राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी कब से हो रही थी, इसकी सटीक जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है। इस पूरे मामले की जांच अब एसआईटी कर रही है, जिससे उम्मीद है कि घटना से जुड़े कई अनसुलझे सवालों के जवाब मिल सकेंगे।
अयोध्या: अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की धनराशि से जुड़ी चोरी के मामले में जांच लगातार आगे बढ़ रही है। शुरुआती कार्रवाई में जहां मंदिर परिसर के शौचालय से मिले 40 हजार रुपये ने पूरे मामले का खुलासा किया, वहीं महज 17 घंटे के भीतर पुलिस और ट्रस्ट के समन्वय से करीब 81 लाख रुपये की नकदी बरामद कर ली गई।
मामले ने तब गंभीर रूप लिया जब मंदिर परिसर में रखी गई चढ़ावे की राशि में गड़बड़ी की आशंका सामने आई। इसके बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और पुलिस प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई शुरू की। अब इस बात की जांच की जा रही है कि कथित चोरी कब से चल रही थी और इसमें कितने लोग शामिल थे।
शौचालय में मिले नोटों से शुरू हुई जांच
सूत्रों के अनुसार, चोरी की जांच की शुरुआत मंदिर परिसर के शौचालय से मिले 40 हजार रुपये से हुई। मंदिर के एक गेट कीपर ने बाथरूम में नोटों को देखा और इसकी जानकारी तुरंत ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपतराय को दी। जानकारी मिलते ही चंपतराय मंदिर परिसर पहुंचे और मामले की सूचना सुरक्षा अधिकारियों तथा ट्रस्ट के अन्य सदस्यों को दी।
इसके बाद संदिग्ध कर्मचारियों की मौजूदगी में जांच प्रक्रिया शुरू की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधिकारियों को भी इसकी जानकारी दी गई, जिसके बाद बरामदगी का सिलसिला शुरू हुआ।
आरोपितों से पूछताछ और बरामदगी की कार्रवाई
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जांच के दौरान संदिग्ध लोगों से पूछताछ की गई और उनकी निशानदेही पर अलग-अलग स्थानों से नकदी बरामद की गई। बताया जा रहा है कि अयोध्या के अलावा बहराइच और प्रतापगढ़ के कुछ क्षेत्रों से भी पैसे बरामद हुए। बरामदगी में बहराइच के नानपारा और प्रतापगढ़ के कुंडा क्षेत्र का भी नाम सामने आया है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, अलग-अलग आरोपितों और उनके संपर्कों से जुड़ी जगहों पर कार्रवाई की गई। इस कार्रवाई के दौरान कुल करीब 81 लाख 19 हजार रुपये बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है।
ट्रस्ट की सक्रियता से हुई तेज कार्रवाई
मामले से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, ट्रस्ट की सक्रियता और पुलिस के साथ बेहतर तालमेल के कारण कम समय में बड़ी रकम बरामद की जा सकी। चंपतराय के अलावा ट्रस्ट के अन्य पदाधिकारियों और पुलिस अधिकारियों ने प्रारंभिक कार्रवाई में भूमिका निभाई। बताया जा रहा है कि घटना की जानकारी मिलने के बाद मंदिर परिसर में तत्काल बैठक की गई और धनराशि की रिकवरी के लिए कदम उठाए गए।
जांच में करीब 21 लोगों की टीम के शामिल होने की बात सामने आई है। टीम ने संदिग्धों से पूछताछ, संभावित ठिकानों की जानकारी जुटाने और नकदी बरामद करने का काम किया।
सीसीटीवी रिकॉर्ड और जांच की चुनौती
मामले की जांच में एक बड़ी चुनौती यह है कि मंदिर परिसर के सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग सीमित अवधि तक उपलब्ध रहती है। जानकारी के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज करीब 45 दिनों तक ही सुरक्षित रहती है। ऐसे में जांच एजेंसियां आरोपितों के बयान और अन्य सबूतों के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कथित चोरी कब से चल रही थी और कितनी धनराशि का नुकसान हुआ। एसआईटी जांच के जरिए पूरे मामले की परतें खुलने की उम्मीद जताई जा रही है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि चढ़ावे की राशि में गड़बड़ी कब से हो रही थी। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या यह घटना एक बार हुई या लंबे समय से चल रही थी। सीसीटीवी रिकॉर्ड की सीमित उपलब्धता के कारण जांचकर्ताओं को आरोपितों के बयानों और वित्तीय लेनदेन से जुड़े सबूतों पर निर्भर रहना पड़ सकता है।








