राजस्थान में टिकट विवाद ने पकड़ा तूल, सलूंबर BJP जिलाध्यक्ष को जान से मारने की धमकी; आरोपी गिरफ्तार

राजस्थान के सलूंबर में BJP जिलाध्यक्ष चंद्रशेखर जोशी ने पूर्व उपसरपंच पर टिकट विवाद में धमकी देने का आरोप लगाया। शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया।

राजस्थान के सलूंबर में BJP जिलाध्यक्ष चंद्रशेखर जोशी ने पूर्व उपसरपंच डीएस सिंह पर टिकट विवाद में गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया। शिकायत और रिकॉर्डिंग मिलने के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया।

सलूंबर: राजस्थान में पंचायती राज चुनावों के बीच टिकट वितरण को लेकर राजनीतिक विवाद सामने आया है। सलूंबर जिले के भारतीय जनता पार्टी (BJP) अध्यक्ष चंद्रशेखर जोशी ने आरोप लगाया है कि सल्लाड़ा ग्राम पंचायत के पूर्व उपसरपंच डीएस सिंह ने फोन पर उनके साथ गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी दी। शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस अधीक्षक को सूचना और कथित बातचीत की रिकॉर्डिंग उपलब्ध कराने के करीब 15 मिनट के भीतर गिरफ्तारी की कार्रवाई की गई।

मामला उदयपुर संभाग के आदिवासी क्षेत्र सलूंबर जिले का है। बताया गया है कि विवाद पंचायत चुनाव में वार्डों के टिकट वितरण को लेकर शुरू हुआ। आरोप है कि पार्टी के जिला अध्यक्ष की ओर से टिकट के लिए पैरवी नहीं किए जाने से नाराज होकर पूर्व उपसरपंच ने उन्हें फोन किया। बातचीत के दौरान विवाद बढ़ गया और कथित तौर पर जान से मारने की धमकी दी गई।

जयपुर जाते समय आया फोन

भाजपा जिला अध्यक्ष चंद्रशेखर जोशी के मुताबिक, घटना के समय वह पार्टी की कोर कमेटी की बैठक में शामिल होने के लिए जयपुर जा रहे थे। इसी दौरान सल्लाड़ा ग्राम पंचायत के पूर्व उपसरपंच डीएस सिंह का फोन आया।

जोशी का आरोप है कि सिंह ने बातचीत के दौरान उनसे सवाल किया कि पंचायत चुनाव में टिकट दिलाने के लिए पैरवी क्यों नहीं की गई। इसके बाद फोन पर गाली-गलौज शुरू हो गई। जोशी के अनुसार, बातचीत के दौरान उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी गई।

पंचायती राज चुनावों में उम्मीदवारों के चयन को लेकर स्थानीय स्तर पर राजनीतिक गतिविधियां तेज रहती हैं। ऐसे में टिकट वितरण से जुड़ा यह विवाद जिले की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया। हालांकि, फोन पर हुई बातचीत और धमकी से जुड़े आरोपों की अंतिम पुष्टि पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही की जा सकती है।

पुलिस अधीक्षक को दी शिकायत, रिकॉर्डिंग भी सौंपी

जोशी ने कथित धमकी के बाद सलूंबर के पुलिस अधीक्षक बिशनाराम विश्नोई को घटना की जानकारी दी। उन्होंने बातचीत की रिकॉर्डिंग भी पुलिस को उपलब्ध कराई। इसके बाद पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर संबंधित आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की गई।

उपलब्ध समाचार विवरण के मुताबिक, पुलिस ने शिकायत मिलने के लगभग 15 मिनट के भीतर डीएस सिंह को गिरफ्तार कर लिया। तेजी से हुई इस कार्रवाई ने मामले को स्थानीय स्तर पर सुर्खियों में ला दिया।

हालांकि, उपलब्ध जानकारी में गिरफ्तारी के बाद दर्ज धाराओं, आरोपी की ओर से दिए गए पक्ष और आगे की कानूनी प्रक्रिया का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है। इसलिए मामले में आरोपों को पुलिस जांच के अधीन ही देखा जाना चाहिए। गिरफ्तारी अपने आप में किसी व्यक्ति के दोषी होने का अंतिम प्रमाण नहीं होती; दोष का निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के तहत होता है।

वार्ड नंबर 2 और 12 के टिकट को लेकर विवाद

भाजपा जिला अध्यक्ष चंद्रशेखर जोशी ने बताया कि डीएस सिंह ने अपने समर्थकों के लिए वार्ड नंबर 2 और वार्ड नंबर 12 से टिकट दिलाने की मांग की थी। जोशी के मुताबिक, टिकट मिलने की उम्मीद पूरी नहीं होने के बाद विवाद बढ़ गया।

आरोप है कि इसी नाराजगी के चलते सिंह ने फोन कर जिला अध्यक्ष से बहस की और बाद में गाली-गलौज तथा जान से मारने की धमकी दी। इस तरह मामले की जड़ स्थानीय पंचायत चुनावों में उम्मीदवारों के चयन और टिकट वितरण को लेकर असहमति बताई जा रही है।

स्थानीय निकाय और पंचायती राज चुनावों में पार्टी कार्यकर्ताओं तथा नेताओं के बीच उम्मीदवारों के चयन को लेकर मतभेद सामने आते रहे हैं। इन चुनावों में वार्ड स्तर पर उम्मीदवारों की स्थानीय पकड़, संगठन में उनकी भूमिका और समर्थकों की अपेक्षाएं महत्वपूर्ण होती हैं। ऐसे मामलों में टिकट नहीं मिलने पर असंतोष पैदा हो सकता है, लेकिन किसी भी विवाद का समाधान कानून के दायरे में रहकर ही किया जाना चाहिए।

आरोपी के हिस्ट्रीशीटर होने का भी दावा

चंद्रशेखर जोशी ने पुलिस अधीक्षक को दी गई जानकारी में आरोप लगाया कि धमकी देने वाला व्यक्ति हिस्ट्रीशीटर है। यह दावा भी शिकायतकर्ता की ओर से किया गया है। उपलब्ध विवरण में आरोपी के आपराधिक रिकॉर्ड की स्वतंत्र पुष्टि या संबंधित पुलिस दस्तावेजों का उल्लेख नहीं है।

किसी व्यक्ति के आपराधिक इतिहास के बारे में निष्कर्ष निकालने के लिए आधिकारिक पुलिस रिकॉर्ड और संबंधित मामलों की जानकारी जरूरी होती है। इसलिए इस दावे को भी शिकायतकर्ता के आरोप के रूप में ही प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

पुलिस की ओर से कथित फोन कॉल की रिकॉर्डिंग के आधार पर कार्रवाई किए जाने की बात सामने आई है। जांच में रिकॉर्डिंग की प्रामाणिकता, बातचीत का संदर्भ और अन्य संबंधित साक्ष्य महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

पंचायत चुनावों के बीच राजनीतिक विवाद चर्चा में

राजस्थान में पंचायती राज चुनावों के दौरान टिकट वितरण से जुड़ा यह मामला स्थानीय राजनीति में तनाव को उजागर करता है। सलूंबर जिले में भाजपा अध्यक्ष को कथित धमकी मिलने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की, लेकिन मामले की आगे की कानूनी स्थिति और जांच के निष्कर्षों का इंतजार है।

राजनीतिक दलों में उम्मीदवारों के चयन को लेकर मतभेद होना सामान्य राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है। हालांकि, यदि किसी विवाद में धमकी या गाली-गलौज जैसे आरोप सामने आते हैं, तो पुलिस की निष्पक्ष जांच और कानून के अनुसार कार्रवाई आवश्यक है।

फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के अनुसार डीएस सिंह को गिरफ्तार किया गया है। कथित धमकी, टिकट वितरण को लेकर विवाद और आरोपी के आपराधिक रिकॉर्ड संबंधी दावों पर आगे की आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

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