एसआई भर्ती परीक्षा-2021 पेपर लीक मामले में Special Operations Group Rajasthan ने सहायक लेखाधिकारी नागेश यादव को गिरफ्तार किया है। आरोपी ने 7.5 लाख में पेपर खरीदकर अपने भाई को परीक्षा पास कराने में मदद की, जिससे मेरिट में 18वां स्थान मिला।
जयपुर: राजस्थान में बहुचर्चित सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती परीक्षा-2021 पेपर लीक मामले में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने एक बड़ी गिरफ्तारी की है। SOG ने सीकर से सहायक लेखाधिकारी (AAO) नागेश कुमार यादव (32) को गिरफ्तार किया है, जो लंबे समय से फरार चल रहा था। आरोपी पर 10,000 रुपये का इनाम घोषित था।
जांच एजेंसियों के अनुसार, नागेश कुमार यादव ने अपने भाई को परीक्षा में पास कराने के लिए 7.50 लाख रुपये में लीक हुआ पेपर खरीदा था। इस मामले में पहले ही कई आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि जांच अभी भी जारी है।
भाई के लिए खरीदा गया था लीक पेपर, मेरिट में मिला 18वां स्थान
SOG के अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) विशाल बंसल के अनुसार, यह पूरा मामला संगठित पेपर लीक नेटवर्क से जुड़ा हुआ है। जांच में सामने आया कि आरोपी ने अपने भाई सुरजीत सिंह यादव को SI भर्ती परीक्षा में पास कराने के लिए पेपर और आंसर की व्यवस्था की थी।
बताया गया कि सुरजीत सिंह यादव ने परीक्षा में हिंदी विषय में 200 में से 190.79 अंक और सामान्य ज्ञान में 200 में से 158.27 अंक प्राप्त किए थे। इन अंकों के आधार पर उसने मेरिट सूची में 18वां स्थान हासिल किया और सब-इंस्पेक्टर के पद पर चयनित हो गया।
हालांकि, बाद में जांच में यह सामने आया कि यह सफलता निष्पक्ष नहीं थी, बल्कि परीक्षा से पहले लीक हुए प्रश्नपत्र के आधार पर प्राप्त की गई थी।
कैसे हुआ पूरा पेपर लीक नेटवर्क का खुलासा
जांच एजेंसियों के अनुसार, यह मामला राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) से जुड़े पेपर लीक नेटवर्क का हिस्सा है। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि तत्कालीन RPSC सदस्य बाबूलाल कटारा से प्रश्नपत्र और उत्तर प्राप्त किए गए थे।
इसके बाद यह सामग्री कुंदन कुमार पांडिया के माध्यम से आगे संदीप कुमार लाटा और पुरुषोत्तम दाधीच तक पहुंचाई गई। पुरुषोत्तम दाधीच उस समय उदयपुर स्थित स्थानीय निधि अंकेक्षण विभाग में सहायक लेखाधिकारी के पद पर कार्यरत था।
इसी नेटवर्क से जुड़े लोगों ने आगे पेपर को अन्य आरोपियों तक पहुंचाया, जिसमें नागेश कुमार यादव का नाम प्रमुख रूप से सामने आया।
व्हाट्सएप के जरिए भेजा गया था पेपर
SOG की जांच में यह भी सामने आया है कि लीक किया गया प्रश्नपत्र और उत्तर व्हाट्सएप के माध्यम से साझा किए गए थे। आरोपी नागेश कुमार यादव ने परीक्षा से पहले अपने भाई को यह सामग्री उपलब्ध कराई, जिससे उसे परीक्षा में अनुचित लाभ मिला।
जांच एजेंसियों का कहना है कि यह पूरा नेटवर्क डिजिटल माध्यमों का उपयोग करके पेपर लीक को अंजाम दे रहा था, जिससे इसे पकड़ना और भी चुनौतीपूर्ण हो गया था।
गिरफ्तारी और फरारी का पूरा घटनाक्रम
नागेश कुमार यादव उस समय पंचायत समिति अजीतगढ़, जिला सीकर में सहायक लेखाधिकारी द्वितीय के पद पर कार्यरत था। मामले के उजागर होने के बाद वह अपनी ड्यूटी से अनुपस्थित होकर फरार हो गया था।
लंबे समय तक फरार रहने के बाद SOG ने सीकर पुलिस के सहयोग से उसे गिरफ्तार किया। इससे पहले उसके भाई सुरजीत सिंह यादव को 9 अक्टूबर 2024 को गिरफ्तार किया जा चुका था। वहीं इस नेटवर्क के एक अन्य आरोपी पुरुषोत्तम दाधीच को 2 जून 2025 को गिरफ्तार किया गया था।
अब तक 144 गिरफ्तारियां, जांच जारी
SOG के अनुसार, राजस्थान SI भर्ती परीक्षा-2021 पेपर लीक मामले में अब तक कुल 144 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। यह मामला राज्य के सबसे बड़े भर्ती घोटालों में से एक माना जा रहा है, जिसकी जांच लगातार जारी है।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं और कितने उम्मीदवारों ने इस तरह से अनुचित लाभ लिया।
पेपर लीक का प्रभाव: भर्ती प्रणाली पर सवाल
इस घटना ने राजस्थान की भर्ती प्रणाली और परीक्षा प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों से न केवल योग्य उम्मीदवारों का नुकसान होता है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था की विश्वसनीयता भी प्रभावित होती है।
SI भर्ती जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा में इस तरह का घोटाला यह दर्शाता है कि परीक्षा प्रणाली में और अधिक सख्त निगरानी और तकनीकी सुरक्षा उपायों की आवश्यकता है।
डिजिटल युग में पेपर लीक की नई चुनौतियां
यह मामला यह भी दर्शाता है कि कैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म, विशेषकर मैसेजिंग ऐप्स, का इस्तेमाल पेपर लीक जैसे अपराधों में किया जा रहा है। व्हाट्सएप और अन्य माध्यमों के जरिए गोपनीय जानकारी का प्रसार जांच एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए परीक्षा प्रणाली को एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन, डिजिटल ट्रैकिंग और रियल-टाइम मॉनिटरिंग जैसे उपायों से मजबूत करना जरूरी है।












