अयोध्या: राम मंदिर आंदोलन से जुड़े चार संतों को राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किए जाने की घोषणा के बाद धार्मिक और सामाजिक क्षेत्रों में खुशी की लहर है। वर्षों तक चले इस आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले इन संतों के योगदान को अब राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिल रही है।
संतों का कहना है कि जिस उद्देश्य के लिए उन्होंने लंबा संघर्ष किया, आज उसकी भव्यता को देखकर उन्हें अपनी हर पीड़ा और बलिदान सार्थक प्रतीत होता है। उन्होंने बताया कि आंदोलन के दौरान उन्हें कई कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, जिसमें पुलिस कार्रवाई, गिरफ्तारियां और शारीरिक यातनाएं भी शामिल थीं।
उनका कहना है कि उस समय हालात बेहद चुनौतीपूर्ण थे। कई बार जेल जाना पड़ा, विरोध-प्रदर्शनों का सामना करना पड़ा और समाज के अलग-अलग वर्गों के विरोध के बावजूद वे अपने लक्ष्य पर डटे रहे। उनका विश्वास कभी नहीं डगमगाया।
अब जब Ram Mandir अपने भव्य स्वरूप में स्थापित हो चुका है, तो संतों को लगता है कि उनका संघर्ष व्यर्थ नहीं गया। उन्होंने कहा कि मंदिर को देखकर पुराने संघर्षों की यादें भी अब एक सुखद अनुभव में बदल जाती हैं।
यह सम्मान सिर्फ इन चार संतों तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे पूरे आंदोलन से जुड़े हजारों लोगों के त्याग और समर्पण की पहचान के रूप में देखा जा रहा है। अयोध्या में इस घोषणा के बाद साधु-संतों और श्रद्धालुओं के बीच उत्साह का माहौल है और इसे एक ऐतिहासिक क्षण के रूप में देखा जा रहा है।










