राजनाथ सिंह बोले- प्रिवेंटिव हेल्थ केयर से घटेगा अस्पतालों का बोझ इंटीग्रेटेड डायग्नोस्टिक सेंटर का उद्घाटन, AI-MRI और 160-स्लाइस CT की सुविधा

नोएडा में इंटीग्रेटेड डायग्नोस्टिक सेंटर का उद्घाटन हुआ। राजनाथ सिंह ने प्रिवेंटिव हेल्थ केयर को जरूरी बताया। यहां AI-MRI और 160-स्लाइस CT सुविधा मिलेगी।
राजनाथ सिंह बोले- प्रिवेंटिव हेल्थ केयर से घटेगा अस्पतालों का बोझ इंटीग्रेटेड डायग्नोस्टिक सेंटर का उद्घाटन, AI-MRI और 160-स्लाइस CT की सुविधा
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नोएडा: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को नोएडा में एक अत्याधुनिक इंटीग्रेटेड डायग्नोस्टिक सेंटर का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि देश में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के साथ-साथ बीमारियों की समय रहते पहचान पर भी जोर देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्रिवेंटिव हेल्थ केयर यानी बीमारी होने से पहले उसकी पहचान और रोकथाम पर ध्यान देने से अस्पतालों पर बढ़ रहा दबाव कम किया जा सकता है।

नोएडा में शुरू किए गए इस डायग्नोस्टिक सेंटर में आधुनिक जांच सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। यहां AI आधारित MRI और 160-स्लाइस CT स्कैन जैसी अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इन सुविधाओं से गंभीर बीमारियों की शुरुआती अवस्था में पहचान और मरीजों की जांच में तेजी आने की उम्मीद है।

उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान राजनाथ सिंह ने स्वास्थ्य व्यवस्था में तकनीक की बढ़ती भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज चिकित्सा क्षेत्र तेजी से बदल रहा है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीकों का इस्तेमाल जांच और उपचार को अधिक प्रभावी बनाने में मदद कर सकता है।

उन्होंने कहा कि भारत में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार केवल बड़े अस्पतालों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। लोगों को समय पर जांच की सुविधा अपने आसपास ही उपलब्ध हो, यह भी उतना ही जरूरी है। यदि बीमारी का पता शुरुआती चरण में चल जाए तो उसका इलाज अपेक्षाकृत आसान हो सकता है और मरीज को गंभीर अवस्था में अस्पताल पहुंचने की नौबत कम आती है।

राजनाथ सिंह ने प्रिवेंटिव हेल्थ केयर की जरूरत को समझाते हुए कहा कि आम तौर पर लोग बीमारी के गंभीर होने के बाद अस्पताल पहुंचते हैं। इससे अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ती है और स्वास्थ्य व्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है। नियमित स्वास्थ्य जांच और समय रहते बीमारी की पहचान इस दबाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

नोएडा में स्थापित इस सेंटर की खासियत इसकी आधुनिक जांच व्यवस्था है। AI-MRI तकनीक के जरिए MRI जांच को अधिक उन्नत बनाने का प्रयास किया गया है। वहीं 160-स्लाइस CT मशीन के माध्यम से शरीर के अलग-अलग हिस्सों की विस्तृत इमेजिंग की जा सकती है। ऐसी तकनीक गंभीर बीमारियों और जटिल स्वास्थ्य समस्याओं की जांच में डॉक्टरों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।

डायग्नोस्टिक सेंटर में अत्याधुनिक मशीनों की उपलब्धता से मरीजों को जांच के लिए दूसरे शहरों या बड़े अस्पतालों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। नोएडा और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को स्थानीय स्तर पर ही उन्नत जांच सुविधा मिलने की उम्मीद है।

कार्यक्रम में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों और अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया। इस दौरान आधुनिक चिकित्सा तकनीक, समय पर जांच और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को लेकर चर्चा हुई। सेंटर में उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी भी दी गई।

प्रिवेंटिव हेल्थ केयर का सबसे बड़ा फायदा यह माना जाता है कि बीमारी के लक्षण गंभीर होने से पहले ही उसकी पहचान की जा सकती है। कई बीमारियां शुरुआती दौर में कम लक्षण देती हैं और मरीज को इसका पता देर से चलता है। ऐसे मामलों में नियमित जांच महत्वपूर्ण हो सकती है।

राजनाथ सिंह ने स्वास्थ्य क्षेत्र में तकनीक और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं केवल इलाज तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि बीमारी की पहचान, रोकथाम और समय पर उपचार की पूरी व्यवस्था विकसित होनी चाहिए।

नोएडा जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में इस तरह के सेंटर की जरूरत लंबे समय से महसूस की जाती रही है। शहर की आबादी के साथ स्वास्थ्य सेवाओं की मांग भी बढ़ रही है। ऐसे में अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक सुविधाओं से मरीजों को बेहतर विकल्प मिल सकता है।

160-स्लाइस CT मशीन आधुनिक CT स्कैनिंग तकनीक का हिस्सा है। इसके जरिए कम समय में शरीर के कई हिस्सों की विस्तृत इमेजिंग की जा सकती है। वहीं MRI का इस्तेमाल शरीर के सॉफ्ट टिश्यू और कई आंतरिक संरचनाओं की जांच में किया जाता है। डॉक्टर मरीज की स्थिति के अनुसार इन जांचों की सलाह देते हैं।

AI आधारित तकनीक का इस्तेमाल मेडिकल इमेजिंग में तेजी से बढ़ रहा है। इसका उद्देश्य डॉक्टरों को इमेज की बेहतर प्रोसेसिंग और विश्लेषण में सहायता देना है। हालांकि अंतिम चिकित्सकीय निर्णय विशेषज्ञ डॉक्टर ही मरीज की स्थिति और अन्य मेडिकल रिपोर्ट को देखकर लेते हैं।

इस सेंटर के शुरू होने से नोएडा में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक और आधुनिक सुविधा जुड़ गई है। मरीजों को एक ही स्थान पर अलग-अलग प्रकार की जांच सुविधाएं उपलब्ध होने से समय बचने की उम्मीद है। विशेष रूप से गंभीर बीमारी की आशंका वाले मरीजों के लिए तेजी से जांच और रिपोर्ट मिलना इलाज की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण हो सकता है।

राजनाथ सिंह ने इस मौके पर यह भी संदेश दिया कि स्वास्थ्य व्यवस्था को केवल अस्पतालों और डॉक्टरों की संख्या से नहीं आंका जाना चाहिए। लोगों को बीमारी से बचाने, जागरूक करने और समय पर जांच उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी मजबूत करनी होगी।

उन्होंने कहा कि यदि लोग नियमित स्वास्थ्य जांच को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं और बीमारी की शुरुआती अवस्था में ही डॉक्टर से सलाह लें तो गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को समय रहते नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। इससे मरीजों की परेशानी कम होने के साथ स्वास्थ्य संस्थानों पर अनावश्यक दबाव भी घट सकता है।

नोएडा में इस अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक सेंटर की शुरुआत ऐसे समय में हुई है जब देश में स्वास्थ्य सेवाओं में डिजिटल और AI तकनीक के इस्तेमाल पर तेजी से जोर दिया जा रहा है। मेडिकल इमेजिंग, जांच और रिपोर्टिंग में तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ रही है।

सेंटर में उपलब्ध AI-MRI और 160-स्लाइस CT जैसी सुविधाओं से जांच प्रक्रिया को आधुनिक बनाने का प्रयास किया गया है। इसके अलावा मरीजों को बेहतर डायग्नोस्टिक सुविधा देने के लिए अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं भी विकसित की गई हैं।

उद्घाटन के दौरान राजनाथ सिंह ने स्वास्थ्य क्षेत्र में काम कर रहे चिकित्सकों और तकनीकी विशेषज्ञों की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि आधुनिक मशीनें तभी प्रभावी होती हैं, जब उनका इस्तेमाल प्रशिक्षित विशेषज्ञों और उचित चिकित्सकीय प्रोटोकॉल के साथ किया जाए।

कुल मिलाकर नोएडा में शुरू हुआ यह इंटीग्रेटेड डायग्नोस्टिक सेंटर आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। AI-MRI और 160-स्लाइस CT जैसी सुविधाओं के साथ सेंटर का उद्देश्य मरीजों को बेहतर और समय पर जांच उपलब्ध कराना है। राजनाथ सिंह ने प्रिवेंटिव हेल्थ केयर को स्वास्थ्य व्यवस्था का अहम हिस्सा बताते हुए कहा कि बीमारी की समय रहते पहचान से मरीजों को गंभीर स्थिति से बचाने में मदद मिल सकती है और अस्पतालों पर बढ़ता बोझ भी कम किया जा सकता है।

 

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