अमेरिका और रूस के बीच न्यू START परमाणु समझौते की वैधता आज यानि 5 फरवरी को खत्म हो गई। इससे पहली बार दोनों देशों के परमाणु हथियारों पर कोई सीमा नहीं रहेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे वैश्विक सुरक्षा और परमाणु प्रतिस्पर्धा पर गंभीर असर पड़ेगा।
World News: अमेरिका और रूस के बीच बचे हुए आखिरी न्यूक्लियर हथियार नियंत्रण समझौते न्यू START की वैधता आज यानि 5 फरवरी को समाप्त हो रही है। यह पहला मौका है जब 50 साल में दुनिया के दो सबसे बड़े परमाणु हथियार भंडारों पर कोई सीमा नहीं रहेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे वैश्विक सुरक्षा पर बड़ा असर पड़ेगा और परमाणु हथियारों की होड़ तेज हो सकती है।
इस समझौते की समाप्ति से रूस और अमेरिका दोनों के बीच तैनात परमाणु हथियारों की संख्या पर कोई नियंत्रण नहीं रहेगा। इससे वैश्विक स्तर पर परमाणु अस्थिरता बढ़ेगी और दुनिया पर परमाणु युद्ध का खतरा मंडराने लगेगा।
न्यू START समझौते का महत्व
न्यू START डील पर 2010 में अमेरिकी राष्ट्रपति बाराक ओबामा और रूसी राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते के तहत दोनों देशों को 1,550 तैनात परमाणु वारहेड्स और 700 मिसाइलों या बमबर्स तक सीमित किया गया था। इसमें साइट पर निरीक्षण (on-site inspections) की व्यवस्था भी थी, ताकि हथियारों की तैनाती और संख्या का सही आंकलन किया जा सके।
समझौते को 2021 में पांच साल और बढ़ाया गया था। हालांकि COVID-19 महामारी के कारण 2020 में निरीक्षण प्रक्रिया रुक गई और फिर कभी बहाल नहीं हुई। रूस ने फरवरी 2023 में घोषणा की कि वह यूक्रेन युद्ध के कारण अमेरिका और NATO की नीतियों के चलते सीमाओं का पालन अनिश्चित रूप से करेगा।
समझौते की समाप्ति क्यों हो रही
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सितंबर 2025 में प्रस्ताव दिया था कि यदि अमेरिका सीमाओं का पालन करे तो न्यू START की सीमा एक साल और लागू रहेगी। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस प्रस्ताव पर कोई स्पष्ट प्रतिबद्धता नहीं जताई। ट्रंप ने बार-बार कहा कि वे परमाणु हथियारों पर सीमा रखना चाहते हैं, लेकिन इसमें चीन को भी शामिल करना चाहते हैं। चीन ने अपने बढ़ते परमाणु भंडार पर किसी भी प्रतिबंध को खारिज किया है।

इस स्थिति के चलते न्यू START का औपचारिक अंत 5 फरवरी को होना तय हो गया।
क्रेमलिन और विशेषज्ञों की चिंता
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि अमेरिका और रूस के परमाणु भंडारों पर कोई सीमा न होने से दुनिया "बेहद खतरनाक" हो जाएगी। आर्म्स कंट्रोल एसोसिएशन के कार्यकारी निदेशक डैरिल किम्बॉल ने चेतावनी दी कि समझौते की समाप्ति से पहली बार दोनों देश तैनात परमाणु हथियारों की संख्या बढ़ा सकते हैं।
किम्बॉल ने कहा कि इससे अमेरिका, रूस और चीन के बीच तीन-तरफा अनियंत्रित होड़ शुरू हो सकती है। दोनों पक्ष "सबसे खराब स्थिति" के लिए तैयारी करेंगे, जिससे तैनाती बढ़ेगी और परमाणु युद्ध का खतरा और बढ़ जाएगा।
ट्रंप के कदम और "गोल्डन डोम" योजना
अक्टूबर 2025 में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका परमाणु परीक्षण फिर शुरू कर सकता है। इसके जवाब में पुतिन ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका परीक्षण करेगा तो रूस भी वही करेगा। अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने कहा कि इन परीक्षणों में न्यूक्लियर विस्फोट शामिल नहीं होंगे।
ट्रंप की "गोल्डन डोम" मिसाइल डिफेंस योजना ने रूस और चीन दोनों को चिंता में डाल दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे वैश्विक परमाणु प्रतिस्पर्धा का नया और खतरनाक दौर शुरू हो सकता है, जिसमें खर्च बढ़ेगा और अंतरराष्ट्रीय संबंध अस्थिर होंगे।
परमाणु नियंत्रण का इतिहास
न्यू START समझौता 1972 में हुए SALT I ट्रीटी से शुरू हुई परमाणु नियंत्रण श्रृंखला का आखिरी हिस्सा था। इसके बाद 2001 में अमेरिका ABM ट्रीटी से बाहर निकल गया, जिसके जवाब में रूस ने Burevestnik और Poseidon जैसे नए हथियार विकसित किए। 2019 में INF ट्रीटी समाप्त हो गई। अब न्यू START का अंत भी हो रहा है, जिससे अमेरिका और रूस के बीच कोई नियंत्रण नहीं रहेगा।
रूसी सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष मेदवेदेव ने कहा कि बिना समझौते रूस किसी भी नई धमकी का "कड़ा जवाब" देगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम दुनिया में परमाणु हथियारों की होड़ और अनियंत्रित परमाणु तैनाती को बढ़ावा देगा।







