अयोध्या में बढ़ती गर्मी को देखते हुए रामलला की सेवा और पूजा में बदलाव किए गए हैं। अब उन्हें शीतल जल से स्नान कराया जाता है, हल्के सूती कपड़े पहनाए जाते हैं और भोग में ठंडे फल व पेय शामिल किए गए हैं। पूजा में दीपों की जगह फूलों का प्रयोग किया जा रहा है, जबकि गर्भगृह में कूलर और भविष्य में एयर कंडीशनर की व्यवस्था की जा रही है।
Ayodhya Temple Updates: अयोध्या में तपती गर्मी के बीच रामलला की सेवा और पूजा पद्धति में विशेष बदलाव किए गए हैं। मंदिर प्रशासन ने अब उन्हें शीतल जल से स्नान कराया, हल्के कपड़े पहनाए और भोग में ठंडे फल, जूस व लस्सी शामिल की। पूजा में दीपों की जगह फूलों का उपयोग किया जा रहा है और गर्भगृह में कूलर लगाए गए हैं। इन बदलावों का उद्देश्य रामलला को गर्मी से राहत देना और भक्तों के लिए सुरक्षित व सहज दर्शन सुनिश्चित करना है।
शीतल स्नान और बदलती भोग व्यवस्था
भूतपूर्व व्यवस्था में रामलला को गुनगुने पानी से स्नान कराया जाता था, लेकिन अब शीतल जल का उपयोग किया जा रहा है। यह बदलाव तापमान को ध्यान में रखते हुए उनके आराम और स्वास्थ्य की दृष्टि से किया गया है।
भोग में भी ठंडक देने वाली चीजें शामिल की गई हैं। अब दही, मौसमी फल, जूस, ठंडा पेय और लस्सी रामलला को अर्पित किए जाते हैं। इससे न केवल उनकी तृप्ति बढ़ती है, बल्कि गर्मी से राहत भी मिलती है। भोग में इन हल्के और ठंडे पदार्थों को शामिल करना प्रशासन की संवेदनशीलता का प्रमाण है।

हल्के कपड़े और पूजा पद्धति में बदलाव
रामलला की पोशाक में भी बदलाव किया गया है। अब भारी वस्त्रों की बजाय हल्के और सूती कपड़े पहनाए जाते हैं, ताकि गर्भगृह का तापमान संतुलित रहे और भगवान को आराम मिले।
पूजा पद्धति में दीपों की जगह फूलों से आरती की जा रही है, जिससे अतिरिक्त गर्मी पैदा नहीं होती। मंदिर प्रशासन ने यह भी बताया कि सेवा ऐसी की जाती है जैसे पांच वर्ष के बालक की देखभाल की जाती है, इसलिए हर व्यवस्था में सावधानी बरती जाती है।
कूलिंग और भविष्य की तैयारी
गर्भगृह में कूलर लगाए गए हैं और आने वाले दिनों में एयर कंडीशनर लगाने की तैयारी भी चल रही है। मंदिर प्रशासन का उद्देश्य है कि अयोध्या की तपती गर्मी में भी रामलला की सेवा में किसी तरह की कमी न आए।
प्रशासन ने कहा कि मौसम के अनुसार व्यवस्थाओं को लगातार अपडेट किया जाता रहेगा। यह बदलाव न केवल परंपरा के अनुरूप है, बल्कि भक्तों और पर्यटकों के लिए भी बेहतर दर्शन और पूजा अनुभव सुनिश्चित करता है।








