माघ मेला 2026 विवाद में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मुख्यमंत्री के इशारे पर अपमान का आरोप लगाया। उप मुख्यमंत्री की माफी के बावजूद दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई न होने से उन्होंने स्नान करने से इनकार कर दिया।
प्रयागराज: माघ मेला 2026 के दौरान संत समाज और प्रशासन के बीच पैदा हुआ विवाद अब राजनीतिक और धार्मिक बहस का बड़ा मुद्दा बन गया है। इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में हैं स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, जिन्होंने खुले तौर पर कहा है कि उनके साथ जो कुछ हुआ, वह किसी एक अधिकारी की गलती नहीं बल्कि मुख्यमंत्री के इशारे पर हुआ अपमान है। ऐसे में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के आग्रह पर वह स्नान कैसे कर सकते हैं, यह सवाल उन्होंने खुद उठाया है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का कहना है कि उनसे और उनके शिष्यों से माघ मेला क्षेत्र में अभद्रता की गई, मारपीट हुई और इसके बावजूद दोषी अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। यही वजह है कि उन्होंने स्नान से दूरी बनाए रखने का फैसला किया।
क्या है पूरा मामला
माघ मेला के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके साथ आए लोगों के साथ कथित तौर पर प्रशासनिक स्तर पर दुर्व्यवहार हुआ। स्वामी का आरोप है कि उनके लोगों को पीटा गया और उन्हें अपमानित किया गया। इस घटना के बाद संत समाज में नाराजगी फैल गई।
मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने खुद सामने आकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से क्षमा मांगी और उनसे माघ मेला में स्नान करने का आग्रह किया।
उप मुख्यमंत्री की माफी पर स्वामी का जवाब
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की माफी को व्यक्तिगत रूप से सराहनीय बताया। उन्होंने कहा कि भाजपा में कम से कम ऐसे नेता हैं जिन्हें गलती होने पर ग्लानि होती है। क्षमा मांगना एक नेक कार्य है और इसके लिए उप मुख्यमंत्री सम्मान के पात्र हैं।
लेकिन इसके साथ ही उन्होंने साफ किया कि उप मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री नहीं हैं। जिनके इशारे पर यह पूरा अपमान हुआ, उनकी ओर से न तो कोई बयान आया और न ही कोई ठोस कार्रवाई हुई।
मुख्यमंत्री पर सीधे आरोप

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बिना किसी लाग लपेट के कहा कि उनका अपमान मुख्यमंत्री के इशारे पर हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने जानबूझकर उनके साथ सख्ती की और उनके लोगों को निशाना बनाया।
उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से इस पूरे मामले में चुप्पी साध लेना कई सवाल खड़े करता है। अगर वास्तव में गलती हुई थी, तो मुख्यमंत्री को सामने आकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए थी।
दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिन अधिकारियों ने मारपीट और अभद्रता की, उन पर अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई। उनका कहना है कि जब तक दोषी अधिकारियों पर सख्त कदम नहीं उठाए जाते, तब तक सिर्फ क्षमा याचना से बात नहीं बनेगी।
उन्होंने कहा कि संत समाज को केवल प्रतीकात्मक सम्मान नहीं चाहिए, बल्कि न्याय चाहिए। अगर प्रशासन सच में गलती मानता है, तो उसका प्रमाण कार्रवाई के रूप में दिखना चाहिए।
स्नान को लेकर डर
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर वह अब स्नान करने जाते हैं, तो उन्हें दोबारा अभद्रता और मारपीट का डर है। उनका कहना है कि माहौल अभी भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब पहले ही उनके साथ दुर्व्यवहार हो चुका है और जिम्मेदार लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो यह कैसे भरोसा किया जाए कि आगे ऐसा नहीं होगा।
कालनेमि विवाद पर बयान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा सनातन धर्म को कालनेमियों से खतरे वाले बयान पर भी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कालनेमि कौन है, इसे वह अच्छी तरह जानते हैं।
स्वामी ने कहा कि कालनेमियों का चेहरा अब साफ हो चुका है और संत समाज उन्हें पहचानता है। उन्होंने इस मुद्दे पर ज्यादा विस्तार से कुछ न कहते हुए संकेत दिया कि असली खतरे कहां से हैं, यह किसी से छिपा नहीं है।
संत समाज में नाराजगी का माहौल
इस पूरे घटनाक्रम के बाद संत समाज में गहरी नाराजगी देखी जा रही है। कई संतों का मानना है कि अगर इस मामले में सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो भविष्य में प्रशासन और संत समाज के रिश्ते और बिगड़ सकते हैं। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का यह बयान सिर्फ एक व्यक्ति का विरोध नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे संत समाज की व्यापक पीड़ा के रूप में देखा जा रहा है।










