राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को राष्ट्रपति भवन में पारंपरिक 'ऐट होम' स्वागत समारोह का आयोजन किया, जो मुख्य रूप से पूर्वोत्तर राज्यों की संस्कृति, कला और व्यंजनों पर केंद्रित था।
नई दिल्ली: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को राष्ट्रपति भवन में पारंपरिक ‘ऐट होम’ स्वागत समारोह की मेजबानी की, जिसमें देश और विदेश के गणमान्य अतिथियों ने हिस्सा लिया। इस समारोह का खास उद्देश्य भारत के पूर्वोत्तर राज्यों की समृद्ध संस्कृति, कलात्मक परंपराएं और स्वादिष्ट व्यंजन वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करना था।
राष्ट्रपति मुर्मू ने समारोह में पहुंचे सभी अतिथियों का एरी रेशम के शॉल से स्वागत किया। एरी रेशम, जिसे आमतौर पर 'शांति रेशम' कहा जाता है, पूर्वोत्तर भारत की पारंपरिक वस्त्र कला और अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा है। इस शॉल के माध्यम से अतिथियों को न केवल सम्मानित किया गया, बल्कि पूर्वोत्तर की कला और संस्कृति को भी उजागर किया गया।
मुख्य अतिथियों की उपस्थिति
समारोह में भारत के उच्चतम संवैधानिक पदों पर बैठे कई गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया। इनमें शामिल थे:
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
- पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद
- उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन
- प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत
- लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला
- कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे
- लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी
इसके अलावा, गणतंत्र दिवस समारोह के अवसर पर विदेशी अतिथियों ने भी इस स्वागत समारोह में भाग लिया। यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इस ऐतिहासिक अवसर पर विशेष रूप से शामिल होकर भारत की संस्कृति का अनुभव किया।
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पूर्वोत्तर के व्यंजन बने समारोह का आकर्षण
राष्ट्रपति कार्यालय ने बताया कि अतिथियों ने पूर्वोत्तर भारत के स्वादिष्ट व्यंजनों का आनंद लिया। इन व्यंजनों में ताजगी और पारंपरिक स्वाद का विशेष मिश्रण था, जो राज्य विशेष की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाता है। समारोह में उपस्थित सभी गणमान्य व्यक्तियों ने व्यंजनों की सराहना की और उन्हें पूर्वोत्तर की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बताया।
कार्यक्रम की तस्वीरों में देखा गया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री मोदी और विदेशी अतिथियों ने पूर्वोत्तर कलाकारों के समूह के साथ मिलकर सांस्कृतिक प्रदर्शनों का आनंद लिया। कलाकारों ने नृत्य, संगीत और हस्तकला के माध्यम से राज्य की विविधता को प्रस्तुत किया।
एरी रेशम: पारंपरिक शॉल और सांस्कृतिक प्रतीक
एरी रेशम के शॉल का प्रयोग सिर्फ स्वागत की सामग्री नहीं था, बल्कि यह पूर्वोत्तर भारत की पारंपरिक वस्त्र कला का प्रतिनिधित्व करता है। राष्ट्रपति सचिवालय ने बताया कि इस शॉल के माध्यम से अतिथियों को न केवल सम्मानित किया गया, बल्कि पूर्वोत्तर की सांस्कृतिक विरासत को भी वैश्विक मंच पर प्रदर्शित किया गया।
इस स्वागत समारोह ने न केवल भारत के समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को उजागर किया, बल्कि यह देश और विदेश के नेताओं के बीच सांस्कृतिक संवाद का भी मंच बना। राष्ट्रपति मुर्मू ने अतिथियों से संवाद करते हुए कहा कि पूर्वोत्तर की कला, संस्कृति और व्यंजन भारत की विविधता और समृद्धि का प्रतीक हैं।









