भारत की संसद के उच्च सदन Rajya Sabha में उपसभापति पद के लिए होने वाला चुनाव इस बार औपचारिकता बनता नजर आ रहा है। मौजूदा राजनीतिक हालात को देखते हुए Harivansh Narayan Singh का दोबारा इस पद पर चुना जाना लगभग तय माना जा रहा है।
नई दिल्ली: राज्यसभा के उपसभापति पद के लिए शुक्रवार को होने वाले चुनाव से पहले ही स्थिति काफी हद तक स्पष्ट हो गई है। नॉमिनेटेड सदस्य हरिवंश नारायण सिंह के समर्थन में पांच प्रस्तावों के नोटिस मिल चुके हैं, जबकि विपक्ष की ओर से अब तक किसी भी उम्मीदवार का नाम सामने नहीं आया है। ऐसे में उनका दोबारा इस पद पर निर्विरोध चुना जाना लगभग तय माना जा रहा है।
यह पद 9 अप्रैल को उनके पिछले कार्यकाल के समाप्त होने के बाद खाली हो गया था। यदि हरिवंश इस बार भी चुने जाते हैं, तो यह उनका लगातार तीसरा कार्यकाल होगा, जो एक अहम उपलब्धि के रूप में देखा जाएगा।
लगातार तीसरे कार्यकाल की ओर हरिवंश, विपक्ष ने क्यों किया चुनाव का बहिष्कार?
यदि Harivansh Narayan Singh इस बार निर्वाचित होते हैं, तो यह उनका लगातार तीसरा कार्यकाल होगा। यह उपलब्धि भारतीय संसदीय इतिहास में महत्वपूर्ण मानी जाएगी। उनका पिछला कार्यकाल 9 अप्रैल को समाप्त हो गया था, जिसके बाद यह पद रिक्त हो गया था। अब नए चुनाव के जरिए इस पद को भरने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
इस चुनाव में सबसे बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम विपक्ष का बहिष्कार है। प्रमुख विपक्षी दलों ने इस पद के लिए कोई उम्मीदवार नहीं उतारा, जिससे मुकाबला एकतरफा हो गया है। Jairam Ramesh ने इस फैसले के पीछे कई कारण बताए हैं। उनके अनुसार, संसद में कुछ संवैधानिक और संसदीय परंपराओं का पालन नहीं किया जा रहा है, जिसके विरोध में यह कदम उठाया गया है।
विपक्ष के तीन प्रमुख तर्क
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विपक्ष ने अपने बहिष्कार के पीछे तीन मुख्य कारण गिनाए हैं:
- लोकसभा में उपाध्यक्ष पद खाली: विपक्ष का कहना है कि Lok Sabha में पिछले कई वर्षों से उपाध्यक्ष (Deputy Speaker) का पद खाली है, जो संसदीय परंपराओं के खिलाफ है।
- हरिवंश की पुनर्नियुक्ति का समय: विपक्ष ने यह भी सवाल उठाया है कि हरिवंश के पिछले कार्यकाल के समाप्त होने के तुरंत बाद उन्हें फिर से राज्यसभा के लिए नामित किया गया और फिर उपसभापति पद के लिए उम्मीदवार बनाया गया। इसे उन्होंने असामान्य प्रक्रिया बताया है।
- संवाद की कमी: विपक्ष का आरोप है कि इस पूरे मुद्दे पर उनसे कोई सार्थक चर्चा या परामर्श नहीं किया गया, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित होती है।
हालांकि, Jairam Ramesh ने यह स्पष्ट किया है कि उनका विरोध व्यक्तिगत रूप से Harivansh Narayan Singh के खिलाफ नहीं है। उन्होंने उनके प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए कहा कि यह मुद्दा संस्थागत प्रक्रियाओं और परंपराओं से जुड़ा है। विपक्ष को उम्मीद है कि अगर हरिवंश दोबारा इस पद पर चुने जाते हैं, तो वह सदन में सभी पक्षों को समान अवसर देंगे और विपक्ष की आवाज को भी गंभीरता से सुनेंगे।









