NSUI की राष्ट्रीय सचिव रितु बराला से दिल्ली में कथित मारपीट के मामले में जयपुर में कांग्रेस नेताओं ने जीरो FIR दर्ज करने की मांग की। पुलिस ने बताया कि शिकायत दिल्ली के कनॉट प्लेस थाने में जांच के अधीन है।
जयपुर: दिल्ली में नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) की राष्ट्रीय सचिव रितु बराला के साथ कथित मारपीट और अभद्रता के मामले ने राजस्थान की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। जयपुर में कांग्रेस नेताओं ने संबंधित दिल्ली पुलिसकर्मियों के खिलाफ जीरो FIR दर्ज करने की मांग को लेकर पुलिस कमिश्नरेट में धरना दिया। सोमवार शाम से शुरू हुआ प्रदर्शन मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 तक जारी रहा। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को पीछे हटाने के लिए हल्का बल प्रयोग किया।
राजस्थान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा सहित कई नेता रातभर कमिश्नरेट परिसर में डटे रहे। मंगलवार को नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और अन्य कांग्रेस नेताओं ने भी प्रदर्शन में भाग लिया। कांग्रेस का आरोप है कि रितु बराला की शिकायत पर जयपुर में जीरो FIR दर्ज नहीं की जा रही, जबकि पुलिस का कहना है कि दिल्ली के कनॉट प्लेस थाने में पहले से शिकायत दर्ज है और मामले की जांच जारी है।
सोमवार शाम से कमिश्नरेट में धरने पर बैठे कांग्रेस नेता
कांग्रेस नेताओं का प्रतिनिधिमंडल सोमवार शाम करीब 6:15 बजे जयपुर पुलिस कमिश्नरेट पहुंचा। डोटासरा और पार्टी के अन्य नेताओं ने रितु बराला की शिकायत पर जीरो FIR दर्ज करने की मांग की। जब तत्काल कार्रवाई नहीं हुई, तो नेताओं ने कमिश्नरेट परिसर में ही धरना शुरू कर दिया।
प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने परिसर में रात बिताई और मंगलवार सुबह भी धरना जारी रखा। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कमिश्नरेट के बाहर नारेबाजी की तथा पुलिस से शिकायत पर औपचारिक प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी डोटासरा से फोन पर बात की थी। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने मामले में जयपुर में FIR दर्ज कराने की दिशा में कार्रवाई करने को कहा था। इसके बाद राजस्थान कांग्रेस ने इस मुद्दे पर अपना विरोध तेज किया।
पुलिस ने जीरो FIR दर्ज करने से किया इनकार
जयपुर पुलिस ने कहा कि 13 अक्टूबर को दिल्ली में हुए घटनाक्रम के संबंध में रितु बराला पहले ही कनॉट प्लेस थाने में शिकायत दे चुकी हैं। पुलिस के मुताबिक, इस मामले में केस संख्या 291/2026 दर्ज है और जांच की जा रही है।
अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अजय सिंह के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान रितु बराला और एक पुलिसकर्मी के बीच कथित हाथापाई हुई थी। बराला की शिकायत को दिल्ली में दर्ज मामले की फाइल के साथ जोड़कर जांच में शामिल किया गया है। पुलिस का तर्क है कि जब संबंधित घटना की शिकायत पहले से दर्ज है और जांच जारी है, तो उन्हीं तथ्यों के आधार पर जयपुर में अलग से जीरो FIR दर्ज करने की जरूरत नहीं है।
जयपुर पुलिस ने यह भी कहा कि बराला ने घटना वाले दिन ही दिल्ली पुलिस को शिकायत दे दी थी। इसलिए इलाज में व्यस्त होने के कारण दिल्ली में शिकायत दर्ज नहीं करा पाने का तर्क उसके अनुसार तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है। यह पुलिस का आधिकारिक पक्ष है, जबकि कांग्रेस इस मामले में अलग FIR दर्ज करने की मांग पर अड़ी हुई है।
डोटासरा बोले—दिल्ली में दर्ज FIR का विवरण दिखाए पुलिस
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने पुलिस के तर्क पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि दिल्ली में संबंधित शिकायत पर केस दर्ज है, तो उसका विवरण सामने रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पुलिस दस्तावेज दिखा दे, तो कांग्रेस नेता कमिश्नरेट से चले जाएंगे।
डोटासरा ने जीरो FIR दर्ज करने को कानूनी अधिकार बताते हुए आरोप लगाया कि पुलिस शिकायत पर कार्रवाई करने से बच रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर आखिरी दम तक लड़ाई लड़ेगी और बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन शिकायत पर कार्रवाई होनी चाहिए।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि उनकी मांग किसी विशेष राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि शिकायत दर्ज कराने और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए है। दूसरी ओर, पुलिस का कहना है कि घटना की जांच पहले से संबंधित थाने में चल रही है। दोनों पक्षों के बीच यही कानूनी और प्रक्रियागत मतभेद धरने की मुख्य वजह बने हुए हैं।
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टीकाराम जूली ने भी पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी जयपुर पुलिस के रुख की आलोचना की। उन्होंने सवाल उठाया कि जब रितु बराला ने शिकायत दी है, तो FIR दर्ज करने में आपत्ति क्यों है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी और राज्य सरकार पर महिला सुरक्षा के मुद्दे पर दोहरे रवैये का आरोप लगाया।
जूली ने कहा कि कांग्रेस इस मामले में कार्रवाई होने तक अपना विरोध जारी रखेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि महिला सम्मान और सुरक्षा की बात करने वाली सरकार को कथित मारपीट के मामले में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करनी चाहिए।
ये बयान कांग्रेस नेताओं की राजनीतिक प्रतिक्रिया हैं। मामले में पुलिसकर्मियों पर लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही की जा सकती है।
प्रदर्शन के दौरान बैरिकेड्स पर चढ़े कार्यकर्ता
मंगलवार को कमिश्नरेट के बाहर प्रदर्शन के दौरान कुछ कांग्रेस कार्यकर्ता बैरिकेड्स पर चढ़ गए। इसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की हुई। पुलिस ने कार्यकर्ताओं को पीछे हटाने के लिए हल्का बल प्रयोग किया और परिसर के बाहर स्थिति नियंत्रित करने की कोशिश की।
कुछ कार्यकर्ता बैरिकेड्स और कमिश्नरेट की दीवारों पर भी चढ़े। इसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाया। घटना के बाद कुछ कांग्रेस कार्यकर्ता और महिला नेता फिर कमिश्नरेट के बाहर धरने पर बैठ गए।
प्रदर्शन के कारण कमिश्नरेट परिसर के आसपास तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में किसी गंभीर चोट या गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं की गई है।
क्या है जीरो FIR और विवाद का कानूनी पहलू?
जीरो FIR ऐसी प्राथमिकी है, जिसे किसी संज्ञेय अपराध की शिकायत मिलने पर घटना के क्षेत्राधिकार से बाहर स्थित पुलिस थाने में भी दर्ज किया जा सकता है। बाद में मामले को जांच और आगे की कार्रवाई के लिए संबंधित क्षेत्र के पुलिस थाने को भेजा जा सकता है।
कांग्रेस का तर्क है कि जयपुर पुलिस को शिकायत दर्ज कर उसे संबंधित दिल्ली पुलिस थाने को भेज देना चाहिए। पार्टी के नेताओं ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 173(1) का हवाला देते हुए अपनी मांग का समर्थन किया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल के साथ इस मुद्दे पर पुलिस से कार्रवाई की मांग की।
हालांकि, इस मामले में पुलिस का कहना है कि दिल्ली के कनॉट प्लेस थाने में पहले ही शिकायत दर्ज है और जांच जारी है। इसलिए दोनों पक्षों के बीच विवाद इस बात पर केंद्रित है कि क्या जयपुर में अलग से जीरो FIR दर्ज की जानी चाहिए, जबकि संबंधित शिकायत दिल्ली में पहले से जांच के अधीन है।
इस सवाल पर अंतिम कानूनी निष्कर्ष निकालने के लिए संबंधित FIR, शिकायत के दस्तावेज और लागू कानूनी प्रावधानों का परीक्षण जरूरी होगा।
आगे की कार्रवाई पर टिकी नजर
रितु बराला मामले में फिलहाल दो प्रमुख सवाल बने हुए हैं—दिल्ली में दर्ज शिकायत की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और जयपुर पुलिस कांग्रेस की जीरो FIR की मांग पर क्या रुख अपनाती है। कांग्रेस नेताओं ने धरना जारी रखने की चेतावनी दी है, जबकि जयपुर पुलिस का कहना है कि मामले की जांच दिल्ली में चल रही है और उसी के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई होगी।
अब जांच में शिकायत, घटना के समय मौजूद लोगों के बयान, चोटों से संबंधित दस्तावेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। निष्पक्ष जांच से ही यह तय किया जा सकेगा कि कथित मारपीट के आरोपों में कितनी सच्चाई है और संबंधित पक्षों की क्या जिम्मेदारी बनती है।







