केरल के विश्वप्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर से जुड़े कथित सोने के नुकसान मामले में अदालत ने एक अहम फैसला सुनाया है। इस बहुचर्चित मामले में त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (TDB) के पूर्व प्रशासनिक अधिकारी मुरारी बाबू को अदालत ने कानूनी (डिफॉल्ट) जमानत दे दी है।
Sabarimala: केरल के सबरीमला मंदिर से जुड़े कथित सोने के नुकसान मामले में न्यायिक प्रक्रिया ने एक अहम मोड़ ले लिया है। लंबे समय से चर्चा में रहे इस मामले में जांच एजेंसियों की देरी अब सवालों के घेरे में है। वहीं दूसरी ओर, अदालत के एक फैसले ने पूरे मामले की दिशा बदल दी है। शुक्रवार को त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (टीडीबी) के पूर्व प्रशासनिक अधिकारी मुरारी बाबू को सबरीमला मंदिर से सोने के कथित नुकसान से जुड़े दो मामलों में कानूनी जमानत दे दी गई।
क्यों मिली मुरारी बाबू को जमानत?
अदालत के अनुसार, मुरारी बाबू की गिरफ्तारी को 90 दिन पूरे हो चुके थे, लेकिन इस अवधि में विशेष जांच टीम (SIT) दोनों मामलों में चार्जशीट दाखिल करने में विफल रही। दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) के प्रावधानों के तहत, ऐसी स्थिति में आरोपी को वैधानिक जमानत का अधिकार मिल जाता है। इसी आधार पर शुक्रवार को अदालत ने मुरारी बाबू को राहत प्रदान की।
फिलहाल मुरारी बाबू तिरुवनंतपुरम की विशेष उप-जेल में बंद थे और अदालत के आदेश के बाद उन्हें उसी दिन रिहा किए जाने की संभावना जताई गई है।
मुरारी बाबू सबरीमाला मंदिर से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में आरोपी हैं:
- द्वारपालक (रक्षक देवता) की मूर्तियों की सोने की प्लेटों से कथित सोना गायब होने का मामला, जिसमें वे दूसरे आरोपी हैं।
- श्रीकोविल (गर्भगृह) के दरवाजों के फ्रेम से सोना गायब होने का मामला, जिसमें उन्हें छठा आरोपी बनाया गया है।
इन दोनों मामलों ने केरल ही नहीं, बल्कि पूरे देश में धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर बहस छेड़ दी है।

कब और क्यों हुई थी गिरफ्तारी?
मुरारी बाबू को अक्टूबर 2024 में गिरफ्तार किया गया था। जांच एजेंसियों का आरोप है कि मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी ने मंदिर के द्वारपालक देवताओं की मूर्तियों और श्रीकोविल के दरवाजों पर इलेक्ट्रोप्लेटिंग (सोने की परत चढ़ाने) का प्रस्ताव दिया था। मुरारी बाबू ने इस प्रस्ताव को त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के समक्ष आगे बढ़ाया।
इसी प्रक्रिया के आधार पर उन पर साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया गया। गिरफ्तारी के समय मुरारी बाबू हरिपाड में डिप्टी देवस्वोम कमिश्नर के पद पर कार्यरत थे। बाद में उन्हें निलंबित कर दिया गया था।
अन्य आरोपियों की क्या है स्थिति?
इस मामले में पहले ही मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी को द्वारपालक मूर्ति मामले में वैधानिक जमानत मिल चुकी है। SIT अब तक:
- द्वारपालक मूर्ति मामले में 16 लोगों
- श्रीकोविल दरवाजा फ्रेम मामले में 13 लोगों
- को आरोपी बना चुकी है।
पुलिस सूत्रों का कहना है कि यदि चार्जशीट दाखिल करने में और देरी होती है, तो अन्य गिरफ्तार आरोपी भी अदालत में डिफॉल्ट बेल के लिए आवेदन कर सकते हैं। हाल ही में केरल हाईकोर्ट ने इस मामले में जांच की प्रगति पर संतोष जताया था। कोर्ट ने कहा था कि जांच एजेंसियां मामले की गहराई से जांच कर रही हैं और सभी पहलुओं को ध्यान में रखा जा रहा है। हालांकि, चार्जशीट में हुई देरी अब जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही है।










