भारत इस वर्ष अपना 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है और इस अवसर पर दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित होने वाली परेड को और भी ऐतिहासिक बनाने के लिए सरकार ने एक अभूतपूर्व कदम उठाया है।
नई दिल्ली: भारत इस वर्ष अपना 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है, और इस ऐतिहासिक अवसर पर कर्तव्य पथ पर आयोजित होने वाली परेड में एक अभूतपूर्व पहल की गई है। सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों से लगभग 10,000 विशेष अतिथियों को आमंत्रित किया है, जो इस राष्ट्रीय उत्सव के साक्षी बनेंगे। यह पहल उन नागरिकों के असाधारण योगदान को सम्मानित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिन्होंने देश के विकास और समाज की उन्नति में अमूल्य भूमिका निभाई है।
विशेष अतिथियों का चयन
सरकार ने गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर आमंत्रित किए जाने वाले विशेष अतिथियों के चयन में समाज के हर वर्ग और पेशेवर क्षेत्र को प्राथमिकता दी है। इनमें सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षक, वैज्ञानिक, कलाकार, खेल जगत के प्रतिभाशाली खिलाड़ी, युवा उद्यमी और नवाचार के क्षेत्र में योगदान देने वाले नागरिक शामिल हैं। यह पहल न केवल गणतंत्र दिवस के महत्व को रेखांकित करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि सरकार समाज की विविध उपलब्धियों और असाधारण योगदानों को मान्यता देने के लिए प्रतिबद्ध है।
विशेष अतिथियों की उपस्थिति से कर्तव्य पथ पर आयोजित भव्य परेड और भी गरिमामयी बनेगी। यह उन लाखों आम नागरिकों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी होगी, जो देश के विकास में अपना योगदान दे रहे हैं। इस बार का आयोजन, समावेशी भारत के निर्माण की दिशा में एक नया मील का पत्थर माना जा रहा है।

गणतंत्र दिवस का महत्व
गणतंत्र दिवस हर साल 26 जनवरी को मनाया जाता है। यह दिन भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ और देश एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य बना। दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित परेड में देश की सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक विविधता, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की उपलब्धियां और खेलकूद क्षेत्र की सफलता का प्रदर्शन किया जाता है।
77वें गणतंत्र दिवस पर आयोजित होने वाली परेड में शामिल होने वाले 10,000 विशेष अतिथि इस ऐतिहासिक अवसर का गवाह बनेंगे। यह पहली बार है जब इतने बड़े पैमाने पर आम जनता और असाधारण योगदान देने वाले नागरिकों को सरकारी सम्मान और आमंत्रण मिला है।
परेड की भव्यता
परेड के दौरान देश की सशस्त्र सेनाएं, पैराट्रूपर्स और विभिन्न सैन्य और नागरिक इकाइयों की प्रदर्शनी देखने को मिलेगी। इसके अलावा, राज्य-वार सांस्कृतिक झांकियां, आधुनिक तकनीक और विज्ञान प्रदर्शनी भी कर्तव्य पथ पर प्रस्तुत की जाएंगी। विशेष अतिथियों के लिए बने सुव्यवस्थित बैठने की व्यवस्था और सुरक्षा के व्यापक प्रबंध भी किए गए हैं।
सरकार का मानना है कि विशेष अतिथियों की उपस्थिति से परेड का सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व और बढ़ेगा। यह कदम उन नागरिकों को मंच प्रदान करता है जिन्होंने चुपचाप लेकिन प्रभावी ढंग से देश की सेवा की है। गणतंत्र दिवस 2026 का यह आयोजन न केवल भव्यता के लिए याद किया जाएगा, बल्कि समावेशी और लोकतांत्रिक भारत की दिशा में भी इसे एक प्रेरक कदम माना जा रहा है।









