केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने जेन-जी आंदोलन, जंतर-मंतर प्रदर्शन, अभिजीत दीपके, राहुल गांधी और कांग्रेस पर बयान दिए। उन्होंने युवाओं से संवाद की जरूरत बताई, पुलिस कार्रवाई का बचाव किया और संसद, FCRA, परिसीमन व BJP की नई टीम पर सरकार का पक्ष रखा।
नई दिल्ली: केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने न्यूज एजेंसी ANI को दिए इंटरव्यू में जेन-जी आंदोलन, जंतर-मंतर प्रदर्शन, राहुल गांधी, कांग्रेस, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान और संसद के मानसून सत्र समेत कई मुद्दों पर सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि जेन-जी देश के अपने युवा हैं और उनसे लगातार संवाद बनाए रखना जरूरी है। साथ ही उन्होंने विपक्ष पर संसद की कार्यवाही बाधित करने और राजनीतिक मुद्दों को आंदोलन से जोड़ने का आरोप लगाया।
रिजिजू ने जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस की कार्रवाई का बचाव किया। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान गोली नहीं चली और किसी प्रदर्शनकारी की मौत नहीं हुई। उन्होंने CJP फाउंडर अभिजीत दीपके की राजनीतिक पृष्ठभूमि पर भी सवाल उठाते हुए पूछा कि यदि वे आम आदमी पार्टी से जुड़े रहे हैं तो उन्हें छात्र नेता के रूप में कैसे पेश किया जा रहा है।
जेन-जी हमारे बच्चे, बातचीत जरूरी
जेन-जी आंदोलन को लेकर रिजिजू ने कहा कि युवाओं से सरकार का संवाद बना हुआ है और इसमें किसी तरह की कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि जेन-जी देश के अपने बच्चे हैं, इसलिए उनकी बात सुनना और उन्हें सरकार का पक्ष समझाना दोनों जरूरी हैं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि युवाओं की समस्याओं और उनकी मांगों को केवल राजनीतिक टकराव के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। सरकार को उनके सवालों को समझने के साथ-साथ अपनी नीतियों और फैसलों के बारे में भी उन्हें जानकारी देनी चाहिए।
रिजिजू ने यह भी कहा कि यदि युवाओं को लगातार केवल मांगें उठाने के लिए प्रेरित किया जाता रहेगा और राजनीतिक ताकतें उनके आंदोलनों को प्रभावित करेंगी, तो सरकार और युवाओं के बीच भरोसा कायम करने में अधिक समय लग सकता है।
जंतर-मंतर प्रदर्शन पर पुलिस का बचाव
जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन को लेकर रिजिजू ने दिल्ली पुलिस और प्रशासन का बचाव किया। उन्होंने कहा कि हजारों लोगों के प्रदर्शन के बावजूद गोली नहीं चली और किसी प्रदर्शनकारी की मौत नहीं हुई।
उनके मुताबिक पुलिस ने तब कार्रवाई की, जब प्रदर्शनकारी संसद की ओर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे। रिजिजू ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान किसी व्यक्ति की हड्डी टूटने या गंभीर रूप से घायल होने की जानकारी सामने नहीं आई।
उन्होंने पुलिस की कार्रवाई को कानून-व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश बताया। रिजिजू ने यह भी दावा किया कि यदि इसी तरह का आंदोलन कांग्रेस के शासनकाल में हुआ होता तो स्थिति कहीं ज्यादा गंभीर हो सकती थी। हालांकि उनके इस बयान पर विपक्ष की ओर से राजनीतिक प्रतिक्रिया की संभावना बनी हुई है।
अभिजीत दीपके पर उठाए सवाल
रिजिजू ने जेन-जी आंदोलन से जुड़े CJP फाउंडर अभिजीत दीपके की भूमिका पर भी सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि दीपके आम आदमी पार्टी से जुड़े कार्यकर्ता हैं और ऐसे में उन्हें छात्र नेता के तौर पर पेश किए जाने पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राजनीतिक दलों को युवाओं के आंदोलनों को अपने राजनीतिक हितों के लिए इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। उनके मुताबिक आंदोलन में शामिल युवाओं की वास्तविक समस्याओं और उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि के बीच अंतर समझना जरूरी है।
रिजिजू का यह बयान ऐसे समय आया है जब जेन-जी से जुड़े आंदोलनों और उनके नेतृत्व को लेकर राजनीतिक बहस चल रही है।
राहुल गांधी पर नेता प्रतिपक्ष की गरिमा को लेकर निशाना
राहुल गांधी के संसद में व्यवहार को लेकर रिजिजू ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष का पद महत्वपूर्ण संवैधानिक और संसदीय जिम्मेदारी से जुड़ा है। इसलिए इस पद पर बैठे व्यक्ति को सदन के भीतर अपने व्यवहार और भाषा को लेकर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
रिजिजू ने कहा कि उनका राहुल गांधी से कोई व्यक्तिगत विवाद नहीं है और दोनों के बीच मुलाकात तथा बातचीत भी होती रहती है। लेकिन उन्होंने राहुल गांधी की संसदीय शैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें अपने पद की गरिमा के अनुरूप सदन में अपनी भूमिका निभानी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने जिस तरह की राजनीतिक शैली अपनाई है, उसका प्रभाव कांग्रेस के दूसरे सांसदों के व्यवहार पर भी दिखाई देता है।
अमित शाह के बयान पर कांग्रेस को घेरा
संसद में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर विपक्ष की चर्चा की मांग को लेकर रिजिजू ने कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस चर्चा से बचने के लिए सदन में हंगामे का रास्ता अपना रही है।
रिजिजू ने कहा कि सरकार किसी भी मुद्दे पर सवालों का जवाब देने और तथ्यों के आधार पर चर्चा करने के लिए तैयार है। उनके मुताबिक संसद का उद्देश्य बहस और कानून निर्माण है, केवल नारेबाजी या हंगामा करना नहीं।
उन्होंने विपक्ष से अपील की कि सांसदों को सदन में चर्चा के जरिए अपनी बात रखनी चाहिए। रिजिजू ने कहा कि यदि किसी सांसद का उद्देश्य सिर्फ हंगामा करना है तो वह संसद के बजाय सड़क पर प्रदर्शन कर सकता है।
‘दिमागी नक्सल’ बयान पर कांग्रेस को जवाब
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर दिए गए ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान पर कांग्रेस के विरोध को लेकर भी रिजिजू ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कांग्रेस पर नक्सली और माओवादी विचारधारा की ओर बढ़ने का आरोप लगाया।
रिजिजू ने कहा कि सशस्त्र नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों की कार्रवाई से जंगलों में स्थिति बदली है, लेकिन उनके अनुसार नक्सली विचारधारा का प्रभाव कुछ शहरी क्षेत्रों में अभी भी मौजूद है। उन्होंने सवाल किया कि कांग्रेस ने प्रधानमंत्री के बयान को अपने ऊपर क्यों लिया।
केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस की वैचारिक दिशा पर भी सवाल उठाए और कहा कि पार्टी के भीतर पहले भी ऐसी विचारधाराओं से जुड़े लोगों का प्रभाव रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस अब माओवादी विचारधारा के करीब जाती दिखाई दे रही है।

मनमोहन सिंह के बयान का किया जिक्र
रिजिजू ने इस मुद्दे पर पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के 2006 के बयान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मनमोहन सिंह ने उस समय नक्सलवाद को देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बताया था।
रिजिजू ने कांग्रेस से सवाल किया कि यदि नक्सलवाद पर पहले उसकी सरकार का भी यही रुख था, तो आज प्रधानमंत्री के बयान का विरोध क्यों किया जा रहा है। उन्होंने कांग्रेस से मनमोहन सिंह के परिवार से माफी मांगने की मांग भी की।
राहुल गांधी के PM मोदी पर तंज का पलटवार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति और विदेशी नेताओं से उनकी मुलाकातों को लेकर राहुल गांधी की टिप्पणी पर भी रिजिजू ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी प्रधानमंत्री का मजाक उड़ाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन इससे उनकी अपनी छवि को नुकसान पहुंचा।
रिजिजू ने राहुल गांधी की टिप्पणी को राजनीतिक रूप से अपरिपक्व बताया और कहा कि प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं और वैश्विक नेताओं के साथ बैठकों को लेकर विपक्ष को तथ्यों के आधार पर चर्चा करनी चाहिए।
मानसून सत्र में विपक्ष पर निशाना
संसद के मानसून सत्र के कामकाज पर रिजिजू ने कहा कि सदन नहीं चलने से सबसे ज्यादा नुकसान विपक्ष को ही होता है। उन्होंने कहा कि सरकार के पास बहुमत होने के कारण वह विधेयक पारित करा सकती है, लेकिन सरकार चाहती है कि हर महत्वपूर्ण मुद्दे और बिल पर चर्चा हो।
उन्होंने विपक्षी सांसदों से सदन की कार्यवाही में सहयोग करने की अपील की। रिजिजू के मुताबिक लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार और विपक्ष दोनों की जिम्मेदारी है कि संसद को प्रभावी तरीके से चलाया जाए।
राम मंदिर चंदे पर चर्चा के लिए तैयार थी सरकार
राम मंदिर चंदे में कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर रिजिजू ने कहा कि सरकार इस विषय पर चर्चा के लिए तैयार थी। हालांकि उन्होंने कहा कि संसद में सभी मुद्दों पर एक साथ चर्चा करना संभव नहीं है।
उनके अनुसार विपक्ष कई विषयों को एक साथ उठाना चाहता था, जबकि सरकार चाहती थी कि मुद्दों को प्रक्रिया के तहत लिया जाए और प्रत्येक विषय पर उचित चर्चा हो।
FCRA बिल पर JPC का समर्थन
FCRA संशोधन विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति यानी JPC के पास भेजे जाने को रिजिजू ने सकारात्मक कदम बताया। उन्होंने कहा कि JPC में विस्तृत चर्चा और जांच के बाद इस मुद्दे से जुड़े तथ्य सामने आ सकते हैं।
विपक्ष के इस आरोप को उन्होंने खारिज किया कि FCRA कानून किसी खास धर्म या समुदाय को निशाना बनाता है। रिजिजू ने विदेशी योगदान से जुड़े आंकड़ों का उल्लेख करते हुए दावा किया कि ईसाई मिशनरियों को मिलने वाला हिस्सा कुल विदेशी योगदान का करीब 16 प्रतिशत है और बाकी राशि अन्य संगठनों को जाती है।
परिसीमन और BJP की नई टीम पर भी बोले
परिसीमन बिल को लेकर रिजिजू ने कहा कि सरकार ने अभी किसी नए बिल को पेश करने की घोषणा नहीं की है। उन्होंने कहा कि मीडिया में इस संबंध में अटकलें चल रही हैं और विधेयक कब लाना है, इसका फैसला पार्टी नेतृत्व व्यापक चर्चा के बाद करेगा।
BJP की नई राष्ट्रीय टीम पर उन्होंने कहा कि इसमें विभिन्न राज्यों, क्षेत्रों और समाज के अलग-अलग वर्गों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की गई है। उनके अनुसार टीम में अनुभवी नेताओं के साथ नए और ऊर्जावान चेहरों को भी जगह मिली है। रिजिजू ने इसे संगठन के लिए उत्साह बढ़ाने वाला कदम बताया।












