं के खिलाफ हिंसा के तीन रूप बताए और छात्राओं से डर छोड़कर अपनी आवाज उठाने की अपील की।

पुणे: कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शनिवार को पुणे में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में महिलाओं की स्वतंत्रता और पितृसत्ता से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से अपनी बात रखी। करीब एक घंटे से अधिक चले कार्यक्रम में राहुल गांधी ने छात्राओं से संवाद किया और उनसे उनके अनुभवों, चुनौतियों तथा भविष्य को लेकर सवाल किए। राहुल गांधी ने कहा कि किसी महिला की पहचान केवल उसके पिता, पति या बेटे के रिश्ते से नहीं होनी चाहिए। उनका कहना था कि महिला का अपना स्वतंत्र अस्तित्व और पहचान है। उन्होंने महिलाओं को शिक्षा, रोजगार, संपत्ति और अपने जीवन से जुड़े फैसले लेने की पूरी स्वतंत्रता देने की जरूरत पर जोर दिया।

महिलाओं के खिलाफ हिंसा के तीन रूप बताए

राहुल गांधी ने महिलाओं के खिलाफ हिंसा को केवल शारीरिक हमलों तक सीमित नहीं माना। उन्होंने कहा कि महिलाओं के खिलाफ हिंसा के तीन प्रमुख रूप हैं। पहला, जन्म से पहले या जन्म के बाद लड़की को स्वीकार न करने की मानसिकता; दूसरा, शारीरिक हिंसा और अत्याचार; और तीसरा, आर्थिक नियंत्रण और निर्भरता।

उन्होंने कहा कि महिलाओं की स्वतंत्रता पर नियंत्रण कई स्तरों पर दिखाई देता है। घर से बाहर निकलने, नौकरी करने, पढ़ाई जारी रखने, संपत्ति रखने या अपनी पसंद से फैसले लेने में जब किसी महिला को बाधाओं का सामना करना पड़ता है, तो यह भी उसके अधिकारों और स्वतंत्रता को सीमित करने का एक रूप है।

राहुल ने छात्राओं से कहा कि उन्हें अपने अधिकारों के लिए आवाज उठानी चाहिए और किसी भी तरह के डर या सामाजिक दबाव के सामने पीछे नहीं हटना चाहिए।

पिता, पति या बेटे से अलग हो महिला की पहचान

कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने महिलाओं की पहचान से जुड़े सामाजिक नजरिए पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि महिला का पिता, पति या बेटे के साथ रिश्ता जरूर होता है, लेकिन उसकी व्यक्तिगत पहचान इन रिश्तों पर निर्भर नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने मनुस्मृति का संदर्भ देते हुए उस सोच की आलोचना की, जिसमें महिला को जीवन के अलग-अलग चरणों में पिता, पति या परिवार पर निर्भर मानने की धारणा दिखाई देती है। राहुल गांधी ने इसे महिलाओं की स्वतंत्रता के खिलाफ सोच बताते हुए कहा कि आधुनिक भारत में महिलाओं को किसी व्यक्ति की संपत्ति या आश्रित के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारत की वास्तविक ताकत उसके लोगों के सपनों और विचारों में है और महिलाओं को भी देश के भविष्य को तय करने में बराबर की भूमिका मिलनी चाहिए।

हिंसा, अपमान, समय और नियंत्रण का जिक्र

राहुल गांधी ने महिलाओं पर सामाजिक नियंत्रण के चार तरीकों का भी उल्लेख किया। उन्होंने हिंसा, अपमान या अनादर, समय और नियंत्रण को ऐसे माध्यमों के रूप में गिनाया, जिनके जरिए महिलाओं की स्वतंत्रता सीमित की जा सकती है।

उन्होंने कहा कि महिलाओं को अक्सर यह कहकर रोका जाता है कि अगर वे अकेले बाहर जाएंगी तो उनके साथ कुछ गलत हो सकता है। इस तरह का डर धीरे-धीरे उनकी स्वतंत्रता और निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है।

राहुल ने उदाहरण देते हुए कहा कि पुरुषों को देर रात तक बाहर रहने, काम करने या दोस्तों के साथ समय बिताने की अधिक स्वतंत्रता मिलती है, जबकि महिलाओं के लिए घर लौटने का एक निश्चित समय तय कर दिया जाता है। उन्होंने इसे लैंगिक असमानता की मानसिकता से जोड़कर देखा।

शिक्षा और रोजगार में भेदभाव पर सवाल

कार्यक्रम में राहुल गांधी ने लड़कियों की शिक्षा और रोजगार को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि समाज में यह सोच कहां से आती है कि लड़के को पढ़ाना जरूरी है, जबकि लड़की की पढ़ाई या नौकरी को शादी और घरेलू जिम्मेदारियों के सामने पीछे कर दिया जाए।

उन्होंने कहा कि कई लड़कियों की पढ़ाई शादी या घरेलू कामकाज के कारण प्रभावित होती है। उनके अनुसार महिलाओं को अपनी शिक्षा पूरी करने और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिलना चाहिए।

राहुल गांधी ने महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता को भी बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने संपत्ति के स्वामित्व और आर्थिक फैसलों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया। उनका कहना था कि आर्थिक निर्भरता भी किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमित कर सकती है।

‘बी लाउड, बी प्राउड एंड फाइट फॉर योरसेल्फ’ का संदेश

राहुल गांधी ने छात्राओं से कहा कि उन्हें अपनी आवाज दबाने की जरूरत नहीं है। उन्होंने अंग्रेजी में ‘Be Loud, Be Proud and Fight for Yourself’ का संदेश दिया। इसका अर्थ है कि महिलाएं अपनी बात खुलकर रखें, अपने अस्तित्व पर गर्व करें और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करें।

उन्होंने छात्राओं से डर को पीछे छोड़ने और अपने फैसलों के लिए खड़े होने की अपील की। राहुल ने कहा कि पितृसत्ता जैसी सामाजिक संरचनाओं से मुकाबला केवल व्यक्तिगत स्तर पर नहीं, बल्कि सामूहिक प्रयास से किया जा सकता है।

उनका कहना था कि महिलाओं के भीतर मौजूद डर को खत्म करना जरूरी है, क्योंकि डर के कारण कई बार व्यक्ति अपने अधिकारों के लिए आवाज नहीं उठा पाता।

छात्राओं से सीधा संवाद किया

कार्यक्रम की खास बात यह रही कि राहुल गांधी ने केवल भाषण नहीं दिया, बल्कि छात्राओं से सीधे बातचीत भी की। उन्होंने कई लड़कियों से उनके व्यक्तिगत अनुभव और समस्याएं पूछीं।

एक छात्रा ने प्रतियोगी परीक्षा से जुड़े कथित पेपर लीक का मुद्दा उठाया और राहुल गांधी से मदद की अपील की। एक अन्य छात्रा ने अपने क्षेत्र में महिलाओं के साथ कथित प्रशासनिक व्यवहार से जुड़ी समस्या साझा की।

राहुल ने छात्राओं से उनके आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों को लेकर भी बातचीत की। उन्होंने कहा कि यदि छात्राएं किसी मुद्दे पर प्रदर्शन कर रही हैं तो उन्हें अपनी आवाज मजबूती से उठानी चाहिए। कार्यक्रम का यह संवादात्मक हिस्सा महिलाओं के व्यक्तिगत अनुभवों को सार्वजनिक बहस से जोड़ने की कोशिश के रूप में सामने आया।

भोजपुरी गायिका नेहा राठौर ने भी रखी बात

कार्यक्रम के दौरान भोजपुरी लोकगायिका नेहा राठौर ने भी मंच से अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि वह लोकगीतों के जरिए सरकार और व्यवस्था से सवाल उठाती हैं और इसके कारण उन्हें आलोचना तथा कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ा है।

नेहा राठौर ने महिलाओं की ऑनलाइन ट्रोलिंग को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि महिलाओं को निशाना बनाते समय अक्सर उनके काम या विचारों के बजाय उनके चरित्र पर टिप्पणी की जाती है। उनके मुताबिक इस तरह की टिप्पणियां महिलाओं को सार्वजनिक जीवन में अपनी बात रखने से हतोत्साहित कर सकती हैं।

राहुल गांधी ने उनकी बात पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें भी लंबे समय से राजनीतिक और व्यक्तिगत स्तर पर आलोचना और गालियों का सामना करना पड़ता रहा है।

महिलाओं की संपत्ति और पारिवारिक अधिकार पर चर्चा

राहुल गांधी ने महिलाओं के संपत्ति अधिकार को भी चर्चा का हिस्सा बनाया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब परिवार में कोई पुरुष सदस्य अपने हिस्से की मांग करता है तो उसे अधिकार कहा जाता है, लेकिन महिला अपने हिस्से की मांग करे तो अक्सर उसे अलग नजर से देखा जाता है।

उनके अनुसार महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता केवल नौकरी तक सीमित नहीं होनी चाहिए। संपत्ति, आय और आर्थिक फैसलों में बराबर भागीदारी भी महिलाओं के सशक्तिकरण का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

उन्होंने कहा कि महिला को परिवार की जिम्मेदारियां निभाने के साथ-साथ अपने भविष्य और आर्थिक जीवन के बारे में स्वतंत्र निर्णय लेने का अधिकार होना चाहिए।

महिलाओं की सुरक्षा और स्वतंत्रता पर बहस

राहुल गांधी के इस कार्यक्रम ने महिलाओं की सुरक्षा और स्वतंत्रता के बीच संतुलन को लेकर भी चर्चा को आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा के नाम पर महिलाओं की गतिविधियों और स्वतंत्रता को सीमित करना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है।

उनके मुताबिक समाज को ऐसा वातावरण तैयार करना चाहिए जिसमें महिलाएं बिना डर के शिक्षा प्राप्त कर सकें, नौकरी कर सकें, सार्वजनिक स्थानों पर जा सकें और अपनी पसंद के अनुसार जीवन के फैसले ले सकें।

उन्होंने छात्राओं को यह संदेश दिया कि उन्हें अपनी आवाज को कमजोर नहीं समझना चाहिए। उनका कहना था कि लोकतंत्र में युवाओं, खासकर महिलाओं की भागीदारी मजबूत होगी तो समाज में बदलाव की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।

पितृसत्ता पर राहुल के बयान से राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना

राहुल गांधी के कार्यक्रम में दिए गए बयान महिलाओं की स्वतंत्रता, सामाजिक असमानता और पितृसत्ता पर केंद्रित रहे। हालांकि उनके कुछ राजनीतिक संदर्भों और अन्य नेताओं के बयानों पर टिप्पणियां आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस को भी जन्म दे सकती हैं।

राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि वह कार्यक्रम में मुख्य रूप से राजनीति करने के बजाय छात्रों और छात्राओं की बात सुनने आए थे। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपनी समस्याएं और विचार खुलकर साझा करने का अवसर मिलना चाहिए।

पुणे का यह कार्यक्रम महिलाओं के अधिकार, शिक्षा, रोजगार, आर्थिक स्वतंत्रता और सामाजिक नियंत्रण जैसे मुद्दों को एक साथ चर्चा के केंद्र में ले आया। राहुल गांधी का मुख्य संदेश यही रहा कि महिलाओं की पहचान स्वतंत्र होनी चाहिए और उन्हें अपने जीवन से जुड़े फैसले लेने की पूरी आजादी मिलनी चाहिए। 

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