26/11 मुंबई आतंकी हमलों की बरसी पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शहीदों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने आतंकवाद के हर रूप के खिलाफ राष्ट्रीय एकता और सतत प्रयासों के महत्व पर जोर देते हुए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
New Delhi: 26/11 मुंबई आतंकी हमलों की बरसी पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देशवासियों को संदेश देते हुए आतंकवाद के हर रूप के खिलाफ अपनी प्रतिबद्धता दोहराने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इस दिन हम अपने वीर जवानों और नागरिकों के सर्वोच्च बलिदान को याद करते हैं, जिन्होंने देश की रक्षा के लिए अपनी जान दी।
राष्ट्रपति ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि 26 नवंबर की रात को पाकिस्तान से समुद्री मार्ग से आए लश्कर-ए-तैयबा के 10 आतंकवादियों ने मुंबई में आतंकवाद का भयावह हमला किया। इस हमले में 18 सुरक्षाकर्मी और कुल 166 लोगों की जान गई थी। उन्होंने कहा कि हम उनके बलिदान को कभी नहीं भूल सकते और देश हमेशा उनके साहस और समर्पण के लिए आभारी रहेगा।
राष्ट्रपति का श्रद्धांजलि संदेश
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि 26/11 के हमलों की बरसी पर वे हमारे वीर जवानों को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करती हैं, जिन्होंने देश की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर किए। उन्होंने कहा कि राष्ट्र उनके सर्वोच्च बलिदान को कृतज्ञता और सम्मान के साथ याद करता है।
राष्ट्रपति ने अपने संदेश में यह भी कहा कि आतंकवाद केवल एक देश की समस्या नहीं है, बल्कि यह पूरी मानवता के लिए खतरा है। उन्होंने देशवासियों से अपील की कि हम सभी आतंकवाद के हर रूप के खिलाफ दृढ़ता से खड़े रहें और इसकी समाप्ति के लिए सतत प्रयास करें।
आतंकवाद का सामना करने की प्रतिबद्धता
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राष्ट्रपति ने कहा, “आइए, हम आतंकवाद के सभी रूपों से मुकाबला करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराएं। हम अपने जवानों, सुरक्षा बलों और नागरिकों के बलिदान का सम्मान करें और देश की सुरक्षा सुनिश्चित करें।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देशवासियों का सहयोग और जागरूकता आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
राष्ट्रपति ने कहा कि आतंकवाद को रोकना केवल सुरक्षा बलों का काम नहीं है, बल्कि यह हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वे सतर्क रहें और देश की सुरक्षा में योगदान दें। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ राष्ट्रीय एकता और जागरूकता ही इसे समाप्त करने की कुंजी है।
26/11 मुंबई हमले का इतिहास
26 नवंबर 2008 को लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों ने मुंबई शहर में coordinated और संगठित हमले किए। आतंकवादियों ने ताज और ओबेरॉय होटल, छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी), नरीमन हाउस, कामा हॉस्पिटल, मेट्रो सिनेमा और लियोपोल्ड कैफे को निशाना बनाया।
इस हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया। आतंकवादियों ने 60 घंटे तक शहर को आतंक में रखा। इस दौरान नागरिकों और सुरक्षा बलों सहित 166 लोग मारे गए। इस हमले ने भारत को आतंकवाद रोधी नीतियों को मजबूत करने और सुरक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने की प्रेरणा दी।
शहीदों के बलिदान का सम्मान
राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संदेश में कहा कि हम अपने वीर जवानों और नागरिकों के बलिदान को हमेशा याद रखें। शहीदों ने अपने प्राणों की आहुति देकर देशवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित की। उनका साहस और समर्पण देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।








