नगर निगम के जोन 10 से 100 एकड़ जमीन की अहम फाइल गायब हो गई। बिल्डरों को फायदा पहुंचाने की आशंका जताई जा रही है। मामले में जोन कमिश्नर को अटैच कर जांच शुरू कर दी गई है।
रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी Raipur में नगर निगम के जोन-10 कार्यालय से लगभग 100 एकड़ जमीन से जुड़ी अहम फाइल गायब होने का मामला सामने आया है। इस घटना ने शहरी प्रशासन और भूमि प्रबंधन प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्राथमिक जानकारी के अनुसार, यह फाइल अमलीडीह क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बोरियाकला इलाके के कई आवासीय क्षेत्रों से संबंधित थी, जिसमें वैध और अवैध कॉलोनियों की विस्तृत जानकारी दर्ज थी।
69 भूखंडों की लेआउट फाइल लापता
गायब हुई फाइल में ओम नगर, साईं नगर और बिलाल नगर जैसे क्षेत्रों के कुल 69 भूखंडों की लेआउट और भूमि उपयोग से जुड़ी जानकारी शामिल थी।
यह डेटा शहरी विकास और निर्माण गतिविधियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की फाइलों के गायब होने से अवैध निर्माण को वैध बनाने या नियमों में हेरफेर की आशंका बढ़ जाती है।
नियमों के विरुद्ध भेजी गई फाइल
नगर निगम अधिकारियों के मुताबिक, यह फाइल पहले जोन कार्यालय से निगम मुख्यालय भेजी जानी थी।
हालांकि, इसे सीधे Town and Country Planning Department (टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग) को भेज दिया गया, जो सामान्य प्रक्रिया के खिलाफ है।
प्रोटोकॉल के अनुसार, सभी फाइलें पहले मुख्यालय में जांच के लिए जाती हैं और फिर संबंधित विभागों को अग्रेषित की जाती हैं। इस प्रक्रिया का उल्लंघन पूरे मामले को और संदिग्ध बनाता है।
जोन कमिश्नर पर कार्रवाई, जांच के आदेश
मामले के सामने आते ही नगर निगम आयुक्त ने सख्त कदम उठाते हुए जोन-10 के तत्कालीन कमिश्नर विवेकानंद दुबे को मुख्यालय अटैच कर दिया है।
उनकी जगह मोनेश्वर शर्मा को नई जिम्मेदारी सौंपी गई है।
अधिकारियों का कहना है कि यह कदम जांच को निष्पक्ष और प्रभावी बनाने के लिए उठाया गया है।

FIR दर्ज कराने की तैयारी
नए जोन प्रभारी मोनेश्वर शर्मा ने संकेत दिए हैं कि इस मामले में जल्द ही प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाएगी।
उन्होंने कहा कि फाइल के गायब होने के पीछे जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस और प्रशासनिक एजेंसियां इस मामले की गहराई से जांच करने में जुट गई हैं।
सुनियोजित साजिश की आशंका
नगर निगम प्रशासन का मानना है कि यह सिर्फ लापरवाही का मामला नहीं हो सकता, बल्कि एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा भी हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भूमि से जुड़ी फाइलों में हेरफेर अक्सर रियल एस्टेट हितों को फायदा पहुंचाने के लिए किया जाता है।
इस मामले में भी आशंका जताई जा रही है कि बिल्डरों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से फाइल को गायब किया गया हो सकता है।
महापौर ने की सख्त कार्रवाई की मांग
रायपुर की महापौर Meenal Choubey ने इस घटना को गंभीर प्रशासनिक चूक बताया है।
उन्होंने कहा कि इस तरह के मामलों में सख्त कार्रवाई जरूरी है, ताकि भविष्य में कोई अधिकारी या कर्मचारी ऐसी लापरवाही करने की हिम्मत न करे।
महापौर ने यह भी जोर दिया कि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
शहरी विकास पर पड़ सकता है असर
भूमि से जुड़ी महत्वपूर्ण फाइलों के गायब होने से शहरी विकास परियोजनाओं पर भी असर पड़ सकता है।
यदि समय रहते इस मामले को सुलझाया नहीं गया, तो इससे न केवल कानूनी विवाद बढ़ सकते हैं, बल्कि निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
डिजिटल रिकॉर्ड की जरूरत पर जोर
इस घटना के बाद विशेषज्ञों ने नगर निगम और अन्य शहरी निकायों में डिजिटल रिकॉर्ड सिस्टम लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
डिजिटल सिस्टम से न केवल फाइलों की सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि ट्रैकिंग और पारदर्शिता भी सुनिश्चित की जा सकेगी।











