अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का सुझाव पहले अपने रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने दिया था, जबकि बातचीत और शांति के प्रयास जारी हैं।
America: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव और संघर्ष को लेकर अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप विवादों में घिरते नजर आ रहे हैं। हाल ही में टेनेसी में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू करने का आरोप अपने रक्षा सचिव पीट हेगसेथ पर डाल दिया। कार्यक्रम में पीट हेगसेथ भी ट्रंप के बगल में बैठे हुए थे।
इस दौरान ट्रंप ने कहा कि सैन्य कार्रवाई का विचार सबसे पहले हेगसेथ ने सुझाया था और यही कारण था कि उन्होंने इसे लागू करने पर विचार किया। ट्रंप ने कहा, पीट, मुझे लगता है कि आप ही सबसे पहले बोले थे और आपने कहा था कि चलो इसे करते हैं, क्योंकि आप उन्हें परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दे सकते।"
प्रशासन में विवाद
राष्ट्रपति ट्रंप के इस बयान ने वॉशिंगटन में हलचल मचा दी है। अधिकारियों और विश्लेषकों के बीच बहस चल रही है कि आखिर अमेरिकी प्रशासन के भीतर किसने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान के लिए सबसे ज्यादा जोर दिया। ट्रंप ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि उन्होंने इस मामले में कई वरिष्ठ अधिकारियों और जनरलों से परामर्श किया। उन्होंने कहा, "मैंने पीट को फोन किया, मैंने जनरल डैन केन को फोन किया। मैंने अपने कई बेहतरीन लोगों को फोन किया और कहा कि मिडिल ईस्ट में हमारे सामने एक समस्या है।"
ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका के सामने ईरान जैसी चुनौती है, जिसने 47 वर्षों से केवल आतंक फैलाया है और न्यूक्लियर हथियार हासिल करने के बहुत करीब है। उन्होंने बताया कि अमेरिका चाहें तो सैनिकों की संख्या बढ़ाकर 50,000 से 55 और 60 हजार तक कर सकता है। इसका कोई अंत नहीं है या फिर छोटे स्तर पर अभियान करके इस चुनौती को स्थायी रूप से समाप्त किया जा सकता है।
पीट हेगसेथ को बलि का बकरा बनाने का आरोप
राष्ट्रपति ने कहा कि हेगसेथ सबसे पहले सैन्य कार्रवाई का सुझाव देने वाले थे। ट्रंप ने यह स्पष्ट किया कि यह निर्णय पूरी तरह उनके और उनके अधिकारियों की सलाह से लिया गया था, लेकिन अब उस जिम्मेदारी का बड़ा हिस्सा हेगसेथ पर डाल दिया गया। उन्होंने कहा, "सबसे पहले बोलने वाले पीट ही थे और उन्होंने कहा था कि चलो इसे करते हैं, क्योंकि हमें उन्हें न्यूक्लियर हथियार हासिल करने नहीं देना चाहिए।"
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अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का दावा
ट्रंप ने कार्यक्रम में यह भी दावा किया कि अमेरिका ईरान के साथ "बहुत अच्छी" बातचीत कर रहा है। हालांकि ईरान के सरकारी मीडिया ने इस दावे का खंडन किया और कहा कि दोनों देशों के बीच ऐसी किसी भी बातचीत की कोई पुष्टि नहीं हुई है। ट्रंप ने कहा कि बातचीत के माध्यम से समस्या का शांतिपूर्ण समाधान खोजने की पूरी कोशिश की जा रही है, लेकिन उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर जरूरत पड़ी तो अमेरिका ने हर विकल्प को अपनाने की योजना बना रखी है।
फरवरी के अंत में शुरू हुआ युद्ध
ट्रंप के अनुसार, यह युद्ध फरवरी के अंत में अमेरिका के हमलों के साथ शुरू हुआ। इसके बाद यह संघर्ष एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध में बदल गया है, जिसमें ईरान और उसके सहयोगी भी शामिल हैं। ट्रंप ने कहा कि युद्ध का उद्देश्य केवल अमेरिका की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को बनाए रखना है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अमेरिकी सेना पूरी तरह तैयार है और प्रशासन किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए सतर्क है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के परिणाम
ट्रंप ने मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और संघर्ष के प्रभावों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि युद्ध केवल सैन्य दृष्टि से नहीं, बल्कि आर्थिक और राजनीतिक दृष्टि से भी चुनौतीपूर्ण है। अमेरिका की नीतियों का उद्देश्य क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखना है और किसी भी बड़े खतरे से निपटना है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के पास रणनीतिक विकल्प हैं और प्रशासन हर परिस्थिति के लिए तैयार है।
न्यूक्लियर हथियार पर चर्चा
ट्रंप ने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि ईरान न्यूक्लियर हथियार हासिल करने के कगार पर है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी प्रशासन के लिए यह चुनौती सबसे गंभीर है और इसके लिए सैन्य कार्रवाई की जरूरत पड़ी। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन ने सैनिकों की संख्या बढ़ाने का विकल्प रखा है ताकि किसी भी अप्रत्याशित स्थिति का सामना किया जा सके।









