राजस्थान में बसों से जुड़ा बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है। परिवहन विभाग की जांच में सामने आया है कि अधूरी बसों का बिना भौतिक सत्यापन के ही फर्जी रजिस्ट्रेशन कराया जा रहा था। सुरक्षा मानकों की अनदेखी करते हुए ये बसें सड़कों पर दौड़ रही थीं। जांच के बाद विभाग ने कई बॉडी बिल्डर्स और आरटीओ कार्यालयों पर कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है।
जयपुर। राजस्थान में बसों से जुड़े बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है। परिवहन विभाग की जांच में सामने आया कि कई अधूरी बसों का रजिस्ट्रेशन बिना भौतिक सत्यापन और सुरक्षा जांच के ही किया गया। सुरक्षा मानकों की अनदेखी करते हुए ये बसें सड़कों पर दौड़ रही थीं। जांच में यह भी पता चला कि राजस्थान में बने कई बसों का रजिस्ट्रेशन अन्य राज्यों जैसे बिहार, गुजरात, असम और अरुणाचल प्रदेश में किया गया था। परिवहन विभाग ने अब संबंधित आरटीओ कार्यालयों को बॉडी बिल्डर्स, ऑपरेटर्स और फर्जी रजिस्ट्रेशन में शामिल अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
फर्जी रजिस्ट्रेशन जारी, विभाग ने शुरू की कार्रवाई
जैसलमेर बस हादसे के बाद विभाग ने जांच शुरू की थी, जिसमें पता चला कि फर्जी रजिस्ट्रेशन का सिलसिला अब भी जारी है। उदयपुर की गणेश मोटर बॉडी में तैयार हो रही बस का 17 अक्टूबर को बिहार में रजिस्ट्रेशन करा दिया गया, जबकि बस अधूरी थी। राज्य में करीब आठ हजार स्लीपर बसें चल रही हैं, जिनमें आधी से ज्यादा का पंजीकरण अन्य राज्यों में किया गया है। कम टैक्स और अन्य सुविधाओं के लालच में ऑपरेटर्स बाहर रजिस्ट्रेशन करा रहे हैं।
अधूरी बसों का रजिस्ट्रेशन कैसे हुआ
जांच में यह सामने आया कि कई बसें राजस्थान के बॉडी बिल्डर्स के यार्ड में अधूरी खड़ी थीं। इन बसों का रजिस्ट्रेशन बिना भौतिक सत्यापन और फिटनेस जांच के जारी किया गया। कई बसों का नाम अन्य राज्यों के रजिस्ट्रेशन में दिखाई दिया, जबकि निर्माण राजस्थान में हुआ था। विभाग ने सभी चेसिस और इंजन नंबरों की जांच कर पूरी रिपोर्ट तैयार कर ली है।
विभाग ने किए कानूनी कदम
परिवहन विभाग ने बॉडी बिल्डर्स, बस ऑपरेटर्स और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के आदेश दिए हैं। परिवहन सचिव शुचि त्यागी ने बताया कि जांच में मिले इंजन और चेसिस नंबर वाहन पोर्टल से मैच किए गए, जिनमें फर्जी रजिस्ट्रेशन की पुष्टि हुई। विभाग ने सभी संदिग्ध नंबरों की पहचान कर उच्च स्तर पर रिपोर्ट भेज दी है।
टैक्स चोरी और सुरक्षा नियमों की अनदेखी
अधिकारियों के अनुसार यह फर्जीवाड़ा केवल रजिस्ट्रेशन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे टैक्स चोरी और सुरक्षा नियमों की अनदेखी भी जुड़ी हुई है। शुचि त्यागी ने कहा कि अब सभी बॉडी बिल्डर्स और शामिल अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी धोखाधड़ी रोकी जा सके।
सड़क सुरक्षा पर गंभीर सवाल
जांच में सामने आया कि फर्जी रजिस्ट्रेशन से जुड़े बसें सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं थीं। ऐसे में सड़क सुरक्षा और प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विभाग का कहना है कि जल्द ही सभी फर्जी रजिस्ट्रेशन रद्द किए जाएंगे और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।











